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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..22-04-2021*..🎋
✍🏻जिंदगी ने मेरे मर्ज़ का एक बढीया इलाज़ बताया, वक्त को दवा कहा और मतलबियो का परहेज बताया |
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻 हम जो कमाते है उससे हमारा गुज़र-बसर होता हैं, लेकिन हम जो देते (दान) हैं उससे हमारा खुशनुमा जीवन बनता हैं आप जो दे रहे हैं उसके प्रति सजग रहें क्योंकि देने से आप अपना भविष्य बना रहे हैं कर्म का नियम सदैव काम करता है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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अनमोल वचन :
चित्त (मन) और वित्त (धन) की स्थिति लगभग एक जैसी है।जैसे चित्त अर्थात मन को काबू में रखना असम्भव सा है वैसे ही धन को भी मुट्ठी में बंद कर नहीं रखा जा सकता। हमारा मन वहीं ज्यादा जाता है जहाँ हम इसे रोकना चाहते हैं। इसीलिए ही कहा गया है कि मन को जहाँ से हटाना चाहोगे यह उसी तरफ ही भागेगा। ठीक ऐसे ही धन जब आता है तो शांति भी बाहर की ओर भागने लगती है। धन के साथ-साथ स्वयं की शांति और परिवार का सदभाव बना रहे,यह थोड़ा मुश्किल हो जाता है। चित्त और वित्त दोनों चंचल हैं,दोनों जायेंगे ही,इसलिए दोनों को जाने भी दो मगर कहाँ ? जहाँ सत्संग हो,साधु सेवा हो, परोपकार हो,जहाँ प्रभु का द्वार हो और जहाँ से हमारा कल्याण हो।
🙏ओम् शांति🙏
🎈आपका दिन शुभ हो 🎈
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*🌹ओम शांति🌹*
*मनुष्य की वास्तविक पूंजी धन नही, अच्छे विचार है !!*
*ह्रदय में ईर्ष्या का भाव पाल लेने का अर्थ है......*
*की अच्छे खासे जीवन में आग लगा लेना.....*
*जो मानव अपने अवगुण और दूसरों के सद्गुण देखता है..*
*वही महान व्यक्ति बन सकता है !!*
*अभ्यास हमें बलवान बनाता हैं* ,
*दुःख हमें इंसान बनाता हैं*,
*हार हमें विनम्रता सिखाती हैं*,
*जीत हमारे*
*व्यक्तित्व को निखारती है*,
*लेकिन*
*सिर्फ़ विश्वास ही है*,
*जो हमें*
*आगे बढने की प्रेरणा देता है*.
*इसलिए हमेशा*
*अपने लोगों पर अपने आप पर*
*और अपने ईश्वर पर*
*विश्वास रखना चाहिए*
*🙏🌅ॐ शांति🌅🙏*
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*समुद्र मंथन सा*
*लग रहा है यह साल,*
*इतना विष निकल रहा है तो*
*अमृत भी जरूर निकलेगा..!!*
ओम शांति
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*22 अप्रैल:-*_ कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए प्रस्सन दिखाई नही देता की उसको कोई परेशानी नहीं है बल्कि इसलिए प्रस्सन रहता है की उसका जीवन जीने का दृष्टिकोण सकारात्मक है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*सुविधाओं का गलत इस्तेमाल*
*कहीं अधीरता का प्रतीक न बन जाए*
_● किसी ने मुझे बहुत ही प्यार से फूल भेंट किए लेकिन मुझे कांटे चुभ गए और खून निकल आया। हम सभी के जीवन में ऐसा कभी न कभी होता है। अब सामने वाला कहेगा मैंने तो फूल दिए थे और आपको दर्द हो रहा है? यही रहस्य जीवन में पता करना है।_
_● सारे दिन में हम जो कुछ कर रहे हैं चाहे वे रिश्ते हैं, चाहे वो कारोबार है, वह सबकुछ जो हम कर रहे हैं, वह हमारे जीवन के फूल हैंं और यह हमारे जीवन की सजावट हैं। पता यह करना है कि वे ही फूल कमाते-कमाते कोई कांटा तो नहीं चुभ रहा है, दर्द तो नहीं हो रहा? अगर हमारा ध्यान दर्द की तरफ होगा तो वे सारे फूल मुझे खुशी नहीं दे सकेंगे। हमें उन फूलों के साथ चुभने वाली चीज को हटाना है। जिससे हमें सिर्फ फूल नहीं बल्कि खुशी मिले, दुआएं मिलें, सुख मिले, सेहत मिले, सुंदर रिश्ते मिले, सिर्फ सजावट नहीं।_
_● एक है बाहरी सजावट और एक है अंदर का सुकून। वर्तमान समय में बाहरी चीजें बहुत बढ़ गई हैं। हमारी पीढ़ी ने फोन के बिना जीवन जीया था। आगे आने वाली पीढ़ी को तो यह पता ही नहीं होगा कि फोन के बिना भी कोई जीवन होता है। उसे यह समय समझ में नहीं आएगा। आजकल जैसे ही फ्लाइट लैंड करने लगती है तो सभी उस समय क्या करने लगते हैं? एयरहोस्टेस कहती है रुको जरा, लेकिन....।_
_● हम ही हैं जो फोन के बिना रहते थे। आज हम फ्लाइट के उतरने का भी इंतजार नहीं कर पाते हैंं। फोन तो वो फूल है जो हमारे जीवन को सुंदर, सुविधाजनक बनाने आया था। लेकिन ठीक से इस्तेमाल नहीं किया तो वो फोन फिर अधीरता का प्रतीक बन जाता है। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि फोन बहुत तनाव देता है। वे फूल अब चुभने लग गए।_
_● अगली बार जब फ्लाइट लैंड कर रही हो 10 मिनट उसको ऑन न करें। अधीर होने से मेरी शक्ति घट रही है। जीवन के हर सीन में चेक करना है कि मेरी शक्ति घट रही है या बढ़ रही है। सिर्फ एक फोन ऑन करने की प्रक्रिया से आत्मा की शक्ति घट रही है। सारा दिन इसे चेक करते रहते हैं। इसीलिए लोग फिर कहते हैं जब फोन नहीं था तो हम ज्यादा खुश थे। फोन को इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हमने अपनी आत्मा की शक्ति घटाई है।_
_● हम वह खूबसूरत पीढ़ी हैं जिसके पास सुविधा भी होंगी और साथ में शक्ति भी होगी। हमारे पहले की पीढ़ी के पास सुविधाएं कम थी लेकिन शक्ति ज्यादा थी। हमनेे घर की चीजें धीरे-धीरे खरीदी हंै।_
_● पहले साइकिल आई, फिर स्कूटर, फिर गाड़ी, फिर घर लेने में कितना टाइम लगा। आज आपके बच्चों को सब कुछ उपलब्ध है। जिन्हे बिना मेहनत सुविधाएं मिलेंगी, उनकी शक्ति वैसे ही कम हो जाएगी। जीवन में सफल होने के लिए उस आत्मा के पास भीतरी शक्ति होनी चाहिए। मतलब सामंजस्य बैठाने की शक्ति, संयम रखने की शक्ति, अलग-अलग संस्कारों के साथ मिलकर चलने की शक्ति। मुश्किल आने पर दृढ़ रहने की शक्ति, औरों से प्यार से काम करवाने की शक्ति, ये सारी शक्ति आप उसे कौन से स्कूल में देंगे?_
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*🎊★ ओम शान्ति ★🎊*
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*एक महिला रोटी बनाते बनाते "ॐ नमो शिवाय" का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही..."ॐ नमो शिवाय"!*
एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था।
दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे प्रभु क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को..। खैर डॉक्टर साहब. मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया।
चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।...
*रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी।*
उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..?
उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती।
फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था।
*उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी।*
तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था :--- *प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"*
ओम शांति🙏✍🌹💝