*मंडी टैक्स में बढ़ोत्तरी से चालू बाजार भाव मे उपज का दाम घटा हुआ किसानों को नुकसान*
*एमएसपी गारंटी नहीं होने से किसानों को नहीं मिलता है उनके उपज का सही दाम*
*मंडी टैक्स में बढ़ोत्तरी से चालू बाजार भाव मे उपज का दाम घटा हुआ किसानों को नुकसान*
राजिम
कृषि उपज मंडी राजिम में शनिवार को धान का 1370 रू प्रति क्विंटल तक बोली लगी तो किसानों ने एकमत होकर अपना उपज बेचने से इनकार कर दिया था और मंडी प्रांगण में ही खुले में अपना उपज छोड़कर घर चले गए थे। सोमवार सुबह 9.30 बजे मंडी कार्यालय राजिम में डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी तहसीलदार अनुपम आशीष टोप्पो की उपस्थिति में किसान प्रतिनिधियों, व्यापारी प्रतिनिधियों और मंडी प्रशासन के बीच सुचारू रूप से मंडी में क्रय विक्रय प्रारंभ करने के संबंध में बैठक हुई। बैठक में नायाब तहसीलदार अंकुर रात्रे, मंडी सचिव एन के भंडारी, मंडी निरीक्षक सपन शर्मा, फड़ प्रभारी पवन कुमार पटेल, व्यापारी प्रतिनिधि किशन सांखला, दिनेश साधवानी, दीनू राम साहू, किसान प्रतिनिधि तेजराम विद्रोही, बिष्णु राम साहू, रामभरोसा साहू, खेलावन साहू, नारायण साहू आदि उपस्थित रहे।
बैठक पश्चात शनिवार की तुलना में 1400 रु प्रति क्विंटल की दर से बोली शुरू की गई जो धान की किस्म और गुणवत्ता के आधार पर सामान्य मोटा 1494 रु प्रति क्विंटल तो पतला 1722 रु प्रति क्विंटल की दर से बिक्री हुई।
मंडी टैक्स बढ़ाए जाने के कारण किसानों की उपज का बोली अन्य दिनों की तुलना में प्रति क्विंटल 150 रु से 200 रु तक की नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है।
*न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी कानून अति आवश्यक है :- तेजराम विद्रोही*
यदि सरकार न्यूनतम समर्थन में पूरे साल भर खरीदी के लिए कानूनी गारंटी लागू कर दे तो किसान अपने उपज को औने पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होंगे। राज्य सरकार को चाहिए कि कृषि उपज मंडी अधिनियम की धारा 36 (3) का पालन हो अनिवार्य रूप से करवाए। जिसमे कहा गया है कि जिस भी फसल का समर्थन कीमत तय किया गया है उससे कम पर बोली नहीं लगाई जाएगी। यह कानून भी कहीं न कहीं एमएसपी की गारंटी देता है जरूरत है पालन सुनिश्चित करने की।