आज का सुविचार(चिंतन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिंतन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..13-06-2021*..🎋


✍🏻शरीर सुंदर हो या ना हो पर शब्दों को जरूर सुंदर रखिये, क्योंकि लोग चेहरे भूल जाते हैं पर शब्दों को नहीं भूलते।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻नफरतों में क्या रखा हैं मोहब्बत से जीना सीखो, क्योकि ये दुनियाँ न तो हमारा घर हैं और न ही आप का ठिकाना, याद रहे दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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      ओम शांति
*जो कह दिया*
*वो लफ्ज़ हैं....*

*जो कह न सके*
*वो अहसास.....*

*जो लिख दिया*
*वो किताब है.....*
*जो लिख न सके*

*वो राज़........*     

              *जिन्दगी समझ आ गयी तो अकेले में मेला और ना समझ आयी तो मेले में भी अकेला ।*             
      ओम शांति
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          ओम शांति
 *कभी कुछ ऐसा घटित हो जाए,जो तुम्हारे मन पर गहरा आघात कर जाए,तुम सह न सको तब तुम यही समझना कि तुम्हारे कोई पूर्व कर्म हैं जो तुम्हें भुगतान करके आजादी मिलनी है,मालिक की मर्जी समझकर स्वीकार कर लेना,क्योंकि केवल एक वही तुम्हें कर्मबन्धन से मुक्ति दिलाएगा,कोई अन्य नहीं*
        ॐ शांति
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अनमोल वचन :

मनोविज्ञान के अनुसार जो डांटता है...वही बीमार होता है,डांट खाने वाला मनुष्य बीमार नहीं होता क्योंकि नुक्सान या मुनाफा फैक्ट्री के मालिक को होता है,कर्मचारी को नहीं...

🙏ओम् शांति🙏

💐आपका दिन शुभ हो 💐

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*13 जून:-*_ परोपकारी अर्थात अपना समय शक्ति और संकल्प द्वारा सर्व को मदद करने वाले न के किसी से कुछ लेकर मदद करनेवाले।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

अगर आप किसी को नमस्कार यह सोचकर कर रहे हो कि वो भी आपको करेगा तो वो *नमस्कार* व्यर्थ है... क्योंकि नमस्कार *संस्कार* के कारण किया जाता है, *अहंकार* के कारण नहीं...

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

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अनमोल वचन :

परमपिता परमात्मा ऊर्जा के परम स्त्रोत हैं,यह ऊर्जा हमें शक्तिशाली व प्रकाशवान बनाती है,आत्मा को ऊर्जावान बनाने के लिए परमपिता परमात्मा से कनेक्शन जोड़ कर अपने अंदर गुणों व शक्तियों की ऊर्जा हम सदैव खुद में भरते रहें.......  

🙏ओम् शान्ति 🙏

🌸आपका दिन शुभ हो 🌸 

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 *लंका के रावण से ज्यादा खतरनाक है शंका का रावण*
*जो समझ और विवेक का हरण कर लेता है*
          ॐ शांति
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

किन लोगों की *रोग* से लड़ने की *क्षमता* अधिक होती है... उनकी जो अपने शरीर को सात्विक *भोजन* और मन को सात्विक *विचारों* से भरपूर रखते हैं, क्योंकि रोग नकारात्मक ऊर्जा है और *सात्विकता* सकारात्मक ऊर्जा है। नकारात्मकता को काटने के लिये सकारात्मक *विचार* ही तो चाहिये न...!

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
🙏 *ॐ शांति* 🙏

*भगवान* से योग नहीं लगता... भगवान *बुद्धि* से नहीं दिखता? इसका अर्थ है नकारात्मक और व्यर्थ संकल्पों का *बोझ* बहुत है क्योंकि इससे हमारी *प्रत्यक्षता* की शक्ति कम हो जाती है और भगवान को बुद्धि से देखना व उसकी शक्तियों को अनुभव करना *असंभव* हो जाता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


‼️ रिक्से वाला ‼️ 🏵️

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 एक बार एक अमीर आदमी कहीं जा रहा होता है तो उसकी कार ख़राब हो जाती है। उसका कहीं पहुँचना बहुत जरुरी होता है। उसको दूर एक पेड़ के नीचे एक रिक्शा दिखाई देता है। वो उस रिक्शा वाले पास जाता है। वहा जाकर देखता है कि रिक्शा वाले ने अपने पैर हैंडल के ऊपर रखे होते है। पीठ उसकी अपनी सीट पर होती है और सिर जहा सवारी बैठती है उस सीट पर होती है ।


 और वो मज़े से लेट कर गाना गुन-गुना रहा होता है। वो अमीर व्यक्ति रिक्शा वाले को ऐसे बैठे हुए देख कर बहुत हैरान होता है कि एक व्यक्ति ऐसे बेआराम जगह में कैसे रह सकता है, कैसे खुश रह सकता है। कैसे गुन-गुना सकता है। 


 वो उसको चलने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला झट से उठता है और उसे 20 रूपए देने के लिए बोलता है।


  रास्ते में वो रिक्शा वाला वही गाना गुन-गुनाते हुए मज़े से रिक्शा खींचता है। वो अमीर व्यक्ति एक बार फिर हैरान कि एक व्यक्ति 20 रूपए लेकर इतना खुश कैसे हो सकता है। इतने मज़े से कैसे गुन-गुना सकता है। वो थोडा इर्ष्यापूर्ण  हो जाता है और रिक्शा वाले को समझने के लिए उसको अपने बंगले में रात को खाने के लिए बुला लेता है। रिक्शा वाला उसके बुलावे को स्वीकार कर देता है।


 वो अपने हर नौकर को बोल देता है कि इस रिक्शा वाले को सबसे अच्छे खाने की सुविधा दी जाए। अलग अलग तरह के खाने की सेवा हो जाती है। सूप्स, आइस क्रीम, गुलाब जामुन सब्जियां यानि हर चीज वहाँ मौजूद थी।


  वो रिक्शा वाला खाना शुरू कर देता है, कोई प्रतिक्रिया, कोई घबराहट बयान नहीं करता। बस वही गाना गुन-गुनाते हुए मजे से वो खाना खाता है। सभी लोगो को ऐसे लगता है जैसे रिक्शा वाला ऐसा खाना पहली बार नहीं खा रहा है। पहले भी कई बार खा चुका है। वो अमीर आदमी एक बार फिर हैरान एक बार फिर इर्ष्यापूर्ण कि कोई आम आदमी इतने ज्यादा तरह के व्यंजन देख के भी कोई हैरानी वाली प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता और वैसे कैसे गुन-गुना रहा है जैसे रिक्शे में गुन-गुना रहा था।


 यह सब कुछ देखकर अमीर आदमी की इर्ष्या और बढती है। 

अब वह रिक्शे वाले को अपने बंगले में कुछ दिन रुकने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला हाँ कर देता है। 


  उसको बहुत ज्यादा इज्जत दी जाती है। कोई उसको जूते पहना रहा होता है, तो कोई कोट। एक बेल बजाने से तीन-तीन नौकर सामने आ जाते है। एक बड़ी साइज़ की टेलीविज़न स्क्रीन पर उसको प्रोग्राम दिखाए जाते है। और एयर-कंडीशन कमरे में सोने के लिए बोला जाता है।


 अमीर आदमी नोट करता है कि वो रिक्शा वाला इतना कुछ देख कर भी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। वो वैसे ही साधारण चल रहा है। जैसे वो रिक्शा में था वैसे ही है। वैसे ही गाना गुन-गुना रहा है जैसे वो रिक्शा में गुन-गुना रहा था।


  अमीर आदमी के इर्ष्या बढ़ती चली जाती है और वह सोचता है कि अब तो हद ही हो गई। इसको तो कोई हैरानी नहीं हो रही, इसको कोई फरक ही नहीं पढ़ रहा। ये वैसे ही खुश है, कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दे रहा।


 अब अमीर आदमी पूछता है: आप खुश हैं ना? 

वो रिक्शा वाला कहते है: जी साहेब बिलकुल खुश हूँ।


  अमीर आदमी फिर पूछता है: आप आराम में  हैं ना ? 

रिक्शा वाला कहता है: जी बिलकुल आरामदायक हूँ।


 अब अमीर आदमी तय करता है कि इसको उसी रिक्शा पर वापस छोड़ दिया जाये। वहाँ जाकर ही इसको इन बेहतरीन चीजो का एहसास होगा। क्योंकि वहाँ जाकर ये इन सब बेहतरीन चीजो को याद करेगा।


  अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी को बोलता है की इसको कह दो कि आपने दिखावे के लिए कह दिया कि आप खुश हो, आप आरामदायक हो। लेकिन साहब समझ गये है कि आप खुश नहीं हो आराम में नहीं हो। इसलिए आपको उसी रिक्शा के पास छोड़ दिया जाएगा।”


 सेक्रेटरी के ऐसा कहने पर रिक्शा वाला कहता है: ठीक है सर, जैसे आप चाहे, जब आप चाहे।


  उसे वापस उसी जगह पर छोड़ दिया जाता है जहाँ पर उसका रिक्शा था। 


 अब वो अमीर आदमी अपने गाड़ी के काले शीशे ऊँचे करके उसे देखता है।


  रिक्शे वाले ने अपनी सीट उठाई बैग में से काला सा, गन्दा सा, मेला सा कपड़ा निकाला, रिक्शा को साफ़ किया, मज़े में बैठ गया और वही गाना गुन-गुनाने लगा।


 अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी से पूछता है: “कि चक्कर क्या है। इसको कोई फरक ही नहीं पड रहा इतनी आरामदायक वाली, इतनी बेहतरीन जिंदगी को ठुकरा के वापस इस कठिन जिंदगी में आना और फिर वैसे ही खुश होना, वैसे ही गुन-गुनाना।”


  फिर वो सेक्रेटरी उस अमीर आदमी को कहता है: “सर यह एक कामियाब इन्सान की पहचान है। एक कामियाब इन्सान वर्तमान में जीता है, उसको मनोरंजन (enjoy) करता है और बढ़िया जिंदगी की उम्मीद में अपना वर्तमान खराब नहीं करता। 


 अगर उससे भी बढ़िया जिंदगी मिल गई तो उसे भी वेलकम करता है उसको भी मनोरंजन (enjoy) करता है उसे भी भोगता है और उस वर्तमान को भी ख़राब नहीं करता। और अगर जिंदगी में दुबारा कोई बुरा दिन देखना पड़े तो वो भी उस वर्तमान को उतने ही ख़ुशी से, उतने ही आनंद से, उतने ही मज़े से, भोगता है मनोरंजन करता है और उसी में आनंद लेता है।”


कामयाबी आपके ख़ुशी में छुपी है, और अच्छे दिनों की उम्मीद में अपने वर्तमान को ख़राब नहीं करें। और न ही कम अच्छे दिनों में ज्यादा अच्छे दिनों को याद करके अपने वर्तमान को ख़राब करना है।

  


🙏🌹🙏💐🙇💐🙏🌹🙏

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