*आज का सुविचार* - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

*आज का सुविचार*

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..09-08-2020*..🎋

✍🏻जिस इंसान का सारा जीवन लोगों के जीवन मे खुशी बिखेरने में बीत जाये, इससे बड़ी खुशनसीबी और नही हो सकती।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *ओमशान्ति*🌷
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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻कुँए में उतरने के बाद बाल्टी झुकती है लेकिन झुकने के बाद भर कर ही बाहर निकलती है जीवन भी कुछ ऐसा ही है, जो झुकता है वो अवश्य कुछ न कुछ लेकर ही उठता है यहीं जिंदगी हैं |
🌹 *ओमशान्ति*🌹

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       *09 August 2020*

  *🍁 आज की प्रेरणा 🍁*

किसी को भी खुश करने का मौका मिले तो छोड़ना मत, वो फरिश्ते ही होते हैं जो किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट दे पाते हैं।

👉 *आज से हम* सभी के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कुराहट लाने का प्रयत्न करें...

*🍁 TODAY'S INSPIRATION 🍁*

Don’t miss the opportunity to make others happy, for the angels can only bring a smile on others' faces!

👉 *TODAY ONWARDS LET'S* try to bring a sweet smile on everyone’s face… 


                *MADHUBAN*


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📚  गीता ज्ञान का आध्यात्मिक रहस्य  📚
              The  Great  Geeta
                                     No• 144 
    👤  जीवन  जीने  की  सम्पूर्ण  विधि  🌹
              🔺 अठारहवाँ अध्याय 🔻
              एक है देहभान , दूसरा है अभिमान और तीसरा है  अहंकार ! ये तीन  स्टेजिज़ ( Stages ) हैं ! अहंकार  सबसे  बुरा  है  !  क्योंकि  वो  अनेक आत्माओं  को   बहुत   दुःख  पहुंचाने  वाला  है  ! अभिमान  उससे  थोड़ा  कम  है ! अभिमान  माना क्या ?  अभिमान  दो शब्द से बना है ! अभि- मान अर्थात्  कोई भी  इंसान  जब भी छोटा-मोटा कर्म करता है तो उसके मन के अन्दर तरन्तु ये भाव आ जाता है कि अभी-अभी मुझे मान मिलना चाहिए ! जहाँ  ये मान  प्राप्त करने की इच्छा आ गयी ये  है अभिमान ! उसमें भले वो दूसरे को दुःख न भी देता हो , लेकिन अपने अभिमान की पुष्टि  जरूर करता है ! अभिमान माना अभि-अभि मान चाहिए ! जहाँ उसको मान मिल जाता है वहाँ  वो  खुश  हो जाता है ! आत्म- तृप्ति का अनुभव करता है ! उस  मान में  आकर के वो कोई भी कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है !
                    एक छोटा बच्चा भी आज दुनिया के अन्दर  अभिमान  की  वृत्ति  रखता  है ! आज एक छोटा बच्चा घर में है और मान लो कि उसका पिता शाम को घर में आता है ! तो  उस वक्त्त उसकी माँ उसको कहती है बेटा , जा एक गिलास पानी लेकर आओ पिताजी के लिए ! वो दोड़कर जाता है और एक  गिलास पानी  भरकर ले आता है ! और जब वो अपने  पिता को पानी देता है और मान लो कि उसी  वक्त्त पिता ने उसको कह दिया शाबश बेेटे ! थैंक्यू ! बस इतना कहा तो उस बच्चे का अभिमान भी सन्तुष्ट हो जाता है ! दूसरे दिन शाम को उसका पिता आता है तो माँ को कहना नहीं पड़ता है , वो तरन्तु भागता है और उस मान की इच्छा को लेकर कि आज भी मुझे थैंक्यू मिलेगा , पानी का गिलास लेकर पुहंच जाता है !  लेकिन  मान  लो  कि पिता अपनी  टेंशन  में  है और उसने  बेटे को थैंक्यू  नहीं कहा, शाबश  बेटा नहीं  कहा !  दूसरे दिन जब  वो पिता  शाम  को आता है और  माँ  उस   बच्चे  को कहती है बेटा पानी लेकर आओ तो क्या कहेगा ? मैं बिज़ी हूँ , आप ही लेकर आओ !  दूसरे दिन  वो पानी  का   गिलास   लेने  के  लिए  दौड़ेगा   नहीं , क्योंकि  उसके  मान  की  पूर्ति  नहीं   हुई  !  बच्चा समझने लगता है कि जैसे  कोई हमें चाकलेट देता है और हमसे तो बार-बार बुलवाते  हैं, थैंक्यू  करो बेटा और तब वो थैंक्यू बोल  देता है !  लेकिन जब वो बेटा थैंक्यू सुनने की भावना से पानी का गिलास लेकर गया और उसको  किसी ने  थैंक्यू  बेटा नहीं कहा तो दूसरे  दिन उसको  चॉकलेट देकर के दस बार कहो कि थैंक्यू कहो बेटा, थैंक्यू कहो बेटा, तो बिल्कुल  नहीं  बोलेगा !  क्योंकि उसने  जब कोई कर्म  किया, आपकी  सेवा  में, तो आपने तो  उसो थैंक्यू कहा ही नहीं ! तो  उसे यह महसूस होता है ! कितनी उसकी  कैचिंग पावर है कि जब मैने पानी दिया तो थैंक्यू नहीं मिला और जब  मुझे चॉकलेट इत्यादि  दे रहे हैं तो मुझे हर  बार  थैंक्यू बोलने के लिए क्यों कहते हैं ? दस बार माँ के बोलने पर भी वो बच्चा नहीं  बोलता है !  तो क्या कहती है माँ ? आजकल  ये  जिद्दी  हो  गया  है  ! नहीं  तो इतना अच्छा थैंक्यू  बोलता  है ,  लेकिन  अब  क्यों  नहीं बोलता ?
             इस तरह से जब कोई व्यक्त्ति या कोई भी बच्चा कोई भी कार्य करता है तो उसको थैंक्यू कह दो , तो देखो वो दूसरे दिन फटा-फट उसको , चाहे आये या न आये  करेगा  और  वह  आपको  मदद करने के लिए जरूर पुहंच जायेगा !
                     भावार्थ ये है कि अहंकार बहुत बुरा है , उससे  कम  अभिमान  है !  अभी-अभी  मान मिल गया तो खुश ! नहीं  मिला, तो बड़ा दुःखी हो जाता है इंसान कि मैने  इतना  किया फिर भी मुझे मान नहीं मिला ! कई बार देखा जाता है कि घर के अन्दर  ही एक  व्यक्त्ति  ये  चाहना  रखता  है  कि अभी-अभी मेरी  बात  माने , उसका ये  अभिमान है ! जबकि सामने  वाला व्यक्त्ति  समझता है  कि अभी-अभी मान  मिले तो  मैं  बात  मानूं  !  दूसरा सोचता है  कि  अभी-अभी  मेरी  बात  मानें  !  वो सोचता  है  कि अभी-अभी  मान मिले , तो उसकी बात मानूं ! अगर  मान  नहीं  मिलता  है तो मानेंगा कैसे ? 
                     इस तरह आज की दुनिया के अन्दर जो घरों में कलह- कलेश  होते  हैं  उनका  कारण क्या है ? बड़ा  सोचता  है  कि मेरी बात मानें और छोटा  सोचता  है  कि  इतना  किया  है  , पहले  तो उसको  मान  देवें !  फिर मैं उसकी बात मानूं ! इस प्रकार  के   झगड़े ,  कलह-क्लेश ,  अभिमान  के कारण  कई   घरों  में  देखने  को  मिलते  हैं  !  तो अभिमान  भी कलह-क्लेश  निर्मित  ज़रूर करता है !  अभिमान  धीरे-धीरे व्यक्त्ति  को  असंस्कारी  बनाने  लगता  है  !  तीसरी  जो  अवस्था है  वो  है देहभान की, जिस का वर्णन अगले भाग में करेंगे !
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