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*कृषि क्षेत्र में निगमीकरण करना किसानों को हासिए पर धकेलना है--राजिम*
शुक्रवार, 7 अगस्त 2020
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कृषि क्षेत्र में निगमीकरण करना किसानों को हासिए पर धकेलना है
राजिम
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा, छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी के नेतृत्व में 06 अगस्त को "कृषि का कारपोरेटीकरण और आत्म निर्भर भारत" विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के कार्यकारिणी सदस्य डॉ सुनीलम( भोपाल) और विशिष्ट वक्ता कॉमरेड प्रदीप सिंह ठाकुर (पश्चिम बंगाल) महासचिव अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा थे। संचालन तेजराम विद्रोही राज्य सचिव अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा, छत्तीसगढ़ ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ सुनीलम ने कहा कि आज दिन ब दिन किसानों की संकट बढ़ रहा है। किसानों की संकट को दूर करने के बजाय केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को ही कारपोरेट घरानों के हाथों में सौंपने के लिए रास्ता अख्तियार कर लिया है। इससे किसान हासिए पर पहुंच जायेंगे। आने वाला 09 अगस्त एक ऐतिहासिक दिन है जब 1942 में देश के स्वतंत्रता प्रेमी योद्धाओं ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा देकर ललकारा था। लेकिन आज केन्द्र सरकार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और कारपोरेट घरानों के हित में किसान विरोधी अध्यादेश लाकर किसान और और कृषि को ही तबाह करने की दिशा में लेकर जा रही है। इसलिए 09 अगस्त को देशभर में कॉरपोरेट भगाओ, किसान और किसानी बचाओ अभियान के तहत अगस्त क्रांति दिवस को सफल बनायें।
विशिष्ट वक्ता कॉमरेड प्रदीप सिंह ठाकुर ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, कोरोना काल में यह और भी पुख्ता हो गया है। इसलिए केंद्र की मोदी सरकार किसान विरोधी अध्यादेश और बिल के माध्यम से बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने कदम बढ़ा रही है। साथ ही काला बाजारियों, मुनाफाखोरों, को खुली छूट देने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन कर अनाज को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है जो बहुत ही शर्मनाक है।
वेबिनार को शंकर साहू राज्य सचिव अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा उड़ीसा, पारसनाथ साहू संचालक मंडल सदस्य छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ, छत्तीसगढ़, सौरा यादव राज्य सचिव भाकपा (माले) रेड स्टार, छत्तीसगढ़ ने संबोधित किया। आभार मदन लाल साहू उपाध्यक्ष अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा, छत्तीसगढ़ ने व्यक्त किया।
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