*वट सावित्री व्रत रख कर सुहागिनियो ने आपने पति के लम्बी उम्र की कामना कियाl*
*वट सावित्री व्रत रख कर सुहागिनियो ने आपने पति के लम्बी उम्र की कामना कियाl*
जितेंद्र महमल्ला/धमतरी
कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था।
पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखे जाने वाला वट सावित्री व्रत इस वर्ष 10 जून दिन गुरुवार को है। हर साल ये व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन आता है। कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था। इस व्रत वाले दिन वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री-सत्यवान की कथा को पढ़ा जाता है।
वट सावित्री व्रत में बांस का पंखा, धूप-दीप, घी-बाती, लाल और पीले रंग का कलावा या सूत, पुष्प, फल, सुहाग का सामान, कुमकुम या रोली, लाल रंग का वस्त्र पूजा में बिछाने के लिए, पूरियां, पूजा के लिए सिन्दूर, गुलगुले, चना, बरगद का फल, कलश जल भरा हुआ। वट वृक्ष की पूजा के बाद वट सावित्री व्रत की इस कथा को याद किया जाता है।
इस दिन शादीशुदा महिलाएं सुबह जल्दी से उठकर स्नान कर के स्वच्छ हो जाता है । इसके बाद लाल या पीली रंग की साड़ी पहनकर तैयार होने के बाद पूजा का सारा सामान एक थाली में लेंकर । वट (बरगद) के पेड़ के पास जाते है वट वृक्ष के नीचे स्थान को अच्छे से साफ कर वहां सावित्री-सत्यवान की मूर्ति स्थापित करने के बाद बरगद के पेड़ पर जल चढ़ारहे। इसके बाद पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाएं जाते है। फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन या सात बार परिक्रमा करते है। इसके बाद हाथ में काला चना लेकर इस व्रत की कथा सुनें। कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने का बायना निकाले और उसपर कुछ रूपए रखकर अपनी सास को दें। जिन स्त्रियों की सास उनके साथ नहीं रहती हैं वे बायना उन्हें भेज दें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। पूजा समापन के पश्चात ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि दान किया जता है । इसी दिन शनिदेव की जन्म हुआ था। तो शनि अमावस्या भी कहा जाता है शनिभक्त आज के दिन को शनि जयंती महोत्सव मनाते है। शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से पीड़ित जातकों के लिए आज खास दिन, इन उपायों से करें शनि देव को प्रसन्न।
इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा होती है। हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर वापस ले आई थीं। इसलिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



