आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

आज का चिंतन(सुविचार)

🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃

💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..08-03-2021*..🎋


✍🏻किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है, उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃


♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻

  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻इन्सान का सबसे अच्छा साथी उसकी सेहत है। अगर उसका साथ छूट जाए तो हर रिश्ते के लिए बोझ बन जाता है।

🌹 *σм ѕнαитι.*

♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻


♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻जिसकी सोच में आत्मविश्वास की महक है, जिसके इरादों में हौसले की मिठास है जिसकी नीयत में सच्चाई का स्वाद है, उसकी पूरी जिन्दगी महकता हुआ गुलाब।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
         ॐ शांति
*तुम अपना मान शान देखकर प्रसन्न न होवोगे तो अपमान दुःख नहीं दे सकेगा।।सांसारिक दुःख जागृति पैदा करते हैं। और सुख गफलत की ओर ले जाते हैं, क्योंकि दुःख में जीव प्रभु के निकट होता जाता है। और सुख प्रभु की याद भुलाकर उनसे दूर करते हैं।। मोहवश जीव प्रभु के प्रेम को भुला देता है। परन्तु जब उस पर कष्ट आते हैं।। तो पुनः प्रभु-प्रेम उसके मन में प्रस्फुलित हो जाता है। और वह दृढ़तापूर्वक भक्तिपथ पर चलना आरम्भ कर देता है।। मनुष्य को मालिक ने एक बहुत बड़ी दात प्रदान की है।धैर्य यदि वह बड़ी मुसीबत आने पर भी धैर्य नहीं छोड़ता तो कभी परेशान नहीं होगा और यदि इसने इस दात का सही प्रयोग नहीं किया तो साधारण से साधारण बात भी इसे परेशान कर देगी।। ईश्वर जो कुछ करता है, वह हमारे लिए हितकारक है। जिसने जितना भी दृढ़ विश्वास किया होगा वह उतना ही सुखी होगा।।*
      ओम शांति
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

💐 💐🌞 💐
               ओम शान्ति                                         
*मन कुछ कहता है, बुद्धि कुछ कहती है, समाज कुछ कहता है लेकिन तुम्हारे हृदय की आवाज सबसे निराली है, तो हृदय की आवाज को ही सत्य मानो, क्योंकि और सब की अपेक्षा हृदय परमात्मा से ज्यादा नजदीक है। जिसको परमात्मा के स्मरण का मूल्य पता है, जिसने परमात्मा के मार्ग में कदम रखा है उनके लिए संसार की सुविधाएँ, संसार का सुख त्यागना कोई बड़ी बात नहीं है। जो अभागे परमात्मा को त्यागकर बैठे हैं उनको तो संसार का सुख भी नहीं मिलता, थप्पड़ें ही मिलती हैं। जो आगे बढ़ते हैं वो दूसरों को अटकाते नहीं और जो दूसरों को अटकाते हैं, वे कभी आगे बढ़ते नहीं | दूसरों को दबाकर, पछाड़कर केवल स्वयं ही आगे बढ़नेवाला हो सकता है खेल में जीत जाए परंतु जिंदगी में तो हार ही जाता है |*
                                                           
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
 
अनमोल वचन :

खुशी कोई नहीं दे सकता,न ही बाजार में किसी दुकान पर जाकर पैसे देकर खरीद सकते हैं।अगर पैसे से खुशी मिलती तो दुनिया के सारे अमीर खरीद लेते।खुशी जीवन जीने के ढंग से आती है। झोंपड़ी में भी कोई आदमी आनन्द से लबालब मिल सकता है और कोठियों में भी दुखी,अशांत, परेशान आदमी मिल जायेंगें।तो आज से ही सोचने का ढंग बदल लो जिंदगी उत्सव बन जायेगी .......

🙏ओम् शांति🙏

💥आपका दिन शुभ हो 💥

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

🙏 *ॐ शांति* 🙏

कई बार हम स्थूल में तो मांगना *छोड़* देते हैं... पर सूक्ष्म में बहुत कुछ *मांगते* रहते हैं... जैसे यह हमें सम्मान दे, स्नेह दे, सहयोग दे इत्यादि। हम यह *भूल* जाते हैं कि मांगने से कुछ नहीं मिलता... सब कुछ अपने श्रेष्ठ कर्म व उत्तम चरित्र से *कमाना* पड़ता है।

🌸 सुप्रभात... 

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐




#GOD is #ONE

आपको यह जानकर हर्ष होगा ( और शायद आश्चर्य भी ) कि शिवरात्रि कोई साधारण पर्व नही बल्कि सर्व आत्माओं के पारलौकिक परमपिता , निराकार परमात्मा के इस सृष्टि पर दिव्य अवतरण का स्मृति दिवस है । अत : यह पर्व सारे विश्व का सर्व महान पर्व है । शिवरात्रि पर्व का वर्तमान समय से व हम सभी के जीवन से गहरा सम्बंध है । 


#शिवरात्रि_का_रहस्य : - 


आध्यात्मिक अर्थ में रात्रि शब्द , अज्ञान अंधकार व आसुरी लक्ष्णों का सूचक है और शिव शब्द , कल्याणकारी निराकार परमात्मा के लिए है । आज आप चारों ओर देख रहें है पापाचार , दुराचार व भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है । मनुष्य विषय - विकारों की कैद में फंस हुए हैं । ' गीता ' में वर्णित धर्म की ग्लानि के सभी लक्ष्ण साफ - साफ दिखाई दे रहें है । यही वह समय है जबकि , स्वयं सृष्टि के रचयिता निराकार परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर , अज्ञान व अधर्म के अंधकार को मिटाते हैं , जिसका यादगार पर्व है ' महाशिवरात्रि ' । 


#परमात्मा_शिव_का_परिचय : - 


भारत के कोने - कोने में १२ ज्योतिर्लिंग परमात्मा शिव के दिव्य कर्तव्यों की यादगार प्रतिमाएं हैं । दूसरे धर्मो में ' गॉड इज लाइट ' , ' अल्लाह नूर ' , ' एकों ओंकार निराकार ' कहकर , परमपिता परमात्मा को प्रकाश का रूप माना गया है । अत : ज्योतिस्वरूप निराकार परमात्मा की ही यादगार प्रतिमा शिवलिंग है जिसे ज्योतिर्लिंगम् भी कहा जाता है । शिव व शंकर में महान अन्तर है , शंकर जी विनाश की एक शक्ति के प्रतीक है जबकि परमात्मा शिव , रचना - पालना - विनाश तीनों शक्तियों के दाता है । शंकर जी सूक्ष्म शरीर धारी देवता हैं और शिव निराकार परमात्मा हैं , इसलिए शिव को अजन्मा अभोक्ता भी कहा जाता है । 


#शिवरात्रि_पर्व_पर_मनाई_जाने_वाली_रस्में_एवं_उनका_आध्यात्मिक_रहस्य :-


1 शिवरात्रि पर जागरण... 

अर्थात अज्ञान निंद्रा से जागने की निशानी 


2 शिवरात्रि पर व्रत... 

अर्थात विषय विकारों के त्याग की प्रतिज्ञा 


3 जल की लोटी चढ़ाना... 

अर्थात मन के पवित्र प्रेम का अर्पण 


4 कलावा बांधना... 

अर्थात आत्मा का परमात्मा से मन का बंधन बांधना ( मनमनाभव ) 


5 अक - धतूरा चढ़ाना... 

अर्थात मनोविकारों रूपी विष का त्याग करना 


6 बेल - पत्र चढ़ाना... 

अर्थात मन - बुद्वि - संस्कार सहित शिव पर अर्पण होना 


7 तिलक लगाना... 

अर्थात आत्म स्मृति में रहना 


8 बलि चढ़ाना... 

अर्थात स्वयं के मैं पन को मिटाना...


 ओम शांति।

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads