अलौकिक ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में सबका समाधान प्रतिदिन संत राम बालक दास जी द्वारा
अलौकिक ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में सबका समाधान प्रतिदिन संत राम बालक दास जी द्वारा
प्रश्न और जिज्ञासाओं से भरा हुआ अलौकिक ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में सबका समाधान प्रतिदिन संत राम बालक दास जी द्वारा किया जाता है, जिनके समाधान प्राप्त करके सभी अपने ज्ञान की वृद्धि तो कर ही रहे हैं अपने मन मस्तिष्क को भी शुद्ध कर रहे हैं, आत्मा का शोधन करने वाला सत्संग, में आज बाबा जी ने विभिन्न भक्तों माताओं के द्वारा किए जाने वाले प्रश्नों का विश्लेषण करते हुए उनका रूप एवं भेद के विषय में सभी को परिचित कराया
बाबा जी ने बताया कि प्रश्नों के कई प्रकार हैं जो कि हमारे भक्तगण इस ऑनलाइन सत्संग में प्रतिदिन करते हैं, जिससे वे आकर्षित होकर उनका समाधान प्रस्तुत करते हैं, एक प्रश्न होता है मार्मिक जो हृदय को छू लेते हैं जिस पर तत्काल बोलने को मन आतुर हो जाता है एक प्रश्न होता है मौखिक जो हमें पहले से ही पता होता है एक प्रश्न होते हैं धार्मिक जिसमें हमें बहुत अधिक सावधानी रखते हुए विषय को रखना होता है जिससे किसी की धार्मिक आस्था को भी ठेस ना पहुंचे और साथ ही उसका उचित उत्तर भी दे पाये एक प्रश्न होते प्रासंगिक जो कि तीज त्यौहार एवं हमारे आसपास के वातावरण से संबंधित होते हैं जिनका उत्तर भी प्रासंगिक ही होता है एक प्रश्न होता है व्यावहारिक जो कि बहुत ही उत्तम होता हैं जिसके उत्तर देने में स्वयं को भी ज्ञान प्राप्त होता है तो दूसरों को भी ज्ञान प्रदान किया जाता है, एक प्रश्न होता हैं सामाजिक जैसे सनातन धर्म से संबंधित गायत्री कबीरपंथ से जुड़े हुए होते हैं एक प्रश्न होते हैं पारिवारिक जो कि पारिवारिक होते हैं परंतु सीता रसोई संचालन समूह एक परिवार की तरह है जिसे आप बेहिचक हमसे कर सकते हैं एक प्रश्न होते हैं परमार्थिक जिसमें परमार्थ होता है जैसे माता पार्वती द्वारा शिवजी से श्री राम कथा को जानने के लिए प्रश्न किया गया जिससे संपूर्ण जगत का कल्याण हुआ एक प्रश्न होते हैं स्वार्थीक, जो कि ग्रुप में नहीं किए जाते, एक प्रश्न होते हैं आंशिक अर्थात प्रश्न को आधा ही किया जाता है और उत्तर देने वाला उसे विस्तृत रूप में बता देता है वह प्रश्न होते हैं आंशिक, एक प्रश्न होता है पौराणिक, श्रद्धा भाव से किया जाता है तो हमारे पौराणिक ग्रंथों का ज्ञान भी हमें मिलता है एक प्रश्न होता है संदर्भिक जो कि विशेष संदर्भ को लेकर पूछा जाता है एक प्रश्न होता है उपाख्यानिक जो किसी उपख्यान को लेकर किया जाता है एक प्रश्न होता है आध्यात्मिक जो कि स्वयं के मन भाव को लेकर पूछा जाता है एक प्रश्न होता है सांसारिक जो कि संसार में जब दुख आते हैं तब उसके निराकरण हेतु संतों एवं गुरु से पूछा जाता है एक प्रश्न होते हैं तार्किक जिज्ञासा उत्तर तो हमें ज्ञात होता है परंतु उसे हम दूसरे की दृष्टि से पूछना चाहते हैं, एक प्रश्न होते हैं भावीक, यह भावपूर्ण प्रश्न भक्तों माताओं भाइयों द्वारा किए जाते हैं जिन्हें प्रभु में अति प्रेम होता है एक प्रश्न होते हैं
बहूआर्थीक जिनका कई भागों में उत्तर दिया जा सकता है एक प्रश्न होते हैं भौतिक जो हमें संसार में दिखता है उनके विषय में पूछना एक प्रश्न होते हैं लौकिक, लौकिक ज्ञान से संबंधित प्रश्न होते हैं कुछ प्रश्न होते हैं अलौकिक जोकि संत महात्माओं के वैराग्य ब्रह्मचर्य भाव भक्ति मनोदशा से जुड़े होते हैं और प्रश्नों का एक रूप होता है वैज्ञानिक जो कि प्रत्येक कर्म में जो भी हमारे हिंदू धर्म से जुड़े हैं उनमें कुछ ना कुछ वैज्ञानिक तर्क जरूर होता है उनसे जुड़े हैँ
संतोष श्रीवास जी ने प्रश्न किया कि जब गुरु शिष्य बनाते हैं तो शिष्य की क्या विशेषताएं होती है इस विषय को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि गुरु कभी भी शिष्य बनाते समय उसके शरीर को नहीं देखते उसकी जात पात लिंग रूप बुद्धिमता से उसे कोई लेना देना नहीं होता वह तो उसके मन की सुंदरता और निष्कपट निश्चल भाव को ही देखते हैं वैसे ही जब आप किसी को गुरु बनाए तो उसके शरीर को ना अपनाते हुए उनके ज्ञान को अपनाये क्योंकि शरीर तो लोभी और विकारी हो सकता है लेकिन गुरु का ज्ञान सर्वोच्च होता है उसे ज्ञान को ही गुरु माने।
