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आज का सुविचार

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..19-11-2020*..🎋


✍🏻सुखी उसे नहीं कहा जाना चाहिए जिसे दूसरे लोग सुखी समझते हैं। असल में सुखी वह है जो अपने में सन्तुष्ट है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *ओमशान्ति*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻सुंदरता से बढ़कर चरित्र हे, प्रेम से बढ़कर त्याग हे, दौलत से बढ़कर मानवता हे, परन्तु सुंदर रिश्तों से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है।

🌹 *ओमशान्ति*🌹


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💥 *जीवन का उद्देश्य*💥


दो दोस्त एक गांव में रहते थे। दोनों दोस्तों ने पढ़ाई समाप्त करके एक सर्विस करने लगा और दूसरा अपने परिवार का खेती-बाड़ी द्वारा पालन पोषण किया करता था। कुछ समय के बाद एक दोस्त को ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बारे में पता चला। जहां पर परमपिता परमात्मा निराकार शिव आकर गीता का ज्ञान, अमरकथा, सत्यनारायण की कथा, तीजरी की कथा, सृष्टि के आदि मध्य अन्त का ज्ञान, भविष्य में मनुष्य से देवता बनने की पढ़ाई पढ़ाने आये हैं। उस दोस्त ने दूसरे दोस्त से कहा कि इस समय भगवान हमें बाप बनकर वरसा देने आए हैं, टीचर बन पढ़ाने आये हैं और सदगुरु बनकर हमें वरदान देते हैं, हमारी सद्गति करते हैं, हमें मुक्ति जीवनमुक्ति देते हैं। दूसरे दोस्त ने कहा ठीक है अभी मैं बच्चों की पालना कर रहा हूं। बच्चे बड़े हो जाएंगे फिर हम परमात्मा का ज्ञान सुनेंगे। धीरे-धीरे बच्चे बड़े हो गए, बच्चों की शादी हो गई। बच्चों के बच्चे हो गए। फिर पहला दोस्त दूसरे दोस्त से बोला कि अब तो बच्चे आपके बड़े हो गए हैं। छोटे-छोटे उनके बच्चे भी हो गए हैं। अब तो भगवान को याद कर लो अपना खाता जमा कर लो। दूसरा दोस्त बोलता है अभी तो नातियों को प्यार करने का समय है। इनकी परवरिश कर लें, क्योंकि यह ब्याज का भी ब्याज है। कुछ दिनों के बाद नाती बड़े हो गए उनकी भी शादी हो जाती है। फिर वह पहले वाला दोस्त पहुंचता है। और कहता है कि अब तो भगवान को याद कर लो, अपना भाग्य बना लो। वह दूसरा दोस्त बोलता है कि हमें इनके भी बच्चे देखने हैं। कुछ दिन के बाद फिर से पहला दोस्त दूसरे दोस्त के घर जाता है और अपने दोस्त की खैरियत पूछता है, उनके बारे में पूछता है, उस दिन वह दोस्त नहीं होता है। उसके परिवार वाले बताते हैं कि वह तो अपना शरीर छोड़ गए हैं। वह इस दुनिया में अभी नहीं है।


 *शिक्षा* :- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है। पैदा होना पढ़ना, लिखना शादी, बच्चे फिर बच्चों की परवरिश करना फिर उनके बच्चों की देखभाल करना। मोह, माया में फंसे रहना। क्या यही जीवन का सही उद्देश्य है। भगवान ने मनुष्य का जन्म दिया है। कुछ ऐसा करके जाएं जो लोग याद करें। भले हम चले जाएं लेकिन मनुष्य हमारा नाम अमर रखें। हमें दूसरों के लिए जिंदगी को जीना है। भगवान ने इतना सारा कुछ दिया है। हम उसका शुक्रिया न मानकर एक चीज नहीं दी या जो चीज नहीं दी। या एक तरह का कष्ट दिया, दो तरह का कष्ट दिया है जो भी दिया है। हम उनका गुणगान करते हैं और जब कि भगवान तो कभी भी, किसी को कष्ट देता नहीं है। यह सभी हमारे कर्मों का हिसाब है, जिनकी वजह से हम आज दुखी है, कष्ट में है, फिर भी इतनी चीजें मिल रही है। हमें उनमें खुश होना है। संसार में हर किसी मनुष्य के पास हर वस्तु नहीं है। हमें भगवान ने जो दिया, हमें उसमें संतुष्ट रहना है। अपने जीवन का उद्देश्य देखना है कि हमें अपने के लिए व दूसरों के लिए क्या करके जाना है। जिससे लोग हमारा नाम अमर रखें और हमारे किए हुए कर्मों से दूसरों को प्रेरणा मिले।




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✨✨ *रात्रि कहानी* ✨✨

    😶 *मन  का  भूत* 😯


         _एक तांत्रिक ने एक बार एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया ,_


         _संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई,_


        _सेठ ने उससे पूछा - भाई यह क्या है, उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है। इसमें अपार बल है, कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो यह एक पल में निपटा देता है। यह कई वर्षों का काम मिनटों में कर सकता है ,_


         _सेठ भूत की प्रशंसा सुन कर ललचा गया और उसकी कीमत पूछी......., उस आदमी ने कहा कीमत बस पाँच सौ रुपए है ,_


        _कीमत सुन कर सेठ ने हैरानी से पूछा- बस पाँच सौ रुपए.............!!!!_


        _उस आदमी ने कहा - सेठ जी जहाँ इसके असंख्य गुण हैं वहाँ एक दोष भी है। अगर इसे काम न मिले तो मालिक को खाने दौड़ता है।_


       _सेठ ने विचार किया कि मेरे तो सैकड़ों व्यवसाय हैं, विलायत तक कारोबार है, यह भूत मर जायेगा पर काम खत्म न होगा ,_


        _यह सोच कर उसने भूत खरीद लिया, मगर भूत तो भूत ही था ,  उसने अपना मुंह फैलाया और बोला - *काम  काम  काम  काम.......!!*_


       _सेठ भी तैयार ही था,  उसने बहुत को तुरन्त दस काम बता दिये , पर भूत उसकी सोच से कहीं अधिक तेज था इधर मुँह से काम निकलता उधर पूरा होता , अब सेठ घबरा गया ._


        _संयोग से एक सन्त वहाँ आये. सेठ ने विनयपूर्वक उन्हें भूत की पूरी कहानी बतायी। सन्त ने हँस कर कहा अब जरा भी चिन्ता मत करो . एक काम करो , उस भूत से कहो कि एक लम्बा बाँस ला कर आपके आँगन में गाड़ दे._


      _बस जब काम हो तो काम करवा लो और कोई काम न हो तो उसे कहें कि वह बाँस पर चढ़ा और उतरा करे. तब आपके काम भी हो जायेंगे और आपको कोई परेशानी भी न रहेगी._


      _सेठ ने ऐसा ही किया और सुख से रहने लगा....._


        _यह मन ही वह भूत है। यह सदा कुछ न कुछ करता रहता है एक पल भी खाली बिठाना चाहो तो खाने को दौड़ता है।_


      _श्वास ही बाँस है। श्वास पर बाबा का सिमरन का अभ्यास ही बाँस पर चढ़ना उतरना है।_


       _आप भी ऐसा ही करें। जब  आवश्यकता हो मन से काम ले लें , जब काम न रहे तो हर श्वास में बाबा को याद करने लगो, फिर आप भी सर्व प्रकार के सुख और शांति के झूले में झूलने लगेंगे !_


*नित याद करो मन से शिव को* 💥🙂


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