*आध्यात्मिकता की मिशाल-- दादी गुलज़ार (हृदय मोहिनी)*
*आध्यात्मिकता की मिशाल-- दादी गुलज़ार (हृदय मोहिनी)*
राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जिनको गुलज़ार के नाम से भी जाना जाता है, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासनिक प्रमुख थीं (अप्रैल 2020 से १० मार्च 2021 तक)। दादी गुलज़ार, यज्ञ के अति आरंभ (1936) मे, 8 वर्ष की आयु में "ओम निवास" नामक बोर्डिंग स्कूल द्वारा इस यज्ञ में शामिल हुईं, जिसकी स्थापना दादा लेखराज (जिनका तब नाम बदल कर ब्रह्मा बाबा रखा गया) ने बच्चों के लिए की थी। दादी गुलज़ार की शारीरिक आयु 92 थी जब उन्होंने शरीर छोड़ा व अव्यक्त हुई।
दिए। वह विचारों मे स्पष्ट, अनुभवों की धनी व बोल मे सादगी का गुण रखती थी, जिस कारण अनेकों ने उनके द्वारा परमात्मा का संदेश पाया।
अव्यक्त बापदादा का रथ
जैसा कि आप जानते है, ब्रह्मा बाबा १८ जनवरी, १९६९ को अव्यक्त हुए, तब से दादी गुलज़ार अव्यक्त बापदादा का आकर हम बच्चों से मिलने और मुरली सुनाने का माध्यम बनीं। १९६९ से २०१४-१५ तक दादी ने लगातार सेवाकेन्द्रों का भ्रमण किया व संगमयुग की पावन वेला मे स्व -परिवर्तन पर व्याख्यान (लेक्चर) दिए। दादी वी.आई.पी के सम्मेलन में बाबा का संदेश अति सरल मगर दिल को छू जाने वाले शब्दों में देतीं थीं। उनका सरल ,भोला व सबसे स्नेह रखने वाला स्वभाव ही मुख्य आकर्षण था। २००७ से दादी ने मुख्यतः मधुबन या दिल्ली सेवाकेंद्र पर रह सेवा का पार्ट बजाया। बापदादा ने निरंतर दादी को अपना माध्यम बनाया। यह पार्ट भी अब समाप्त हुआ (१९६९ -२०१६)। हम दादी को धन्यवाद व मुबारक देते हैं जो इतने समय तक बापदादा का माध्यम बनी।
दादी बनी अव्यक्त
गुरुवार, ११ मार्च २०२१ को दादी हृदय मोहिनी (गुलज़ार) के शरीर छोड़ने के बाद वर्तमान में दादी रतन मोहिनी जी को ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्या नियुक्त किया गया है। ११ मार्च २०२१ को पवित्र महाशिवरात्रि का दिवस था। दादी के अव्यक्त होने का दिन यादगार रहेगा।
"दादी की विशेषता उनकी सरलता व स्पष्ट बुद्धि हैं ,जो सदैव बापदादा को अपने हृदय में रखती हैं, और जहाँ जाती है, वहाँ रूहानी सुगंध फैलाती है।"
~ *अव्यक्त बापदादा*
