इस क्षेत्र में आज भी .लालटेन युग में जीवन यापन रहे है ग्रामीण....
इस क्षेत्र में आज भी .लालटेन युग में जीवन यापन रहे है ग्रामीण....
*जयलाल प्रजापति/नगरी*
.हिन्दुस्तान आज दुनिया के विकसित देशों के कतार में खड़े होने की जददोजहद में लगा है तो वही उसी देश के कई गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.वह देश जिसकी आत्मा गांवों में बसती है उसी देश की नींव कितनी कमजोर है इसका अंदाजा छत्तीसगढ़ के इस गांव से लगाया जा सकता है.हालांकि केन्द्र सरकार के कोने कोने में बिजली पहुंचाने को अपना मिशन बताकर जनता के बीच खूब वाहवाही बटोरी लेकिन इन वाहवाही के बीच धमतरी जिले का बरपदर गांव आज भी लालटेन युग में जीने को मजबूर है.
धमतरी जिले के अंतिम छोर में बसे बरपदर गांव सालों से अंधेरे में जी रहा है.यहां के लोग नेताओं के वायदे सुनते थक गए है न उनके विकास का रथ दौड़ पाया और न ही अच्छे दिन की तलाश पुरी हुई.जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर बेलरबाहरा का इस आश्रित ग्राम बरपदर में तकरीबन 21 परिवार निवास करते है.गांव में आवाजाही का साधन नही है लिहाजा यहां लोग जंगलो के रास्ते से नदी नाला पार कर आना जाना करते है.यहां समस्या नहीं बल्कि समस्याओं का अंबार है.
गांव में न बिजली है न पानी है और न ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ यहां वाशिदों को मिलता है.पुल पुलिया और सड़क का इंतजार यहां के लोग बरसो से कर रहे है पर कोई सुध नही लेने वाला है.गांव पेयजल संकट से भी जूझ रहा है.शिक्षा के मंदिर में पिछले 2 सालों से ताला लगा हुआ है.ऐसे में यहां के बच्चे को पढ़ने के लिए नदी पार कर बेलरबाहरा गांव जाते है.यहां आंगनबाड़ी केंद्र भी नही है जहां छोटे छोटे पढ़ सके और गर्भवती माताओं को पोषण आहार मिल सके.ग्रामीण बारिश दिनों में यहां के लोगों की जिंदगी माने कट सी जाती है.अगर कोई बीमार हो जाए तो बड़ी मुश्किल हालात बन जाते है.
यहां देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन का बुराहाल है स्वच्छता के नाम पर घर घर शौचालय तो बनाया गया.पर इसमें जमकर भ्रष्टाचार भी किया गया.नतीजन शौचालय उपयोग लायक नही रहा और टूट फूट की स्थिति में है ऐसे में ग्रामीण और महिलाएं आज भी खुले में षौच जाने मजबूर है.
गांव के ..लोग.....बताते है कि पिछले कुछ साल पहले गांव में सौर उर्जा के तहत बिजली पहुंचाया गया था लेकिन चंद महीनों बाद वह भी दम तोड़ दिया.जिसके के कारण वे पहले की तरह अब भी अंधेरे में जिंदगी काट कर रहे है.विकास के नाम पर उनके गांव में कुछ भी नही है.सरकारी योजनाएं कब आती है और कब चली जाती है पता ही नही चलता.इधर हर बार की तरह प्रषासन सिर्फ आष्वासन दे रही है कि गांव में हर मुमकिन सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी.बहरहाल सरकार और प्रषासन के बेरूखी के चलते यहां के लोग आज भी पुराने तरीकों से जीवन जी रहे है।
