ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा
ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा
प्रतिदिन की भांति सीता रसोई संचालन ग्रुप में ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत राम बालक दास जी के द्वारा किया गया, जिसमें सभी भक्तगण जुड़कर अपने जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कीये
ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में राजकुमार जंघेल जी ने प्रश्न किया कि, तुलसी दल श्री राम जी को अति प्रिय है और उन पर चढ़ती भी है तो शिव जी को और गणेश भगवान जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ती और उनके भोग में इसका उपयोग क्यों नहीं किया जाता इस विषय को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है संतो का मत है कि तुलसी भगवान विष्णु की पत्नी है इसीलिए वह केवल विष्णु भगवान पर ही चढ़ती है शिव जी पर नहीं चढ़ती, दूसरा कारण यह भी एक है कि भगवान शिव को चढ़ाया गया प्रसाद निरमाल्य होता है अर्थात उसे चढ़ाकर या तो गाय को खिला दिया जाता है या तो उसे विसर्जित कर दिया जाता है अतः तुलसी दल का किसी भी तरह अपमान ना हो पाए इसलिए शिवजी पर चढ़ाया गया चरणामृत या प्रसाद में तुलसी दल को सम्मिलित नहीं किया जाता और एक मत यह भी है कि भगवान शिव को शमी पत्र बेलपत्र शमी पत्र अति प्रिय होते हैं अतः उनको उन्हीं से प्रसन्न किया जाता है ऐसा नहीं की गणेश भगवान और शिव जी को यदि तुलसी चढ़ा दी जाए तो कोई दोष होता है
श्रीमती तन्नू साहू ने जिज्ञासा रखी की भगवान शिव पर चढ़ाया गया प्रसाद या उनका चरणामृत ग्रहण नहीं किया जाता है इसके पीछे कोई धार्मिक मत ही है या वैज्ञानिक मत भी है इसके पीछे का वैज्ञानिक रहस्य को बताते बाबा जी ने कहा कि क्योंकि तांबे के पात्र से स्पर्श करने के बाद दूध और दही में विष गुण आ जाता है तो वह ग्रहण करने योग्य नहीं होता और भोले बाबा पर चढ़ाए जाने वाले फूल पत्र जैसे धतूरा आदि भी विषाक्त कीटाणु लिए होते हैं इसीलिए उनके दूध के स्पर्श से प्राप्त चरणामृत या प्रसाद को ग्रहण नहीं किया जाता यही इसका वैज्ञानिक मत है
लोकेश्वरी बहन ने प्रश्न रखा कि तुलसी मैया को जल चढ़ाते समय हमें कौन सा मंत्र बोलना चाहिए बाबाजी ने मंत्र को स्पष्ट करते हुए बताया कि हमारे शास्त्रों में सभी देवी देवताओं के पूजा हेतु मंत्रों का उल्लेख है सूर्यनारायण पर अर्थ देते समय भोलेनाथ पर जल चढ़ाते समय धरती मैया पर पैर रखते समय सभी तरह के मंत्र हैं तुलसी माता पर भी जल चढ़ाते समय आप मंत्र युग्मपत्र संयुक्ता मंजरी मध्य संस्थिता ददामि राम प्रीत्यर्थ ---- जब तुलसी पत्र को उतारा भी जाए तो उनसे क्षमा याचना करते हुए, की माता हम आपको प्रभु के चरणों में अर्पित करने हेतु उतार रहे हैं इसके लिए हमें क्षमा करें इस विनती के साथ उतारे।
