क्षेत्रीय खबरें
जिनके इसकी छवि देखते ही बन रही हैं। दर्शनार्थी एक बार दर्शन करने के बाद वह बार-बार निहारने के लिए आतुर हो रहे हैं। वैसे भी वैदिक विधि से प्रतिदिन पूजा-पाठ एवं आरती किया जाता है तथा दाल चावल और सब्जी का भोग लगाया जाता हैं। इस प्रसाद को खाने के लिए श्रद्धालुगण दूर-दूर से आते हैं और चावल का एक दाने से ही तृप्त हो जाते हैं। सुबह के समय राजीवलोचन की छवि को ध्यान से देखने पर पता चलता कि वह बाल्यावस्था में हैं, दोपहर को युवा और शाम को प्रौढ़ा अवस्था प्राप्त करते हैं। बताया जाता हैं कि श्रीराजीव लोचन की प्रतिमा पत्थर की भाॅति कठोर नहीं बल्कि आम इंसान की तरह कोमल होने की अनुभूति होती है।
*भगवान श्री राजीव लोचन मनमोहक रूप*
गुरुवार, 4 मार्च 2021
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*भगवान श्री राजीव लोचन मनमोहक रूप*
राजिम
पन्द्रह दिवसीय राजिम माघी पुन्नी मेला में प्रतिदिन भगवान श्री राजीव लोचन के दर्शन करने श्रद्धालुओं की तदात बढ़ती जा रही है। गौरतलब हो कि श्रीराजीव लोचन भगवान विष्णु का स्वरूप है। चतुर्भुज राजीव लोचन भगवान अपने चारों हाथ में शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किये हैं। पर्व तथा विशेष अवसर पर इन्हें श्रृंगारिक किया जाता हैं। आज भगवान को पीताम्बरी एवं अंगा परिधान से आभूषित किया गया था।
जिनके इसकी छवि देखते ही बन रही हैं। दर्शनार्थी एक बार दर्शन करने के बाद वह बार-बार निहारने के लिए आतुर हो रहे हैं। वैसे भी वैदिक विधि से प्रतिदिन पूजा-पाठ एवं आरती किया जाता है तथा दाल चावल और सब्जी का भोग लगाया जाता हैं। इस प्रसाद को खाने के लिए श्रद्धालुगण दूर-दूर से आते हैं और चावल का एक दाने से ही तृप्त हो जाते हैं। सुबह के समय राजीवलोचन की छवि को ध्यान से देखने पर पता चलता कि वह बाल्यावस्था में हैं, दोपहर को युवा और शाम को प्रौढ़ा अवस्था प्राप्त करते हैं। बताया जाता हैं कि श्रीराजीव लोचन की प्रतिमा पत्थर की भाॅति कठोर नहीं बल्कि आम इंसान की तरह कोमल होने की अनुभूति होती है।
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