1दिसम्बर से धान खरीदी किये जाने पर किसानों में सरकार के प्रति असहमति
1दिसम्बर से धान खरीदी किये जाने पर किसानों में सरकार के प्रति असहमति
आरंग
छग सरकार द्वारा 1दिसम्बर से धान खरीदी किये जाने पर किसानों ने असहमति जताते हुये एस डी एम को ज्ञापन सौंपा है।किसानों ने बताया कि अधिकांश किसान छोटे जोत वाले है जो कम अवधिवाले धान की बोआई किये है।इसमे एक हजार दस, महामाया व अन्य धान है। किसान धान की कटाई कर चुके है या करने वाले है। किसान सरकारी खरीदी पर ही पूर्ण रुप से निर्भर है। ऐसे में 60% किसानों के पास कोठी और खलिहान दोनो नही है। किसान अपना धान कहां रखेगा यह भी एक बड़ी समस्या है।।
आजकल किसान हार्वेस्टर से धान की कटाई करता है और सीधे ग्रामीण सोसायटी के माध्यम से बिक्री कर देता है। किसानों को अपनी धान को एक माह तक सुरक्षित रख पाना बहुत कठिन कार्य है। जब से सोसायटी से धान खरीदी प्रारंभ हुआ है तब से कोठी एवं खलिहान का उपयोग न्यूनतम हो गया है।।
कोरोना महामारी के दौरान किसान कर्ज में डूब चुका है। बेमौसम बारिश के साथ अन्य बीमारी से फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे समय मे सरकार के द्वारा एक दिसम्बर से धान की खरीदी करना तो किसानों के साथ अन्याय है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। दीपावली-कर्ज व अन्य जरूरी खर्च को देखते हुए किसान एक दिसम्बर तक इंतजार किसी भी हालत में नही करेगा और अपना धान को औने पौने भाव मे बेचेगा ही। इससे किसान को हजार-बारह सौ का सीधा-सीधा नुकसान होगा।।
किसानों ने एस डी एम को ज्ञापन देकर मांग की है कि सरकार इस पर पुनर्विचार करे और 15 नवम्बर से धान खरीदी प्रारंभ करें और किसानों के धान को प्रति एकड़ 20 क्विंटल के हिसाब से खरीदी भी करे। इस बार धान खरीदी केंद्र में कोरोना वायरस को ध्यान में रखकर किसानों की भीड़ को कम करने के लिये धान खरीदी अवधि में भी वृद्धि किया जाना जरूरी है। ज्ञापन में सैकड़ो किसान के हस्ताक्षर है इनमे प्रमुख रूप से गणेश साहू, रमेश तिवारी, भोला साहू, सियाराम सोनकर, विजेंद्र लोधी, राधेश्याम पाल, बाबूलाल साहू, शंकर पाल आदि है।


