🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..08-06-2021*..🎋
✍🏻दुसरो की छांव में खड़े रहक हम अपनी परछाई खो देते है, खुद की परछाई के लिये तो धूप में खड़ा होना पड़ता है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻हजारों खोखले शब्दों से, अच्छा वह एक शब्द है, जो रिश्तों मे, स्नेह और स्थायित्व लाए। क्योंकि शब्द महके तो लगाव करते है और शब्द बहके तो घाव करते है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
आंतरिक बल -630
-रेडियो स्टेशन -3-
-हमारा दिमाग एक रेडियो स्टेशन क़ी तरह काम करता हैं ।
- यह बात बहुत कम लोग जानते हैं । यही कारण हैं कि सारा संसार भगवान को अपने अपने ढंग से याद करता हैं परन्तु मनचाही प्राप्ति नहीं होती ।
-राजयोगी भी जिस योग का अभ्यास करते हैं वह बहुत सहज हैं, भगवान स्वंय उन का मार्ग दर्शन कर रहे हैं फिर भी वह निरंतर योगी नहीं बन पा रहे हैं । वह भी अनेको परेशानियों से जकड़े हुए हैं ।
-सर्व प्राप्ति न होने का कारण यह है कि वह यह नहीं जानते कि दिमाग से संदेश कैसे प्रसारित और ग्रहण होते हैं ।
-जब हम अपने को आत्मा समझ परमात्मा के बिंदु रूप को देखतें हुए अपना मन परमधाम मेंं एकाग्र करते हैं और भगवान के किसी एक गुण जैसे कि आप प्यार के सागर हैं इसका सिमरन करते हैं तो इस से दिमाग मेंं बल बनने लगता हैं ।
-इस बल के प्रभाव से सहस्त्रार चक्र मेंं एक ऐसा एंटिना हैं जो भगवान से जुड़ा हुआ हैं वह खुल जाता है और हम भगवान से शक्ति लेने लगते हैं । जितना ज्यादा देर इस गुण का सिमरन करेगे परमधाम की शांति और अन्य शक्तियां जो हम नहीं जानते हैं वह भी अनुभव होने लगेगी ।
-बाबा आप प्यार के सागर हैं इस शब्द का दस हजार बार सिमरन कर लेते हैं तो हमारा मानसिक एनटीना भगवान से इतनी शक्ति खींच लेता हैं जिस से हमारे मन पर एक दिन किसी भी नकारात्मकता का असर नहीं होता और हमें बहुत अच्छी अनुभूति होती हैं । एक अजीब तरह का अनुभव होता हैं ।
-इस अनुभव को आप खुद करेगे तब समझ पाएगे ।
-इस का अनुभव करने के लिए परमात्मा को कल्पना मेंं देखते हुए लिख लिख कर अभ्यास करना है कि भगवान आप प्यार के सागर हैं ।
-आमतौर पर लोग चलते फिरते ये अभ्यास करते हैं और समझते हैं दस हजार बार सिमरन कर दिया हैं । परन्तु हकीकत मेंं 1000 के आसपास की संख्या मेंं अभ्यास कर पाते हैं । कई तो 100 बार से ज्यादा नहीं कर पाते और समझते हैं बहुत हो गया ।
-जबानी अभ्यास करते हैं तो मन चीटिंग कर जाता हैं , क्योकि मन इधर उधर चला जाता हैं ।
-कई लोग माला फेरते हैं उस मेंं भी मन चीट करता हैं । कुछ दिनो तक अभ्यास करने के बाद अंगुलिया अपने आप माला फेरती रहती हैं जैसे बहिनें स्वाटर बुनते समय बिना ध्यान दिए सलाइयाँ चलाती रहती हैं । हम साइकल चलाते हैं और पैर अपने आप चलते रहते हैं यह पता नहीं चलता कि कितनी बार पैडल घुमाया हैं ।
-लिख कर याद करने से ये फायदा है कि जैसे मन कुछ और सोचेगा तो लिखना बंद हो जाएगा ।
- लगभग 6 मास तक लिख कर अभ्यास जरूर करें । फिर आप का संस्कार बन
जाएगा और बिना लिखे भी अभ्यास कर सकेगे ।
- अपने को बिंदु समझने से हम पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो जाते हैं जिस से हमें किसी की ^ देह नहीं खींचती ।
-बिंदु रूप समझने से सातों ऊर्जा चक्र चार्ज होने लगते हैं ।
-बिंदु रूप समझने से हमारी कर्मइन्द्रिया, हमारा मन, बुद्वि और संस्कार हमारा कहना मानने लगते हैं ।
-बिंदु रूप समझने से हमारे साथी हमारा कहना मांनने लगते हैं ।
- अगर हम तीन घंटा बिंदु रूप का अभ्यास कर के किसी कड़े संस्कार वाले व्यक्ति से बात करें तो वह भी हमारा कहना मानेगा और जो लोग आश्रम पर नहीं आते हैं वह भी आने लगेगे ।
-कोई आप के सामने अभद्रता से पेश आ रहा हैं आप धीरे धीरे मुख से बोले आप शांत हो शांत हो आप स्नेही हो स्नेही हो उस पर जादू कि तरह असर होगा ।
-हर पल यह भाव रखो मैं निराकार हूं मैं हवा की तरह दिखता नहीं दिखता नहीं । इस अभ्यास से बहुत अच्छा महसूस होगा ।
-बिंदु रूप समझने से हमारा सूक्ष्म शरीर 5 किलो मीटर प्रति सैकिंड की गति से दौड़ने लगता हैं जिसके प्रभाव से स्थूल शरीर धरती की चुम्बकीय शक्ति को पार कर जाता हैं और हमें हल्का हल्का लगने लगता हैं । हमें ऐसे लगेगा जैसे उड़ रहे हैं । कई योगी तो सच मुच मेंं धरती से 2-3 फिट ऊपर उठ जाते हैं ।
-जितना ज़्यादा बिंदु रूप मेंं टिके रहेगे आप आगे की तरफ झुकते जाएंगे । यह पृथ्वी के चुम्बकीय बल से बचने के लिए हमारा दिमाग करता है क्योकि अगर हम आगे न झुके तो रीढ़ की हड्डी टूट सकती हैं ।
-पढ़ाई करते समय या गहरी सोच मेंं भी विद्यार्थी वा व्यक्ति अनजाने मेंं आगे झुकते जाते है ।
-किसी के प्रति सत्कार या प्यार की भावना आने से भी हम उनके आगे झुक जाते है, क्यो की सत्कार के संकल्प से वही बल पैदा होता जो बिंदु समझने से होता है ।
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*08 जून:-*_ कर्म परछाई की तरह सदा हमारे साथ चलते है। इसलिए श्रेष्ठ कर्म की शीतल छाया में चलो अर्थात श्रेष्ठ कर्म करो
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰
Life is all about three things....
Winning:-
Others Hearts..
Losing:-
Bad Things..
Sharing:-
Happy Moments..
Help the NEEDY👨👩👧👦 FAMILIES 🙏
🌹Sweet👆🏻💫🇲🇰🌌🧘🏻♀️🧘🏻♂️Night🌹
*अंधेरे को हटाने में*
*समय बर्बाद*
*मत करिए।*
*बल्कि*
*दीये को जलाने में*
*समय लगाइए*।
🙏 *ॐ शांति* 🙏
जिस दिन हमारा मन *परमात्मा* को *याद* करने और उसमें *रुचि* लेना शुरू कर देगा, उस दिन हमारी *परेशानियां* हम में रुचि लेना बन्द कर देंगी।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
🙏 *ॐ शांति* 🙏
सकारात्मक सोच का ये मतलब नहीं होता कि हम हर बार ये *आशा* करें कि सब कुछ *श्रेष्ठ* हो, बल्कि उसका मतलब ये *स्वीकार* करना है कि जो कुछ हो रहा है... वही *श्रेष्ठ* है।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️
ओम शांति
*आनंद किसी से मिलता नहीं है, भीतर से आता है। सुख सदा बाहर से आता है। सुख सदा किसी पर निर्भर होता है।। इसलिए सुख के लिए आपको सदा दूसरे का मोहताज होना पड़ता है। अगर आप आनंदित होना चाहते है, तो आप अकेले भी हो सकते हैं।। जिसे आनंद मिलता है, उसे दुख का उपाय नहीं रह जाता। सुख का विपरीत दुख है। दया के समानांतर खड़ी है, क्रूरता। आनंद अकेला है।। क्योंकि यह स्वयँ पर है। द्वंद्व के बाहर है।।*
ॐ शांति
🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️
♻️🌼♻️🌼♻️🌼♻️🌼♻️
अनमोल वचन :
आशा से मनुष्य सौ बरस जी सकता है किन्तु यदि आशा टूट जाये तो वह जीवित नहीं रह सकता, भले ही उसके घर में करोडों की धन दौलत भरी हो। यह आशा और विश्वास जीवन की ताकत है।।संकट जरूर है,लेकिन इसी विष से अमृत निकलेगा। निश्चित ही मनुष्य विजयी होगा,मनुष्यता जीतेगी। तूफान तो आना है, आकर चले जाना है। बादल है ये कुछ पल के,छा कर चले जाना हैं..........
🙏ओम् शांति🙏
🎈आपका दिन शुभ हो 🎈
♻️🌼♻️🌼♻️🌼♻️🌼♻️
♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*देखिये....आज का दुःख 🏵️कल का यह सौभाग्य बनता है*.....
🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
_महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे_...पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से होंसला मिलता था जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था...
मजे की बात यह कि इस होंसले की वजह किसी ऋषि-मुनि या देवता का वरदान नहीं बल्कि श्रवण के पिता का शाप था....
दशरथ जब-जब दुःखी होते थे तो उन्हें श्रवण के पिता का दिया शाप याद आ जाता था... (कालिदास ने रघुवंशम में इसका वर्णन किया है)
श्रवण के पिता ने ये शाप दिया था कि ''जैसे मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के मर रहा हूँ वैसे ही तू भी तड़प-तड़प कर मरेगा.....''
दशरथ को पता था कि यह शाप अवश्य फलीभूत होगा और इसका मतलब है कि मुझे इस जन्म में तो जरूर पुत्र प्राप्त होगा.... (तभी तो उसके शोक से मैं तड़प के मरूँगा)
यानि मुनि का शाप दशरथ के लिए संतान प्राप्ति का सौभाग्य लेकर आया....
ऐसी ही एक घटना सुग्रीव के साथ भी हुई....
सुग्रीव जब माता सीता की खोज में वानर वीरों को पृथ्वी की अलग-अलग दिशाओं में भेज रहे थे..... तो उसके साथ-साथ उन्हें ये भी बता रहे थे कि किस दिशा में तुम्हें क्या मिलेगा और किस दिशा में तुम्हें जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिये....
राम सुग्रीव का ये भौशंगौलिक ज्ञान देखकर हतप्रभ थे...
उन्होंने सुग्रीव से पूछा कि सुग्रीव तुमको ये सब कैसे पता...?
तो सुग्रीव ने उनसे कहा कि...
''मैं बाली के भय से जब मारा - मारा फिर रहा था तब पूरी पृथ्वी पर कहीं शरण न मिली... और इस चक्कर में मैंने पूरी पृथ्वी छान मारी और इसी दौरान मुझे सारे भूगोल का ज्ञान हो गया....''
सोचिये अगर सुग्रीव पर ये संकट न आया होता तो उन्हें भूगोल का ज्ञान नहीं होता और माता जानकी को खोजना कितना कठिन हो जाता...
इसीलिए किसी ने बड़ा सुंदर कहा है : "अनुकूलता भोजन है, प्रतिकूलता विटामिन है और चुनौतियाँ वरदान है और जो उनके अनुसार व्यवहार करे....वही पुरुषार्थी है....
*ईश्वर की तरफ से मिलने वाला हर एक पुष्प अगर वरदान है.......तो हर एक काँटा भी वरदान ही समझो*....
_मतलब.....अगर आज मिले सुख से आप खुश हो...तो कभी अगर कोई दुख,विपदा,अड़चन आजाये.....तो घबराना नहीं....क्या पता वो अगले किसी सुख की तैयारी हो_....