योग भगाए रोग चलो करें योग --अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्कूलों में हुआ योगा - fastnewsharpal.com
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योग भगाए रोग चलो करें योग --अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्कूलों में हुआ योगा

 योग भगाए रोग चलो करें योग --अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्कूलों में हुआ योगा



    सुरेन्द्र जैन/ धरसीवा

"योग भगाए रोग" यह कोई किस्सा कहानी नहीं बल्कि धरातल का वास्तविक सत्य है और प्राचीनकाल से ही ऋषि मुनियों तपस्वियों का यही शुभ सन्देश उनकी जीवन चर्या से भी जनमानस को मिलता रहा है यह बात अलग है कि जब दुनिया को रोगों ने अपने जाल में फँसाया तब कहीं जाकर योग के ऋषि मुनियों तपस्वियों के इस शुभ सन्देश ओर उनकी चर्या को भारत ही नहीं अपितु पूरे संसार मे मानने की प्रक्रिया धरातल पर शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर धरसीवा क्षेत्र में भी स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ साथ पालकों ओर ग्रामीणो ने योगाभ्यास कर इसे सार्थक किया।

  क्षेत्र के सांकरा सिलतरा धरसीवा सहित सभी स्कूलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बच्चों पालकों ग्ग्रामीणों के साथ शिक्षकों ने भी  योगासन योग कर निरोगी  रहने का संदेश दिया

 शासकीय विद्यालयों में आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी शासकीय विद्यालयों में योग शिविर का आयोजन किया भारतीय संस्कृति की अमूल्य और विलक्षण धरोहर एवं मानव के उत्तम स्वास्थ्य का आधार योग है  सभी को अपनी दिनचर्या में अनिवार्य रूप से योग को शामिल करना समय की जरूरत भी है नियमित योग करने से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मन की एकाग्रता भी बढ़ती है।



योग मनुष्य की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा योग विचार और कार्य, अंकुश और सिद्धि, मानव और प्रकृति के बीच सौहार्द, स्वास्थ्य और अच्छे के लिये एक पूर्णतावादी दृष्टिकोण है योग वो है जो तन को मन से मिलाये स्वस्थ्य जीवन जिये यही प्रकृति का उपहार है योग स्वास्थ्य और रोग मुक्त रहने का एक बेहतरीन साधन है,योग  भारतीय ऋषि मुनि तपस्वीयो का उपहार है योग को न केवल भारत में, बल्कि दुनिया में प्रतिष्ठित किया है  आठवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दुनिया के 200 से अधिक देश भारतीय ऋषि मुनि तपस्वियों की परंपरा व विरासत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे है योग मनुष्य की शारीरिक मानसिक व आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है।

   *प्राथमिक स्तर से हो शुरुआत*


   प्राचीन काल मे घर परिवार के बुजुर्ग अपने बच्चों को बचपन से ही योगाभ्यास कराते थे युवा लंगोटी धारण कर  सुबह शाम योगा करते थे ओर एक से बढ़कर एक पहलवान भी तैयार होते थे  गांव कस्बों में हर वर्ग के अखाड़ा भी हुआ करते थे समय समय पर उनके बीच मुकाबला प्रदर्शन भी होते थे दुनिया की भागमभाग में धीरे धीरे यह तमाम प्राचीन परंपराए लगभग खत्म सी होने लगीं और रोगों ने लोगो को जकड़ना शुरू कर दिया लेकिन अब लोगो मे जागरूकता आने लगी है जरूरत है अब सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर से ही योगाभ्यास अनिवार्य करने की।

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