गुप्त नवरात्रि तृतीया से शिवमहापुराण महायज्ञ प्रारंभ
गुप्त नवरात्रि तृतीया से शिवमहापुराण महायज्ञ प्रारंभ
ग्राम लोरिक नगर गढ़ बजरंग पारा रीवॉ मे गुप्त नवरात्रि तृतीया से शिवमहापुराण महायज्ञ प्रारंभ हुआ जिसमे सच्चिदानंद महाकाली मंदिर खौना वाले पाठक महाराज जी बताए कि प्रथम दिन शिवमहापुराण कथा मे भगवान शिव के गुण से पहले उनके धारण किये रुद्राक्ष की महिमा रुद्राक्ष धारण से मुक्ति मिलती है वैज्ञानिक भी मानते है कि रुद्राक्ष धारण करने से किसी भी व्यक्ति को हृदयघात नही होता
डमरू जो है वह प्रभुता का कारक है कमण्डल है जो सादगी का कारक है व्याघ्र जो है वह सौर्य का कारक है और त्रिशूल जो है वह सामर्थ का कारक है माँ गंगा पवित्रता का कारक है भगवान शिव अद्भुत है इसकी कथा भी अद्भुत है प्रथम दिन की कथा में सिर्फ भगवान के सभी प्रिय वस्तु का कथा बताये अभी तक भगवान शिव के गुणों के बारे मे वर्णन नही हुआ और कई पुराणो मे पहले उस पुराण के आराध्य के बारे मे बताया जाता है पर भगवान शिव की कथा मे उनके धारण किये सभी वस्तुओ का वर्णन है यही कारण है कि भगवान शिव को भोले अवघड भूतनाथ भंडारी आशुतोष कहते है जिसमे परायणकर्ता कृष्णानंद चौबे जी साजा ठेलका वाले है।
रीवा मे शिव महापुराण प्रारंभ
दूसरे दिन की कथा मे सच्चिदानंद पाठक महाराज ने बताया किभगवान के करुणा प्रेम महादानी महिमा का वर्णन किया ब्राम्हण यज्ञदत्त के पुत्र कुकर्मी दुराचारी गुणनिधि के उपर भगवान शिव की कृपा दया करुणा प्रेम के कारण वह गुणनिधि कुबेर पथ को प्राप्त किया दूसरे दिन की कथा का सार हर जीव को करुणा भाव से दया भाव से प्रेम भाव से देखना चाहिए यह भगवान भोलेनाथ के मुख से निकला वाणी है।
यह जानकारी आयोजक समिति के सदस्य प्रफुल्ल साहू ने दी
