सत्य अविनाशी ज्ञान से ही गरीबी दूर हो सकती है ना कि धन दान करने से--ब्रह्मा कुमार नारायण भाई - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

सत्य अविनाशी ज्ञान से ही गरीबी दूर हो सकती है ना कि धन दान करने से--ब्रह्मा कुमार नारायण भाई

 सत्य अविनाशी ज्ञान से ही गरीबी दूर हो सकती है ना कि धन दान करने से--ब्रह्मा कुमार नारायण भाई



 अलीराजपुर 8 दिसंबर 

,वर्तमान मानव जीवन में धन की गरीबी, स्वास्थ्य की गरीबी, चरित्र की गरीबी किसी धन, दवाई ,व भक्ति पूजा-पाठ कर्मकांड से दूर नहीं हो सकती है ।यह सब तो हम बचपन से व कई जन्मों से करते आए हैं जिसका परिणाम दिन प्रतिदिन जीवन और ही इन कमियो से बढ़ता चला गया। आज अनेक धार्मिक संस्थाएं ,ट्रस्ट इस कार्य में लगी हुई है फिर भी गरीबी, हेल्थ, चरित्र का संकट दूर नहीं हो पाया। कारण सत विवेक की कमी। जैसे एक मां बाप अपने बच्चे को पढ़ा कर डॉक्टर इंजीनियर एक जन्म के लिए बना देते हैं जिससे उसका एक जीवन तो संपन्न ता से बीत जाता। लेकिन फिर दूसरे जन्म में उसे पुनः पढ़ाई करके ही धन को हासिल कर सकता। 



फिर भी आरोग्यता, चरित्र  कि गरीबी तो बनी रहती है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी मार्ग पर स्तिथ ब्रह्मा कुमारी सभागृह में नगर वासियों को गरीब को दिया धन दान और ही उसे गरीब बना रहा है इस विषय पर आपने बताया कि अगर हम सदा के लिए इन चीजों को खत्म करना चाहते हैं ।स्वयं को ,देश को, विश्व को संपन्न शक्तिशाली समृद्ध बनाना चाहते हैं। जहां चारों और वैभव की संपन्नता, निरोगी जीवन, चरित्र से भरपूरता हो उसके लिए सत्य ज्ञान, समझ , सत विवेक की आवश्यकता है। कहा जाता है जहां सुमति है वहां संपत्ति सभी तरह की है ।जहां अविनाशी सत्यता है वहा सभी तरह की संपन्नता है। इसिलिए ईश्वर से सत बुद्धि मांगी जाती है। उस के अभाव में गरीबी का संकट दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है ।वर्तमान संकट काल में स्वयंभू परमपिता शिव परमात्मा गरीब नवाज बन स्वयं इस धरा पर आकर सत्य ज्ञान द्वारा  आत्माओं को सदा के लिए 84 जन्मों के लिए धन ,आरोग्यता ,चरित्र ,वैभव से परिपूर्ण बना रहे हैं ।धन दान करके किसी गरीब को अल्प कालीन पूर्ति तो कर सकते हैं परंतु फिर भी वह गरीब ही बना रहता है। मागता ही रहेगा ,उसके संस्कार मांगने के रहेंगे। वह  लिए हुए धन  को वापिस नही चुका पाने के कारण गरीबी की दलदल में फसता जाता है ।किसी को धन दान देकर के आपने परोपकार का कार्य नहीं किया बल्कि उसे और ही खड्डे में गिराकर हमेशा गरीब बने रहने का आशीर्वाद साथ में दे दिया ।अगर धन दान के साथ उसी वक्त आत्मिक ज्ञान , स्वयं की पहचान देकर किया जाए तो पुनः गरीबी की रेखा से ऊपर उठकर इतना संपन्न मालामाल बन जाता है जिससे वह आत्मा दाता देवता बन जाती है। इसलिए परमात्मा को गरीब नवाज कहा गया है ।गरीब अर्थात पतितो को पावन बनाने वाला। जहा जीवन में पवित्रता है वहां सभी तरह की संपन्नता है इसलिए देवताओं के चित्रों में पैरों में कमल ,पदम की निशानी बताई गई है। कमल अर्थात शरीर भान से, पतित संसार से, विकारों से न्यारा कमल समान पवित्र बताया गया। दूसरा कमल को पदम भी कहते हैं इसी पवित्र ज्ञान से जीवन पदमा पदम गुना धन ,स्वास्थ ,चरित्र की प्राप्ति करा देता है जो 21 जनम तो हम संपन्न रहते हैं बाकी जन्म याचक आत्माओं को दान देकर भी अपनी संपन्नता कायम बनी रहती है । इसीलिए भारत में राजाओं की दान वीरता के बावजूद भी उनकी राजाई बनी रहती है।

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads