आज का चिंतन(सुविचार)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..23-02-2021*..🎋
✍🏻दुनिया वो किताब है जो कभी नहीं पढी़ जा सकती, लेकिन जमाना वो अध्यापक है, जो सब कुछ सिखा देता है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻सरलता ओर स्वाभिमान मनुष्य के दो अनमोल गुण है, जो उसे महान बनाती है, अंहकार ओर अभिमान मनुष्य के दो अवगुण है, जो उसे पतन की ओर ले जाते है।
🌹 *σм ѕнαитι.*
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दुनिया की सबसे बड़ी व भयंकर
बिमारीयों में से एक है ।
ईर्ष्या की बिमारी ।
🔷दूसरे के बढ़प्पन को पसन्द न करना। अर्थात् दूसरे की उन्नति व उसको आगे बढता देख और दूसरे की महिमा को पसन्द न करना।🔷
दूसरे के मुकाबले अपने को हीन समझ कर द्वेष भाव रखना ईर्ष्या करना है।
🔷ईर्ष्या वास्तव में हीन मनोवृत्ति का सूचक है। जिससे वह खुद ही खुद दुखी होता रहता है। और जिससे वह ईर्ष्या करता है। उस को पता भी नहीं पड़ता है। और कभी- कभी ईर्ष्यालु क्यक्ति के हाव- भाव व चाल- चलन से पता पड़ जाता है । कि यह क्यक्ति मेरी उन्नति से जलता है।🔷
🔶🔵ईर्ष्या परायेपन की भावना की सूचक
होती है। क्यों कि जिसे हम अपना समझते है। उनकी उन्नति ,उत्कर्ष व बडप्पन से हमें खुशी होती है। न कि ईर्ष्या होगी ।🔵🔶
अगर हम अपने आप को एक परिवार का समझते है तो एक दूसरे की उन्नति को देख कर खुशी होनी चाहिए। भाई को बहन की उन्नति को देख तथा बहन को भाई की उन्नति देखकर प्रसन्नता होनी चाहिए।
ईर्ष्या वैरभाव का सूचक है। न कि बन्धुत्व भाई चारे का ।
यह मित्र भाव नहीं परन्तु शत्रु भाव है।
यह बड़े दिल व उदारता की नहीं परन्तु संकीर्णता व छोटे दिल की निशानी है।
🔷ईर्ष्या रखना कोई महानता नहीं है परन्तु हीनता का सूचक है।🔷
यह छोटे व अज्ञानी लोगों की निशानी है।
🔷ईर्ष्या अन्दर कुण्ठा पैदा करती है। जिससे जलन और क्रोध उत्पन्न होता है। ईर्ष्या में ४०-५०% क्रोध समाया हुआ है। 🔷
🔷ईर्ष्या अन्दर का कालापन है।
ईर्ष्यालु क्यक्ति अन्दर ही अन्दर कुढ़ता रहता है। जिनसे अनावश्यक रूप से तनाव पैदा होता है। जिससे हमारे Nervous system पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
ईर्ष्या के कारण क्यक्ति का स्वभाव रूखा और चिड़चिड़ा हो जाता है। जिसके कारण उसका व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता ।
🔵ईर्ष्या की आग अन्दर ही अन्दर सुलगती रहती है हमें जलाती रहती है। जिससे हमारे मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को हानि पहुँचती है।🔵
ईर्ष्या करके हम किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकते, सिर्फ अपने स्वास्थ्य का नाश करते है।
🔷इस से बचने का उपाय:-🔷
इस के लिए यह सोचे की इस संसार में हर कोई अपने किये हुवे कर्मों की प्रालब्ध पा रहा है। अगर कोई आगे बढ़ रहा , जरूर उसने मेहनत की है। अभी नहीं तो पूर्व जन्मों में की होगी । इस संसार में फ्री फोकट में कुछ नहीं मिलता । हर आत्मा अपनी ही मेहनत की कमाई खा रही है।
हम भी मेहनत करें। हम भी उन्नति को पायेगें।
क्या ईर्ष्या करने से हम दूसरे का भाग्य छिन सकते है?यह अपनी ही कमजोरी है।
🔷ईर्ष्या एक अवगुण है न कि कोई महान क्यक्ति की निशानी है।🔷
ईर्ष्या क्रोध व अहंकार का एक रूप है।
🔷ईर्ष्यालु दूसरे की टांग ही खींचता रहता है। 🔷
ईर्ष्यालु दूसरे के अवगुण ही गिनाता रहता है।
🔷ईर्ष्यालु दूसरे को नीचे गिराने की कोशिश ही करता रहता है। उसका जीवन व्यर्थ में गुजर जाता है।🔷
🌲अगर हम दूसरों की सफलता में उनको प्रोत्साहित नहीं करते है तो जरूर यह हमारा अंहकार व ईर्ष्या है।🌲
🔷हे देव कुल की आत्माओं ! अब इस बिमारी से मुक्त बनो।🔷
जो देता है। वही देवता है।
देवता का सम्मान व पूजन होता है।
ओम शांति





