आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..11-06-2021*..🎋


✍🏻सफलता की गिनती यह नहीं कि आप खुद कितने ऊंचे तक उठे हैं बल्कि इसमें है कि आप अपने साथ कितने लोगों को लाए हैं।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻अभिनय के साथ किया गया कर्म कभी फलित नहीं होता चाहे सामाजिक कार्य हो या धार्मिक कार्य। ज्यों ज्यों अभिमान कम होता है, पुन्य की प्राप्ति होने लगती है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*11 जून:-*_ कहते है *"भगवान ने दुःख दिया"* पर जो दुःख देता है उसे दुश्मन कहा जाता है भगवान को तो सुखदाता कहते है फिर दुःख कैसे देंगे।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन:

रिश्तों में निखार सिर्फ अच्छे समय में हाथ मिलाने से नहीं आता बल्कि नाज़ुक समय में हाथ थामने से आता है।कुछ लोग "ज़िन्दगी"होते हैं,कुछ लोग "ज़िन्दगी"में होते हैं। कुछ लोगों से "ज़िन्दगी"होती है,पर कुछ  लोग होते हैं तो "जिंदगी"होती है।                                                                                                                                          

🙏ओम् शान्ति 🙏

🍁आपका दिन शुभ हो 🍁

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*गांव में रहने वाले लोगों की  नजर*
           *शहर पर होती है!!!*
*शहर में रहने वाले की नजर विदेश*
                *पर होती है,,,,*

*विदेश में रहने रहने वाले की नजर ग्रहों*
              *चांद तारों पर है*
     *फिर भी कोई सुखी नही है,,,,!*

  *सुखी वह है जिनकी नजर*
         *अपने👩🏻💫 👦🏻स्वयं पर*
       *अपने👨‍👩‍👧‍👦 परिवार पर*
     *अपने🌍 समाज पर  है,,,,*
   
      ॥ सर्वे भवन्तु सुखिन: ॥

        *अहिंसा परमो धर्म* 
       *जीओ ओर जीने दो*

*स्वस्थ रहे मस्त रहे व्यस्त रहे*.
🙏 *ॐ शांति* 🙏

परेशानी आये तो *ईमानदार* रहें, धन आ जाये तो सरल रहें, अधिकार मिलने पर विनम्र रहें, क्रोध आने पर शांत रहें... यही *जीवन का प्रबंधन* कहलाता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*ओम शान्ति*

हम💥आत्मा के सात7⃣गुण है।

*1⃣ शान्ति :-* सबसे पहले आत्मा को शान्ति चाहिए इसलिये इन्सान कहता है सादा भोजन चलेगा लेकिन शान्ति चाहिए।

*2⃣ सुख :-* किसी को जीवन में दुःख नहीं चाहिए सुख ही चाहिए।

*3⃣ आनन्द :-* हर एक को आनन्द चाहिए किसी को उदासी या गम नहीं चाहिए। जीवन में आनन्द हो बस।

*4⃣ प्रेम :-* हर किसी को प्रेम चाहिए किसी को नफ़रत नहीं चाहिए।हर किसी को प्यार चाहिए।

*5⃣ ज्ञान :-* हर एक को ज्ञान चाहिए। इसलिए भगवान के सामने जाकर प्रार्थना करते हे मनुष्य- *अज्ञान से हमे ज्ञान की और ले चलो, अन्धकार🌌 से हमे प्रकाश🌅 की और ले चलो।*

*6⃣शक्ति :-* शक्ति सबको चाहिए। लेकिन कोन सी शक्ति किसी से लड़ाई करने की शक्ति, नहीं आत्म शक्ति सबको चाहिए इसलिए भगवान के सामने जाकर कहते हे- *निर्बल को बल दो प्रभु, शक्तिहीन को शक्ति दो प्रभु।*

*7⃣ शुद्धि :-* शुद्धि, purity सभी को अच्छी लगती है और सबको चाहिए। इसलिए मनुष्य भक्ति करता है। पूछो भक्ति क्यों करते हो? तो कहेंगे आत्म शुद्धि के लिए। तो हमे भी अपनी आत्मा💥 को शुद्ध और पवित्र बनाना है।

               Om shanti
Education of powers
     An expirience

शक्तियां आत्मा की अनेक जन्मों की  मेमोरी खाली करती हैं विस्तार को सार करने की शक्ति दुनिया को खाली करती है तो  बुद्धि की मेमोरी खाली होती है ।तब आत्मा को अपनी विशालता,नवीनता,गहराई और गूह्यता का पता चलता है ।

विस्तार को सार करना मन आत्मा अपनी लाइट might का प्रभाव देह और दुनिया पर से हटाने लगी।

सार को विस्तार करने की शक्ति मन आत्मा अपनी सूक्ष्म इन्द्रियों का प्रभाव देह और दुनिया पर  फैलाने लगी।

एक है आत्मा की लाइट माईट का प्रभाव 

एक है आत्मा की सूक्ष्म इन्द्रियों का प्रभाव 

सार या विस्तार में जाकर आत्मा अपनी लाइट और माईट फैलाने लगती है धीरे धीरे प्रभाव निकलने लगता है 

सूक्ष्म इन्द्रियों से आत्मा देह और दुनिया पर कब्ज़ा पाती है अर्थात अधिकार पाती है ।

इन्द्रियों को समेटा जाता है 
लाइट और माईट को सार में खींचा जाता है 
समेटने की शक्ति से आत्मा अपना कब्ज़ा देह और दुनिया पर से छोडती है और वतन की ओर प्रस्थान करती है फ़रिश्ता बनकर।

लाइट और माईट का विस्तार और 
और सूक्ष्म इन्द्रियों का विस्तार देह और दुनिया का मालिक बनाता है ।

तब आत्मा मेमोरी खाली कर मालिक बन विश्व सेवा और विश्व कल्याण करने लगती है ।
ब्रह्मा बाबा भी  ये ही कर रहे है अपनी लाइट माईट और सूक्ष्म इन्द्रियों से।

ब्रह्मा बाबा इसी स्टेज पर अव्यक्त वतन से इस अश्वमेध रूद्र ज्ञानयज्ञ कण्ट्रोल  कर रहे हैं ।
          
             Om shanti

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


प्रेरक कहा़नी 🏵️

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यह कहानी संत के ज्ञान को दर्शाने वाली कथा है क्युकि हमेशा ही ये माना जाता है की संत, गुरु, साधू और मुनि महाराज के पास उन सभी सांसारिक... समस्याओ का तुरंत हल मिल जाता है जिसके बारे में आज लोग और गृहस्थी हमेशा से ही परेशान रहते है | 


समाज में साधू,संत,गुरु और मुनि ही हर समस्या की एक मात्र चाबी माने जाते रहे है और यह सही भी है की इनके पास जाने मात्र से ही हमारे मन को शांति प्राप्त हो जाती है और फिर जब इनके दो सांत्वना भरे बोल या ज्ञान बढ़ाने वाले शब्द जब हमारे कान में जाते है तो जेसे अन्दर तक आत्मा को ठंडक पहुंचती हैl


इसलिए आज एक ऐसी ही कहानी लेकर आया हूँ जिससे आप गुरु की महिमा को समझ ही जायेंगे की क्यों और कैसे ये सभी विद्धवान जन तुरंत ही हरेक के मन की समस्या का समाधान कर देते है।


एक बार गोमल सेठ अपनी दुकान पर बेठे थे दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोडा सुस्ताने लगे इतने में ही एक संत भिक्षुक भिक्षा लेने के लिए दुकान पर आ पहुचे।


और सेठ जी को आवाज लगाई कुछ देने के लिए... 


सेठजी ने देखा कि इस समय कौन आया है ? 


जब उठकर देखा तो एक संत याचना कर रहा था।


सेठ बड़ा ही दयालु था वह तुरंत उठा और दान देने के लिए कटोरी चावल बोरी में से निकाला और संत के पास आकर उनको चावल दे दिया।


संत ने सेठ जी को बहुत बहुत आशीर्वाद और दुवाए दी।


तब सेठजी ने संत से हाथ जोड़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि 


 हे गुरुजन आपको मेरा प्रणाम मैं आपसे अपने मन में उठी शंका का समाधान पूछना चाहता हूँ।


संत ने कहा की जरुर पूछो -


तब सेठ जी ने कहा की लोग आपस में लड़ते क्यों है ? 


संत ने सेठजी के इतना पूछते ही शांत स्वभाव और वाणी में कहा की 


सेठ मै तुम्हारे पास भिक्षा लेने के लिए आया हूँ तुम्हारे इस प्रकार के मूर्खता पूर्वक सवालो के जवाब देने नहीं आया हूँ।


संत के मुख से इतना सुनते ही सेठ जी को क्रोध आ गया और मन में सोचने लगे की यह कैसा घमंडी और असभ्य संत है ? 

ये तो बड़ा ही कृतघ्न है एक तरफ मैंने इनको दान दिया और ये मेरे को ही इस प्रकार की बात बोल रहे है इनकी इतनी हिम्मत 


और ये सोच कर सेठजी को बहुत ही गुस्सा आ गया और वो काफी देर तक उस संत को खरी खोटी सुनाते रहे 

और जब अपने मन की पूरी भड़ास निकाल चुके 

तब कुछ शांत हुए तब संत ने बड़े ही शांत और स्थिर भाव से कहा की


जैसे ही मैंने कुछ बोला आपको गुस्सा आ गया और आप गुस्से से भर गए और लगे जोर जोर से बोलने और चिल्लाने लगे।


वास्तव में केवल विवेकहीनता ही सभी झगडे का मूल होता है यदि सभी लोग विवेकी हो जाये तो अपने गुस्से पर काबू रख सकेंगे या हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना सीख जाये तो दुनिया में झगडे ही कभी न होंगे !!!


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