क्रोधी स्वयं भी जलता है और दूसरों को भी जलाता है। ब्रहमा कुमार नारायण भाई
क्रोधी स्वयं भी जलता है और दूसरों को भी जलाता है। ब्रहमा कुमार नारायण भाई
अलीराजपुर 10 दिसंबर
किसी ने हमे गाली दी, हम ने भी उसे गाली दी, हमारी कोई प्रशंसा नही करता तो हम ने भी नही की, इसे रिएकशन कर्म कहेगे ।
वातावरण ऐसा था इसलिये गुस्सा आ गया तो यह रिएक्शन है ।आप की प्रशंसा नही की जाती तो भी सामने वाले का सम्मान किया तो यह सही कर्म है । कर्म एक चल रहा है, मन कुछ और सोच रहा है, भावना बिलकुल विपरीत है, ये कर्म का विभाजन है ।
कर्म के विपरीत चले, जैसे मंदिर में पूजा कर रहा है, मन में सोच रहा है पत्नी ने बुरा बोला, उसने ऐसा कहा, वैसा कहा, ये पत्थर कर्म है ।
जो कर्म विकार रहित होते है, नफरत व क्रोध रहित होते है, ऐसे कर्म अकर्म कहलाते है ।हर कर्म के फल का बल तुरंत महसूस होता है । यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला की प्रणेता ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने दीपा की चोकी में स्तिथ ब्रहमा कुमारी सभागृह में हर क्रिया कि प्रतिक्रिया होती है इस विषय पर नगर वासियों को समझाते हुए बताया कि
किसी के प्रति मन में नफरत हो और उसकी वजह से उसकी चुगली करते है, तो आप को तुरंत अशांति महसूस होती है ।
कुछ कर्म ऐसे होते है जिसका फल तुरंत मिलता है । जैसे आग में हाथ डाला तो उसका हाथ जल जायेगा ।आप किसी के लिये बुरा सोचते है तो आप को बुरा बुरा लगेगा ।
अगर किसी के लिये अच्छा सोचते है तो आप को आनंद की अनुभूति होती है । आप में प्रेम जागृत होता है ।
हर कर्म के फल का बल तुरंत महसूस होता है, लेकिन कुछ ही लोग महसूस करते है ।जो संवेदनशील नही होते उन्हे फल का बल महसूस नही होता ।
गुस्से को शांत करने का सबसे आसान तरीका है कि गहरी सांसें लें और मन ही मन भगवान के बिंदू रूप या ईष्ट को याद करें और दो मिनट के लिए बिल्कूल चुप हो जाएं, मुख से कुछ नहीं बोलना, कुछ देर में आप पाएंगे कि आप शांत हो रहे हैं।
गुस्सा जैसे ही आएं आप अपना सांस रोक ले जब तक दम ना घुटने लगे और मन ही मन कहें मैं शांत हूं शांत हूं , फिर सांस ले फिर रोके, यही अभ्यास करें, 3-4 मिनिट में आप का क्रोध शांत हो जाएगा ।
गुस्सा होने से ऐसी तरंगे निकालती है जो दूसरों के और स्वंय के मन को जलाती है । जलने से बदबू निकालती है । फूलो की महक बदबू को दबा देती है ।
गुस्सा करने से ऑक्सिजन की कमी पड़ जाती है यही कारण है क़ि गुस्से को कम करने के लिए ठंडा पानी पीना एक पुरानी तरकीब है, जो कारगर है, क्योंकि पानी पीने से ऑक्सिजन की कमी पूरी हो जाती है । सकारात्मक विचारों को अपनाकर आप बहुत आसानी से मन को शांत रख सकते हैं।
यही नियम और यही विधि से नफरत, अपमान, निंदा-चुगली आदि विचारों पर भी विजय पा सकते हैं ।

