हर रेत घाट में उल्लू बैठा है..
हर रेत घाट में उल्लू बैठा है..
धमतरी
छत्तीसगढ़ की सरकार ने बड़े बड़े दावे कर प्रदेश में खनिज नीति बदली थी, और कहा था कि जनता को रेत सस्ते में मिलेगी, माफिया खत्म होगा, राज्य सरकार के साथ पंचायतों की आय भी बढ़ेगी.... ऐसा होगा वैसा होगा...आज लगभग दो साल बाद क्या वो दावे सही साबित हो रहे हैं..??
जमीनी हकीकत तो अब जग जाहिर है कि पहले रेत खदानों में जिनका नियंत्रण था वो तब के राजा के करीबी थे अब जिनका नियंत्रण है वो वर्तमान राजा के करीबी हैं, इसके अलावा कुछ भी नही बदला है, उल्टा चोरी और मनमानी कई गुना बढ़ गई है, धमतरी जिले की बात करें तो यहाँ कुछ ऐसा है कि दिन में जो सरकारी काम करते है वही रात में रेत माफियो के सहयोगी बन जाते हैं, जी हाँ राजा की सेना के पराक्रमी सिपहसालार ही रेत खदानों के खाईवाल बन बैठे हैं,।
सबसे पहले राजा की सेना में युवा रेजिमेंट के कमांडर *पोपोकाड़ी*(बदला हुआ नाम) की बात करें, जो कुरुद क्षेत्र में एक खदान पर कब्ज़ा रखे हुए हैं, एक रात में जब अवैध उत्खनन कर बीच राजा की सेना के ही दूसरे सिपाही खदान में चले गए, इरादा था जेब गरम करने का, लेकिन जब पोपोकाड़ी से फोन में बात हुई तो सिपाही चुपचाप बैरंग लौट गए,
अब सुनिए जिले के धमतरी और कुरुद विधानसभा में विधायक बनने की जुगत में लगे दो युवा सिपाहियों के जलवे... जो हर रात अपने महंगे एसयूवी वाहनों से ,इलाके के खदानों में जाते है, नगद इकट्ठा कर के लाते है और कम्बलपुर(बदला हुआ नाम) मे बैठते है, पापड़ पानी से हलक तर करते है और नगदी आपस मे बांट लेते हैं, इस माल का एक हिस्सा धमतरी के रायपुर रोड में खुले नए टाइम पास केंद्र में भी जाता है लिहाजा, पूरी सेना और सेना पति रेत की लूट के हिस्सेदार हैं, मुंह और कलम बन्द रखने के लिए, अधिकारियों को भी आरएलआईएम (रेत लूट इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) में दाखिला करवा दिया गया है, कुछ पोर्टेबल और कुछ 32 इंच वाले सहाफियों को भी जूठन भिजवाया जाता है, अब इस तरह के लूट मैनेजमेंट के बीच रेत का अवैध धंधा रुके तो कैसे रुके।
।। बस एक ही उल्लू काफी है, बर्बाद-ए-गुलिस्तां के लिए।।
हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।।

