फसल उत्पादन के लिए जमा पूंजी लगा चुके थे पीड़ित किसान दीपावली में कैसे करेंगे घर को रौशन
ग्राम पंचायत द्वारा जब्त किए गए धान फसल को क्षति पूर्ति सहित पीड़ित परिवारों को वापस किया जाए
फसल उत्पादन के लिए जमा पूंजी लगा चुके थे पीड़ित किसान दीपावली में कैसे करेंगे घर को रौशन
ग्राम के कोटवार व पंचायत प्रतिनिधि ही किये हुए हैं शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा दूसरों को कर रहे प्रताड़ित
राजिम
तहसील राजिम अंतर्गत ग्राम सुरसाबांधा में ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों द्वारा करीब 35 सालों से शासकीय घास भूमि पर काबिज 27 परिवारों के तैयार धान फसल को काटकर जब्ती बनाया जा रहा है जबकि गांव के ही सरपंच, उपसरपंच, कोटवार एवं फसल जब्त करने वाले अन्य व्यक्तियों द्वारा खुद ही शासकीय घास भूमि में कब्जा कर धान फसल बोया गया था जिसे स्वयं काटकर अपने अपने घर ले गए और इन 27 लोगों का फसल काटकर जब्त कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के इस भेदभाव और अन्याय पूर्ण रवैय्या के खिलाफ
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही ने अनुविभागीय अधिकारी राजिम व तहसीलदार राजिम को पत्र देकर जब्ती की कार्यवाही पर रोक लगाने और जब्त किए धान फसल को क्षति पूर्ति सहित पीड़ित परिवारों को वापस दिलवाने की माँग किया है।
तेजराम विद्रोही ने पत्र में कहा है कि हल्का पटवारी सुशील कुमार साहू द्वारा दिनांक 16/06/2018 को नायब तहसीलदार राजिम के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए ग्राम सुरसाबांधा के कुल 71 खसरा में शासकीय घास भूमि होने की जानकारी दिया है। इनमें से 10 खसरों पर 27 व्यक्तियों द्वारा करीब 35 सालों से कब्जा कर फसल बोकर अपने परिवार का भरण पोषण किया जा रहा है। इसी प्रकार बाकी के 61 खसरों में ग्राम के कोटवार, सरपंच, उपसरपंच सहित पंचायत के अन्य व्यक्तियों द्वारा भी कब्जा किया गया है। लेकिन केवल 27 परिवारों को बेदखल करने उनकी फसल को जब्त किया जा रहा है। 14 अक्टूबर 2020 को कब्जाधारी किसानों का तहसील राजिम में पेशी था जहाँ उन्होंने अपना जबाव पेश किया था। परन्तु दूसरे दिन ही माननीय तहसीलदार राजिम के बिना कोई आदेश के सरपंच ग्राम पंचायत सुरसाबांधा द्वारा फसल काटकर जब्ती की कार्यवाही शुरू की गई जो पीड़ित गरीब किसानों के साथ अन्याय है। पीड़ित किसानों ने माननीय उच्च न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश दिनांक 20/08/2020 की छाया प्रति ग्राम पंचायत को दिया था जिसे फर्जी कहकर पंचायत द्वारा मानने से इनकार कर दिया जो ग्राम पंचायत की तानाशाही रवैये को प्रदर्शित करती है।
वर्तमान कोरोना के दौर में सरकार द्वारा लोगों को अनाज की कमी न हो इसके लिए यथासंभव व्यवस्था किया जा रहा है लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा अनाज को जब्त किया जा रहा है। यह उन लोगों द्वारा किया जा रहा है जो स्वयं भी अवैध कब्जा कर फसल ले रहे हैं। सामने सबसे बड़ी त्यौहार दीपावली है पीड़ित किसानों ने अपनी जमा पूंजी फसल तैयार करने में लगा चुके थे जिसे पंचायत द्वारा जब्त कर लिया गया है जिससे किसान पीड़ित परिवार बहुत ही आर्थिक और मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे परिस्थितियों में जब्त किए गए फसल को क्षति पूर्ति सहित पीड़ित किसानों को वापस किया जाए।
पत्र के साथ ग्रामवासियों द्वारा प्राप्त अतिक्रमण किये गये लोगों की सूचि भी संलग्न किया है जिसमें भोजबाई पति सालिकराम सरपंच एक एकड़, अनिल पिता सालिक राम ग्राम कोटवार एक एकड़, मदन लाल पिता सरजे राम ग्राम कोटवार 10 एकड़, गौतम पिता धनेश उपसरपंच आधा एकड़, प्रदीप पिता तुलसी पंच आधा एकड़, आधारी पिता शोभा ग्राम सभा सचिव एक एकड़, जवाहर पिता लीलाधर पूर्व उपसरपंच एक एकड़ सहित करीब 52 लोगों की सूची है जिनके द्वारा 27 लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।



