आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..14-01-2021*..🎋


✍🏻अच्छे किरदार, अच्छे संस्कार और अच्छे विचार वाले लोग,  हमेशा साथ रहते हैं, दिलो में भी लफ्जो में भी ,और दुआओ में भी।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻दुनिया में सिर्फ दिल ही है, जो बिना आराम किये काम करता है, इसलिए उसे खुश रखो, चाहे वो अपना हो या अपनों का।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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*मीठे गुड़ में मिल गए तिल,*
*उड़ी पतंग और खिल गए दिल,*
*हर पल सुख और हर दिन शांति,*
*आप सबके लिए लाये मकर सक्रांति...*

इस साल की मकर सक्रांति आप सभी के लिए तिल-गुड़ जैसी मीठी और पतंग जैसी ऊंची उड़ान लाये...यही हमारी दिल की दुआएं और शुभ-कामनाएं हैं!!!💝

*आप सभी को मकर संक्रांति की ढेर सारी बधाइयाँ!!!*💐

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*ईश्वरीय ज्ञान आत्मा का आहार, और उपचार*
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भगवान के लिए कहते हैं कि वह सब मुश्किलों का हल करता है। जब कोई मुश्किल आती है तो लोग प्रार्थना करते हैं, "हे दुखहर्ता-सुखकर्ता प्रभु" हमारे ऊपर यह विघ्न है, इसे दूर करें। परमात्मा सर्वशक्तिमान नॉलेज फुल है, उसके सामने कोई पहाड़ जैसी रुकावट भी ठहर नहीं सकती। 

एक डॉक्टर जानता है कि फलानी बीमारी इस कारण पैदा होती है। उसका निदान इस विधि से होता है। उसके पास दवाई का भी ज्ञान होता है। इसी तरह ईश्वरीय ज्ञान बताता है, कौन सी समस्या का क्या हल है? आत्मा की किस बीमारी के लिए कौन सी दवाई है? उसका निदान क्या है?  *अगर आए हुए विघ्नों को दूर करने की युक्ति हमें पता नहीं है, तो मानो कि हमने इस ज्ञान को पूरी तरीके से समझा ही नहीं* इस ज्ञान में आत्मा की उन्नति के लिए सब औषध, उपचार और आहार है। सिर्फ 'मृत्यु' के लिए दवा नहीं है क्योंकि मरता शरीर है, आत्मा नहीं। 

बाबा ने कहा है, जीवन में अगर विघ्न आते हैं तो विघ्न विनाशक बनो। विघ्न विनाशक कैसे बने इस बारे में बाबा मुरली में बताते रहते हैं। उन बातों को ध्यान में रखें, तो कोई भी विघ्न ठहर नहीं सकता। एक विशेष धारणा प्रैक्टिकल में अनुभव करनी है कि "भगवान हमारा साथी है, हम अकेले नहीं कर रहे हैं।"  हमारे साथ वह है तो कोई भी विघ्न या समस्या हमारा मुकाबला नहीं कर सकती। भले ही समस्या हमारी शक्ति से ज्यादा शक्तिमान है, लेकिन सर्वशक्तिमान जब साथी है तो कैसी भी रुकावट, विघ्न ठहर नहीं सकता।

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*🌹  ॐ  शान्ति  🌹*
*🙏Thanks God & All🙏*
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*धैर्य प्रतिक्रिया की अनुपस्थिति नहीं है; बल्कि सही समय पर, सही तरीके से और सही सिद्धांतों को लागू कर प्रतिक्रिया करना है। धैर्य शक्ति है..*

*Patience is not an absence of action; rather it to act on the right time, in the right way, applying the right principles. Patience is power..*
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*Health, Wealth, Happiness & Success is Our Godly Birthright*


💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*14 जनवरी:-*_ किसी भी रिश्ते या इंसान से दुःख पोहचने का अर्थ यही है के हमारा उस रिश्ते या इंसान से लगाव गहरा है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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👏🌹😊अनमोल मोती-
बेशक जीवन में धन का अपना एक अलग महत्व होता है, फिर भी इंसान के पास अगर धन है और इंसान सही नही, तो उसके पास धन होते हुए भी लोगों की नज़रों में सम्मानहींन ही रहता है, लेकिन अगर धन के साथ इंसान  अच्छा है, तो उसका धन उसके सम्मान में भी बढ़ोतरी कर देता है, इसलिए इंसान का सुखदाई होना अतिआवश्यक होता है, 
*ओम शांति, सुप्रभात*
👍💖😊



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*👉🏿मृत्यु एक सत्य हैं* 🏵️

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एक राधेश्याम नामक युवक था | स्वभाव का बड़ा ही शांत एवम सुविचारों वाला व्यतयक्ति था | उसका छोटा सा परिवार था जिसमे उसके माता- पिता, पत्नी एवम दो बच्चे थे | सभी से वो बेहद प्यार करता था |


इसके अलावा वो कृष्ण भक्त था और सभी पर दया भाव रखता था | जरूरतमंद की सेवा करता था | किसी को दुःख नहीं देता था | उसके इन्ही गुणों के कारण श्री कृष्ण उससे बहुत प्रसन्न थे और सदैव उसके साथ रहते थे | और राधेश्याम अपने कृष्ण को देख भी सकता था और बाते भी करता था | इसके बावजूद उसने कभी ईश्वर से कुछ नहीं माँगा | वह बहुत खुश रहता था क्यूंकि ईश्वर हमेशा उसके साथ रहते थे | उसे मार्गदर्शन देते थे | राधेश्याम भी कृष्ण को अपने मित्र की तरह ही पुकारता था और उनसे अपने विचारों को बाँटता था |


एक दिन राधेश्याम के पिता की तबियत अचानक ख़राब हो गई | उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया | उसने सभी डॉक्टर्स के हाथ जोड़े | अपने पिता को बचाने की मिन्नते की | लेकिन सभी ने उससे कहा कि वो ज्यादा उम्मीद नहीं दे सकते | और सभी ने उसे भगवान् पर भरोसा रखने को कहा |


तभी राधेश्याम को कृष्ण का ख्याल आया और उसने अपने कृष्ण को पुकारा | कृष्ण दौड़े चले आये | राधेश्याम ने कहा – मित्र ! तुम तो भगवान हो मेरे पिता को बचा लो | कृष्ण ने कहा – मित्र ! ये मेरे हाथों में नहीं हैं | अगर मृत्यु का समय होगा तो होना तय हैं | इस पर राधेश्याम नाराज हो गया और कृष्ण से लड़ने लगा, गुस्से में उन्हें कौसने लगा | भगवान् ने भी उसे बहुत समझाया पर उसने एक ना सुनी |


तब भगवान् कृष्ण ने उससे कहा – मित्र ! मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ लेकिन इसके लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा | राधेश्याम ने तुरंत पूछा कैसा कार्य ? कृष्ण ने कहा – तुम्हे ! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो | राधेश्याम झट से हाँ बोलकर तलाश में निकल गया | उसने कई दरवाजे खटखटायें | हर घर में ज्वार तो होती लेकिन ऐसा कोई नहीं होता जिनके परिवार में किसी की मृत्यु ना हुई हो | किसी का पिता, किसी का दादा, किसी का भाई, माँ, काकी या बहन | दो दिन तक भटकने के बाद भी राधेश्याम को ऐसा एक भी घर नहीं मिला |


तब उसे इस बात का अहसास हुआ कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं | इसका सामना सभी को करना होता हैं | इससे कोई नहीं भाग सकता | और वो अपने व्यवहार के लिए कृष्ण से क्षमा मांगता हैं और निर्णय लेता हैं जब तक उसके पिता जीवित हैं उनकी सेवा करेगा |


थोड़े दिनों बाद राधेश्याम के पिता स्वर्ग सिधार जाते हैं | उसे दुःख तो होता हैं लेकिन ईश्वर की दी उस सीख के कारण उसका मन शांत रहता हैं |


दोस्तों इसी प्रकार हम सभी को इस सच को स्वीकार करना चाहिये कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं उसे नकारना मुर्खता हैं | दुःख होता हैं लेकिन उसमे फँस जाना गलत हैं क्यूंकि केवल आप ही उस दुःख से पिढीत नहीं हैं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति उस दुःख से रूबरू होती ही हैं | ऐसे सच को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही जीवन हैं |


कई बार हम अपने किसी खास के चले जाने से इतने बेबस हो जाते हैं कि सामने खड़ा जीवन और उससे जुड़े लोग हमें दिखाई ही नहीं पड़ते | ऐसे अंधकार से निकलना मुश्किल हो जाता हैं | जो मनुष्य मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता हैं उसका जीवन भार विहीन हो जाता हैं और उसे कभी कोई कष्ट  तोड़ नहीं सकता | वो जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता जाता हैं |



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