*छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती के लिए मार्च 2019 में आवेदन मंगाया गया था,जिसकी प्रतियोगी परीक्षाएं जून से अगस्त माह तक पूर्ण किया गया।*
*छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती के लिए मार्च 2019 में आवेदन मंगाया गया था,जिसकी प्रतियोगी परीक्षाएं जून से अगस्त माह तक पूर्ण किया गया।*
जितेंद्र महमल्ला/ धमतरी
जिसके नतीजे के लिए डी.एड., बी.एड. संघ द्वारा संचालनालय एवं व्यापम का घेराव किया गया तब जाकर कहीं संपूर्ण नतीजे नवंबर तक घोषित किया गया,उसके बाद वेरिफिकेशन की प्रक्रिया जनवरी 2020 तक अधूरा किया गया,फिर कोरोना संकट का हवाला देकर 22 मार्च 2020 को लॉक डाउन लगाया गया जोकि मार्च से अगस्त तक रहा,सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य का हवाला देकर स्कूल बंद रखा,जब कुछ समय के लिए कोरोना नियंत्रित हुआ तो भर्ती प्रक्रिया पुनः शुरू करने के लिए बीएड डीएड संघ द्वारा संचालनालय एवं मुख्यमंत्री का घेराव, हड़ताल किया गया, परिणामतः नवंबर माह में फिर अधिकारियों ने पुराने दस्तावेज सत्यापन को रद्द कर दिया साथ ही परीक्षा परिणाम की वैधता एक साल के लिए बढ़ाकर सरकार द्वारा अतिरिक्त समय ले लिया गया और 31 जनवरी 2021 तक संपूर्ण भर्ती करने एवं ज्वाइनिंग देने की बात कही गई और पुनः दस्तावेज सत्यापन कराया गया जिसमे खाना पूर्ति के लिए केवल व्याख्याता विज्ञान संवर्ग के 2671 पदों पर 31 मार्च 2021 तक नियुक्ति दी गई और शेष 11909 पदों पर मात्र औपचारिक पात्रता प्रमाण पत्र जोकि "स्कूल खुलने पर ही ज्वाइनिंग दिया जाएगा की शर्त पर" प्रदान किया गया इसी बीच कोरोना की दूसरी लहर ने आतंक मचाया, जिससे सरकार को एक बार फिर बहाना मिल गया.लेकिन इस बीच सरकार को पिछले साल भर से बेरोजगारी जैसी समस्या पर कोई ध्यान नहीं है,ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों के सामने जीविकोपार्जन की बहुत बड़ी संकट आ पड़ी है, लॉकडाउन में रोजगार ठप्प है,ऐसे में चयनित अभ्यर्थी कैसे अपनी जीविका चलायें। सरकार की तरफ से कोई भी राहत नहीं दिया गया,न ही बेरोजगारी भत्ता का कोई प्रावधान किया गया है।बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा सरकार से अनुरोध है कि बाकी के स्कूल शिक्षक जो काम अभी कर रहे हैं वो काम चयनित अभ्यर्थियों से भी कराया जा सकता है,अन्य ऑनलाइन ट्रेनिंग, कोरोना ड्यूटी भी कराया जा सकता है। अभ्यर्थियों का बहुत बुरा हाल है,अधिकांश मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं तथा उनकी उम्र 30से 35 वर्ष है, जिन पर शादी का दबाव भी है, ऐसे में मायूस होकर गलत कदम न उठालें।
छत्तीसगढ़ सरकार ध्यान दे।
