आज का चिंतन(सुविचार)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..08-03-2021*..🎋
✍🏻किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है, उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻इन्सान का सबसे अच्छा साथी उसकी सेहत है। अगर उसका साथ छूट जाए तो हर रिश्ते के लिए बोझ बन जाता है।
🌹 *σм ѕнαитι.*
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#GOD is #ONE
आपको यह जानकर हर्ष होगा ( और शायद आश्चर्य भी ) कि शिवरात्रि कोई साधारण पर्व नही बल्कि सर्व आत्माओं के पारलौकिक परमपिता , निराकार परमात्मा के इस सृष्टि पर दिव्य अवतरण का स्मृति दिवस है । अत : यह पर्व सारे विश्व का सर्व महान पर्व है । शिवरात्रि पर्व का वर्तमान समय से व हम सभी के जीवन से गहरा सम्बंध है ।
#शिवरात्रि_का_रहस्य : -
आध्यात्मिक अर्थ में रात्रि शब्द , अज्ञान अंधकार व आसुरी लक्ष्णों का सूचक है और शिव शब्द , कल्याणकारी निराकार परमात्मा के लिए है । आज आप चारों ओर देख रहें है पापाचार , दुराचार व भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है । मनुष्य विषय - विकारों की कैद में फंस हुए हैं । ' गीता ' में वर्णित धर्म की ग्लानि के सभी लक्ष्ण साफ - साफ दिखाई दे रहें है । यही वह समय है जबकि , स्वयं सृष्टि के रचयिता निराकार परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर , अज्ञान व अधर्म के अंधकार को मिटाते हैं , जिसका यादगार पर्व है ' महाशिवरात्रि ' ।
#परमात्मा_शिव_का_परिचय : -
भारत के कोने - कोने में १२ ज्योतिर्लिंग परमात्मा शिव के दिव्य कर्तव्यों की यादगार प्रतिमाएं हैं । दूसरे धर्मो में ' गॉड इज लाइट ' , ' अल्लाह नूर ' , ' एकों ओंकार निराकार ' कहकर , परमपिता परमात्मा को प्रकाश का रूप माना गया है । अत : ज्योतिस्वरूप निराकार परमात्मा की ही यादगार प्रतिमा शिवलिंग है जिसे ज्योतिर्लिंगम् भी कहा जाता है । शिव व शंकर में महान अन्तर है , शंकर जी विनाश की एक शक्ति के प्रतीक है जबकि परमात्मा शिव , रचना - पालना - विनाश तीनों शक्तियों के दाता है । शंकर जी सूक्ष्म शरीर धारी देवता हैं और शिव निराकार परमात्मा हैं , इसलिए शिव को अजन्मा अभोक्ता भी कहा जाता है ।
#शिवरात्रि_पर्व_पर_मनाई_जाने_वाली_रस्में_एवं_उनका_आध्यात्मिक_रहस्य :-
1 शिवरात्रि पर जागरण...
अर्थात अज्ञान निंद्रा से जागने की निशानी
2 शिवरात्रि पर व्रत...
अर्थात विषय विकारों के त्याग की प्रतिज्ञा
3 जल की लोटी चढ़ाना...
अर्थात मन के पवित्र प्रेम का अर्पण
4 कलावा बांधना...
अर्थात आत्मा का परमात्मा से मन का बंधन बांधना ( मनमनाभव )
5 अक - धतूरा चढ़ाना...
अर्थात मनोविकारों रूपी विष का त्याग करना
6 बेल - पत्र चढ़ाना...
अर्थात मन - बुद्वि - संस्कार सहित शिव पर अर्पण होना
7 तिलक लगाना...
अर्थात आत्म स्मृति में रहना
8 बलि चढ़ाना...
अर्थात स्वयं के मैं पन को मिटाना...
ओम शांति।







