आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..28-06-2021*..🎋


✍🏻दिमाग में विचारों का ट्रैफिक जितना कम होगा जिंदगी का सफर उतना ही आसान होगा।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻मनुष्य सुख की खोज में अपने जीवन को असंतुलित कर लेता है परन्तु वो ये नहीं जानता कि सुख का असली आधार तो संतुलित जीवन ही होता है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*28 जून:-*_ परिवार हो या संगठन सब में सफलता का राज़ है *"एक दूसरे के विचारो को सुनना और रिगार्ड (सन्मान) देना"*।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन:
 
दूसरों के लिए ज़रा भी अच्छा करें तो वो अपने अंदर की ताकत को जागृत करता है। दूसरों के बारे में ज़रा भी अच्छा सोचें तो वो अपने दिल में धीरे-धीरे शेर की ताकत भरता है। आज से हम सब के   लिए अच्छा ही सोचें और करें ... कर भला हो भला.... 

🙏ओम् शान्ति 🙏

♻️आपका दिन शुभ हो ♻️

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

तन से सुन्दर होने के लिये मन से सुन्दर होना *अनिवार्य* है, क्योंकि *संकल्प* से ही *सृष्टि* बनती है और आत्मा की पहली सृष्टि है... उसका *शरीर* । जिसका रोगी या निरोगी होना आत्मा के *अस्वस्थ* या *स्वस्थ* होने पर निर्भर करता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

*उलझनों और कश्मकश में..*
*उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..*

*ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए*
*मैं दो चाल लिए बैठा हूँ*

*लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का ...*

*मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l*

*चल मान लिया.. दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक..*

*गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l*

*ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक..*

*मुझे क्या फ़िक्र..मैं कश्तीया और दोस्त👭🏻👬🏻👫🏻🤝🏻बेमिसाल लिए बैठा हूँ...!!!*
good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️morning😊


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️ 


       👉  युक्ति से मुक्ति 🏵️

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एक बार पागल खाने मे एक                                     पागल किसी तरह अपने कमरे से बाहर निकल गया  तीसरी मंजिल के कमरों के बाहर छत का जो हिस्सा थोड़ा बाहर निकला था, उस छज्जे पर जा खड़ा हुआ। और कुछ समय के बाद अचानक हस्पताल के  वार्डन ने जब देखा कि वह पागल अपने कमरे में नहीं है तो उसे ढूँढते - ढूँढते उसका ध्यान तीसरी मंजिल के बाहर की छज्जे पर गया। उसने सोचा कि अगर वह रोगी वहाँ से छलाँग लगा देगा या पागलपन में इस पर बेपरवाही से घूमेगा तो यह मर जायेगा। इस लिये कुछ अधिक सोचे बिना वह भागा और स्वयं भी वहाँ छज्जे पर जा पहुँचा। वहाँ पहुँचा कर उसने पागल से कहा - सुनाओ भाई, क्या हालचाल है ? यहाँ क्या कर रहे हो ? पागल बड़ी मस्ती से बोला - सोच रहा था कि जैसे पंक्षी पंख फैला कर उड़ते हुए नीचे उतरता है , मैं भी आज पंक्षी की तरह फर्श पर उतरूँ। ऐसा कहते हुए पागल ने मुँह को नीचे की ओर झुकाया और अपनी दोनों भुजाओं तथा हथेलियों को पीठ के पीछे ले जाकर पंख की तरह रूप दिया।


        वार्डन डर गया और चौका! उसने पागल को एक हाथ से तो थपथपाया और दूसरे हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया ताकि वह कहीं नीचे छलाँग न लगा दे। परन्तु उसने देखा कि पागल में बल बहुत है और वह उसे पकड़ कर रोक नहीं सकेगा। उसे यह भी डर था कि अगर वह पागल को जबरदस्ती रोकेगा तो पागल कहीं उसे ही नीचे धक्का न दे दे। परन्तु कुछ ही क्षण में कुछ हो जाने वाला था, इसलिये जल्दी ही कुछ करना था।


      अचानक वार्डन को एक युक्ति सूझी। उसने मुस्कुराते हुए और दोस्ताना तरीके से पागल को कहा - वाह भाई वाह, आप जो करना चाहते हो वह कोई बड़ी बात तो है नहीं। आप तो कोई बड़ा काम करके दिखाओ। और, मुझे विश्वास है कि आप विशेष काम कर सकते है। पागल ने कहा - अच्छा, सुनाओ दोस्त, अगर यह बड़ा काम नहीं है तो और क्या चाहते हो ? तब वार्डन ने कहा - ऊपर से नीचे तो कोई भी जा सकता है पर फर्श से अर्श की ओर एक पंक्षी की तरह उड़ कर दिखाओ। और पंख तो आपको लगे हुए है। चलो आओ, हम दोनों एक-साथ नीचे से ऊपर की ओर उड़ेंगे। यह कहते हुए वह पागल की अंगुली प्यार से पकड़ते हुए उसे कमरे के रस्ते से नीचे ले चला। इस प्रकार उसने पागल की भी जान बचाई और अपना कर्तव्य भी निभाया। अगर वह पागल से जोर-जबरदस्ती या हाथापाई करता तो दोनों ही धड़ाम से धराशायी होते। तो सच है कि युक्ति से ही दोनों की (मौत के मुँह से ) मुक्ति हुई।


सीख - बहुत बार हम बुरे फस जाते या परस्तिथी अनुकूल नहीं होती है। तब युक्ति से ही छुटकारा प् सकते है इस लिये युक्ति से मुक्ति कहा गया है।

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