आंचलिक खबरें
कोरोना
खेती किसानी
छत्तीसगढ़
गरियाबंद क्षेत्र में 20 हाथियों का झुण्ड अचानक चिन्गरापगार पठार की ओर उतरकर घने जंगल में बसे गांव गाहंदर पहुंच गया। वहा हाथी का झुंड देखकर ग्रामीण घबराए, फिर वन विभाग से संपर्क किया गया। वन मण्डाधिकारी श्री मयंक अग्रवाल के निर्देशानुसार गांव में गठित हाथी मित्र दल के सदस्यों को हाथी आने एवं उसके पश्चात किये जाने वाले गतिविधियों के सम्बंध में पूर्व में जानकारी दे दी गई थी । पांच मशाल एवं मिट्टी तेल ग्रामीणो को उपलब्ध करा दिया गया था। इसी बीच एक हाथी रामू राम के घर के बाड़ी में पहुंच कर केले के पेड़ को खाया और पूरा दल बस्ती के बाहर से गुजरते हुए गाहन्दर तालाब मार्ग से होकर ग्राम टोईयांमुड़ा की ओर चले गये। इस बीच ग्रामीणों ने प्रक्षिशण में बताये अनुसार गांव के युवा सदस्यों द्वारा बस्ती में मशाल जला कर रखा गया ताकि हाथी बस्ती में प्रवेश न कर सके। सूचना मिलने के पश्चात वन विभाग के कर्मचारी अतिरिक्त मशाल लेकर ग्राम गाहन्दर पहुंचे तब तक हाथी वहां से जा चुका था। हाथी द्वारा सिर्फ केले के पेड़ को हानि पहुंचाया गया और इसके अलावा किसी भी प्रकार की जान माल की कोई हानि नहीं हुई। इसके पश्चात ग्राम टोईयांमुड़ा के 18 किसानों के फसल को रौदते हुये गजपला झरने की ओर चले गये। वन विभाग द्वारा समस्त क्षति का आकलन कर लिया गया है एवं आपपास के समस्त गांव में मुनादी कर सूचित कर दिया गया है। वन विभान लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
*हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की कड़ी नजर*
बुधवार, 29 जुलाई 2020
Edit
ग्राम टोईयांमुड़ा में हुए फसल क्षति का आंकलन कर लिया गया है
गरियाबंद
गरियाबंद क्षेत्र में 20 हाथियों का झुण्ड अचानक चिन्गरापगार पठार की ओर उतरकर घने जंगल में बसे गांव गाहंदर पहुंच गया। वहा हाथी का झुंड देखकर ग्रामीण घबराए, फिर वन विभाग से संपर्क किया गया। वन मण्डाधिकारी श्री मयंक अग्रवाल के निर्देशानुसार गांव में गठित हाथी मित्र दल के सदस्यों को हाथी आने एवं उसके पश्चात किये जाने वाले गतिविधियों के सम्बंध में पूर्व में जानकारी दे दी गई थी । पांच मशाल एवं मिट्टी तेल ग्रामीणो को उपलब्ध करा दिया गया था। इसी बीच एक हाथी रामू राम के घर के बाड़ी में पहुंच कर केले के पेड़ को खाया और पूरा दल बस्ती के बाहर से गुजरते हुए गाहन्दर तालाब मार्ग से होकर ग्राम टोईयांमुड़ा की ओर चले गये। इस बीच ग्रामीणों ने प्रक्षिशण में बताये अनुसार गांव के युवा सदस्यों द्वारा बस्ती में मशाल जला कर रखा गया ताकि हाथी बस्ती में प्रवेश न कर सके। सूचना मिलने के पश्चात वन विभाग के कर्मचारी अतिरिक्त मशाल लेकर ग्राम गाहन्दर पहुंचे तब तक हाथी वहां से जा चुका था। हाथी द्वारा सिर्फ केले के पेड़ को हानि पहुंचाया गया और इसके अलावा किसी भी प्रकार की जान माल की कोई हानि नहीं हुई। इसके पश्चात ग्राम टोईयांमुड़ा के 18 किसानों के फसल को रौदते हुये गजपला झरने की ओर चले गये। वन विभाग द्वारा समस्त क्षति का आकलन कर लिया गया है एवं आपपास के समस्त गांव में मुनादी कर सूचित कर दिया गया है। वन विभान लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
Previous article
Next article
