* 🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃राखी पर विशेष- रक्षाबंधन और पवित्रता का महत्व 🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃* - fastnewsharpal.com
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* 🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃राखी पर विशेष- रक्षाबंधन और पवित्रता का महत्व 🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃*


                                                  
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💠 * रक्षाबंधन और पवित्रता का महत्व*💠
🎋 *..03-08-2020*..🎋

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वैसे तो भारतवासी हर त्यौहार पर पवित्र रहने का प्रयास करते हैं, किंतु रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है, जो हमें अपने असली स्वरूप अर्थात् पवित्र स्वरूप की याद दिलाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अपने हारते हुए पति देवेन्द्र को विजय दिलाने के लिए इंद्राणी ने उनकी कलाई पर राखी बांधी थी। रानी कर्मावती द्वारा बहादुरशाह से रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजे जाने तथा हुमायूं द्वारा उस राखी की लाज रखने हेतु रानी कर्मावती की रक्षा किये जाने की कथा सर्वविदित है। पुरातन काल में ब्राह्मण लोग अन्य लोगों को राखी बांधते थे। किंतु आज रक्षाबंधन का त्यौहार केवल भाई और बहन के रिश्ते तक सीमित रह गया है। आज के कलियुग में राखी का त्यौहार रिश्तों को पैसे से तोलने का अवसर बन कर रह गया है। और राखी के साथ जुडे पवित्रता के महत्व को भूलने के कारण हमें इस पवित्र बंधन में बंधे इंसानों के बीच भी अनैतिक दृष्टि, वृत्ति या संबंधों की शर्मनाक कहानी सुनने को मिल जाती है।
वास्तव में राखी सम्पूर्ण पवित्रता का प्रतीक है। भगवान कहते हैं कि पवित्रता ही सर्व गुणों की जननी है। सर्वशास्त्र शिरोमणि गीता में भी काम विकार को महाशत्रु की संज्ञा दी गई है, अर्थात् अपवित्रता ही सभी विकारों रूपी दुश्मनों की जड है। यदि हम पवित्र रहें तो काम-क्रोधादि विकारों पर सहज ही विजय पा सकते हैं। और पवित्र बनने का आसान तरीका है आत्मिक स्मृति का टीका, जो हर बहन राखी बांधने से पहले अपने भाई को लगाती है। यदि हम स्वयं को नश्वर देह न मानकर अविनाशी आत्मा समझें तो हमें मृत्यु का भी डर नहीं रहेगा। न तो विकारों रूपी दुश्मन हम पर वार कर सकेंगे और न ही कोई गलत इरादे वाला इंसान।
यदि हम पवित्रता की प्रतिज्ञा की राखी बांध लें और आत्मिक स्मृति का टीका लगा लें तो फिर हमें इस नश्वर शरीर की रक्षा तथा नश्वर संबंधों को मजबूत करने के लिए स्थूल राखी बांधने या बंधवाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। हालांकि भगवान शिव द्वारा ज्ञान मुरलियों में ब्रह्माकुमार-कुमारियों को स्थूल राखी के स्थान पर इस पवित्रता की राखी बंधवाने अर्थात् प्रतिज्ञा लेने की श्रीमत दी गई है।
रक्षाबंधन का त्यौहार ब्राह्मणों द्वारा जनेउ बदलने का शुभावसर भी होता है। दरअसल, जनेउ के तीन धागे ब्रह्मा, शंकर और विष्णु तथा उनके द्वारा किये जाने वाले स्थापना, विनाश और पालना के तीन दिव्य कर्तव्यों के प्रतीक हैं। सांसारिक ब्राह्मण तो कुखवंशावली होते हैं, किंतु परमपिता शिव परमात्मा इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर आकर ब्रह्मा के मुख से यह शिक्षा देते हैं कि जो मन, वचन और कर्म से पवित्र है, वही सच्चे ब्रह्मामुखवंशावली ब्राह्मण हैं। बाकी जो देहभान में रहकर पतित कर्म करते हैं, वे क्षुद्र हैं। अतः अब हमें अपने असली आत्मिक स्वरूप की बिंदी लगाकर और पवित्रता की दृढ प्रतिज्ञा रूपी राखी बंधवाकर सच्चा रक्षाबंधन मनाना है।
                      
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                                                                                                          ओम शांति  
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✍🏻अतीत चला गया उसके लिए अपना समय खराब मत करिये। भविष्य के सपने मत देखिये वो कभी नहीं आएगा, केवल वर्तमान आपके पास है- वर्तमान में जियो
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *ओमशान्ति🌷

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