प्रभु के संग का रंग एवं परमात्मा के गुणों में खुद के मन को रंगने का प्रतीक है होली ----- अंशु दीदी
प्रभु के संग का रंग एवं परमात्मा के गुणों में खुद के मन को रंगने का प्रतीक है होली ----- अंशु दीदी
खड़मा के शिव स्मृति भवन में आध्यात्मिक वातावरण में मनाई होली
होलिका दहन के साथ बच्चो के रास नृत्य ने ब्रह्मावत्सो का मन मोहा
छुरा न्यूज :-
खड़मा में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र की ओर से आयोजित होली कार्यक्रम का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने कहा कि होली रंगों का त्यौहार है। होली प्रभु के संग के रंग व परमात्मा के गुणों में खुद के मन को रंगने का प्रतीक है। स्थूल रंग अल्पकाल का होता है, परंतु परमात्मा रंग में आत्मा सदैव रंगी रहती है। यह रूहानी रंग होता है जो आत्मा को रंगता है। उन्होंने कहा कि होली दो प्रकार की होती है, एक जलाने की होली, दूसरी मनाने की होली। जब योग की अग्नि में विकारों रूपी उपले व कंटीली लकड़ियां जलाई जाती हैं तो आत्मा पर लगे विकारों के दाग जल जाते हैं।
आत्मा सच्चे सोने की तरह चमक जाती है , तो आत्मा खुशियों से भरपूर हो जाती है। फिर मनाई जाती है होली प्रभु संग के रंग में रंग जाने की। होली का अंग्रेजी में अर्थ होता है पवित्र, दूसरा होली यानि मैं आत्मा परमात्मा की हो ली। यानि मेरा सर्वस्व परमात्मा का और परमात्मा का सर्वस्व मेरा हो गया। तीसरा होली मैं जो हो गया सो हो गया पास्ट इज पास्ट। यानि बीती ताही विसार के आगे की सुध ले।
उन्होंने होलिका कथा का अर्थ स्पष्ट किया कि होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाया और आग में बैठ गई परंतु होलिका जल गई। प्रहलाद बच गया। मतलब जिसका नाता परमात्मा के साथ है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जिसका साथी है भगवान उसको क्या रोकेगा। उन्होंने कहा कि जब आत्माओं से पुराने स्वभाव, संस्कार व नेगेटिव वृत्तियों का रंग उतरता है तभी प्रभु रंग हम पर चढ़ता है। इस पिचकारी द्वारा हम आत्माओं पर ज्ञान, प्रेम, सुख, शांति, आनंद, पवित्रता व शक्ति रूपी रंग डालकर हम आत्माओं को इन अविनाशी रंगों से रंग देते हैं।मौके पर पीपरछेड़ी गीता पाठशाला से आए बच्चो की होली रास नृत्य ने वातावरण उत्साह में भर दिया। जहां होलिका दहन के साथ बच्चो की रास लीला नृत्य होली की उमंग भरी माहौल को सजा दिया। कुमारी रीतिका, साक्षी यादव,गुंजन, काजल एवं रामेश्वरी की साथियों ने सब को आनंदित किया।इस अवसर पर पूर्व मंडल अध्यक्ष अगहन सिंह ठाकुर, यादराम साहू, उपेंद्र चंद्राकर, तेजस्वी भाई ,सज्जन यादव, रोहित यादव, गोविंद लाल यादव, अलख राम निषाद, तिहार सिंह ठाकुर, पवन भाई, गैंदी निषाद, शांति माता, रधिया माता, श्रीमती केशर सिन्हा, निर्मला बहन, ब्रह्मकुमारी चंद्रिका बहन, सहित गायडबरी,केडिआमा,कनेसर, मदेली, छुरा, पिपरछेडी, खडमा ब्रह्मकुमारी सेवा केंद्र एवं गीता पाठ शाला से सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सभी को आत्म स्मृति का तिलक लगाया गया।



