दिमाग को गर्म रखना जीवन को तमाशा बनाना व दिमाग को ठंडा रखना जीवन को तपस्या बनाना-ब्रहमा कुमार नारायण भाई - fastnewsharpal.com
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दिमाग को गर्म रखना जीवन को तमाशा बनाना व दिमाग को ठंडा रखना जीवन को तपस्या बनाना-ब्रहमा कुमार नारायण भाई

 दिमाग को गर्म रखना  जीवन को तमाशा बनाना व दिमाग को ठंडा रखना जीवन को तपस्या  बनाना-


ब्रहमा कुमार नारायण भाई 


अलीराजपुर 11 दिसंबर

 आध्यात्मिकता हमे सिखाती हैं...जल्दी उठ कर भगवान को याद करो, किसी से गलती हो गई तो माफ़ कर दो, बीती को भुलाना सीखो, किसी से अनबन हुई तो उसे किनारे कर पुन: हाथ मिला लो, नम्र बन जाओ ये बाते बन्धन नही बल्कि हमारी सुरक्षा हैं।




भगवान कहते हैं...अपने आप को बदलो। दुःख भीतर से निकलता है इसलिए सुधार भी भीतर से होगा। और भीतर से सुधार होगा आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन में धारण करने से।ईर्ष्या को जीवन से निकाल दे...तो मन में ख़ुशी रहेगी जो मन दर्पण से सपष्ट दिखाई देगी। ख़ुशी तब कम होती है जब मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष का भाव उत्तपन्न होता है परन्तु ज्ञानवान मनुष्य को चाहिए कि जब उसके मन में ऐसा भाव उतपन्न हो तब सोचें कि यह तो मेरी गिरावट की निशानी है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने अपनी खुशी के पैरामीटर को पहचाने इस विषय पर महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित ब्रहमा कुमारी सभागृह में नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया कि जीवन को दो ही तरीके से जिया जा सकता है, तपस्या बनाकर या तमाशा बनाकर। तपस्या का अर्थ जंगल में जाकर आँखे बंद करके बैठ जाना नहीं अपितु अपने दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं को मुस्कुराकर सहने को क्षमता को विकसित कर लेना है।। हिमालय पर जाकर देह को ठंडा करना तपस्या नहीं अपितु हिमालय सी शीतलता दिमाग में रखना जरुर है। किसी के क्रोधपूर्ण वचनों को मुस्कुराकर सह लेना जिसे आ गया, सच समझ लेना उसका जीवन तपस्या ही बन जाता हैं।। छोटी-छोटी बातों पर जो क्रोध करता है। निश्चित ही उसका जीवन एक तमाशा सा बनकर ही रह जाता है।। हर समय दिमाग गरम रखकर रहना यह जीवन को तमाशा बनाना है। और दिमाग ठंडा रखना ही जीवन को तपस्या सा बनाना है।

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