बन चरौदा की महिलाओं ने जैविक फसल लेने की दिखाई दिशा
जैविक खाद ने महिलाओं की,आर्थिक तरक्की की राह की आसान
बन चरौदा की महिलाओं ने जैविक फसल लेने की दिखाई दिशा
रायपुर
राज्य शासन की मंशा के अनुरूप सुराजी गांव योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा एवं बाड़ी का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। इन्हीं योजनाओं के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन होने से लगातार ग्रामीणजनों और महिलाओं अर्थव्यवस्था को सशक्त होने का सुअवसर भी प्राप्त हो रहा है।
रायपुर जिला के आरंग विकासखण्ड अंतर्गत् ग्राम बन चरौदा के गौठान में धनलक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह द्वारा वर्मी कम्पोस्ट से अच्छी गुणवत्ता के जैविक खाद बनाये जा रहे हैं। इन महिलाओं ने अब तक गौठान में 120 क्विंटल केचुआं खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का उत्पादन कर 84 हजार रूपये का विक्रय किया गया है। केचुअंा खाद पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है। इन महिलाओं अब गांव वालों को जैविक फसल लेने की नई दिशा दिखाई है।
समूह की महिलाओं ने बताया कि उनके द्वारा गौठान में केचुआं खाद तैयार कर विक्रय किया जा रहा है जिससे उसके आय में बढ़ोत्तरी हुयी है तथा स्वरोजगार भी मिला। उन्होंने बताया कि इसके लिए कृषि विभाग रायपुर के अधिकारियों द्वारा एक्सटेंशन रिफाम्र्स आत्मा योजनांतर्गत् प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया गया, जिससे उन्हें नई जानकारी, मानसिक संबलता और कार्यक्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
महिलाओं ने यह भी बताया कि केचुआं खाद पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति में बढ़ोत्तरी, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, भूमिगत जल स्तर में बढ़ोत्तरी, भूमि में पाये जाने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं में बढ़ोत्तरी होती है और इस कारण यह पर्यावरण के अनुकूल तथा किसान मित्र है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि महिला समूहो द्वारा केचुआं खाद बनाने से उनकी आय में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है तथा वे आत्मनिर्भर बन रही है। उनकी आय में बढ़ोत्तरी होने से उनके जीवन शैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है।



