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*तीनों कानून पर रोक और कमेटी का गठन आंदोलन को कमजोर करने का तरीका ह

 *तीनों कानून पर रोक और कमेटी का गठन आंदोलन को कमजोर करने का तरीका है 



तीन काले कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली के विभिन्न सीमाओं में जारी  किसान आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ से दिल्ली पहुंचे किसानों का जत्था 12 जनवरी को लगातार तीसरे दिन सिंघु बार्डर पर डटे रहे साथ ही छत्तीसगढ़ की ओर से लंगर की व्यवस्था की गई है।


तीसरे दिन धरना सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव और छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लाये गए  कॉरपोरेट परस्त तथा किसान , कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून लागू


करने की मांग को लेकर अध्यादेश लाये जाने के समय से ही विरोध जारी है। न्यायालय ने इस बात पर कहीं भी विचार नहीं किया कि अध्यादेश के जरिए लाया गया कानून संवैधानिक है या नहीं, क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और राज्य को पूछे बिना ही कानून बनाया गया है। सरकार से किसानों का दो ही माँग है तीनों कृषि कानून रद्द करो और न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करो लेकिन हठधर्मी केन्द्र की मोदी सरकार इसका समाधान करने में असफल साबित हुआ है।इस असफलता को ढंकने के लिए ही न्यायालय का सहारा लिया है। कानून पर रोक लगाना मोदी का नैतिक हार जरूर है परंतु इसके पीछे का लक्ष्य किसान आंदोलन जो जन आंदोलन का स्वरूप ले लिया है को कमजोर करना है जिस पर न्यायालय की सहमति दिखाई देती है। क्योंकि किसानों का आंदोलन कृषि क्षेत्र के निगमीकरण के खिलाफ और खाद्य सुरक्षा की अधिकारों का रक्षा करना है।

नवाब जिलानी ने कहा कि  किसान ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ता भी समझ चुके हैं कि यह कानून चंद पूंजीपतियों के लिए असीमित मुनाफा बटोरने के लिए सुविधा देने वाली है। मुक्त बाजार के जरिये किसानों का खेत और खेती छीनना चाहते हैं। 

 सभा मे  बलजिंदर सिंह ज्ञानी, सुखबीर सिंह,दलबीर सिंह, गजेंद्र कोसले, नवाब जिलानी,  अमरीक सिंह,  सुखदेव सिंह सिद्धू, उत्तम कुमार, लीलाधर, सोनू पुरोहित, नरेन्द्र टंडन, पुकलाल, भूषण साहू, सोमनाथ साहू, भारत सिंह गाँवरे, ओमप्रकाश जांगड़े, डोमार वर्मा, बिषरू राम, प्रेम शंकर वर्मा मनिंदर सिंह, वेद प्रकाश ठाकुर, कोमल प्रधान, गैन्दू राम, प्रितराम साहू, महंजूराम दर्रो, प्रेमलाल साहू, सुकदेव कचलाने, प्रभुराम सिन्हा, घनश्याम कुरेटी, नियम सिंह पटेल, आरतु राम सहारे, सोमन मरकाम, पदुमराम साहू, शंकुराम, आनंदी राम, बिरसिंग रात्रे आदि उपस्थित रहे।

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