आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..29-07-2021*..🎋


✍🏻सुगन्ध के बिना पुष्प, तृप्ति के बिना प्राप्ति, ध्येय के बिना कर्म एवं प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻अपनी शांति की खोज में हम अक्सर दो गलतियाँ करते हैं। उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते है जिन्हें हम बदल नहीं सकते और जिन चीजों को बदल सकते है उन्हें नजरअंदाज करते है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧

_*29 जुलाई:-*_ एक दूसरे की गलती को फैलाओ नहीं शुभ भावना से उससे दूर करने में मदद करो।

        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏

       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹

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अनमोल वचन:

परमात्मा को गाइड और लिबरेटर कहते हैं,वह हमें दुःखों से लिबरेट (आजाद) करते हैं और सुखों में ले जाने के लिए गाइड करते अर्थात रास्ता बताते हैं।

🙏ओम् शान्ति🙏

🌻आपका दिन शुभ हो🌻

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खूबसूरत है वो👄 लब जिन पर दूसरों के लिए कोई🤲🏻 दुआ आ जाए,
खूबसूरत है वो😊 मुस्कान जो दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए,
खूबसूरत है वो❤️ दिल जो किसी के दुख मे शामिल हो जाए,
खूबसूरत है वो👬🏻👭🏻👫🏻👨‍👩‍👦‍👦🤝🏻एहसास जिस मे प्यार की मिठास हो जाए,
खूबसूरत है वो बातें जिनमे शामिल हों दोस्ती👬🏻👭🏻👫🏻🤝🏻 और प्यार👩‍❤️‍👨 की किस्से, कहानियाँ,
खूबसूरत है वो👩🏻👦🏻आँखे जिनमे किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,
खूबसूरत है वो हाथ🤲🏻🤝🏻जो किसी के लिए मुश्किल🤦🏻‍♀️😷🤦🏻‍♂️ के वक्त🕰️ सहारा बन जाए,
खूबसूरत है वो🤱🏻 दामन जो🌍 दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए.
दो गज🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️ दूरी बहुत बहुत है  स्वस्थ रहे, अपनों👬🏼👭🏻👫🏻के साथ मस्त रहे, अपना👩🏻💫👦🏻 खयाल रखें।                                                   Good👆🏻💫🇲🇰🌌🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️night😊

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*29      जुलाई       2021*  
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*आज   की  पालना*   
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वर्तमान समय अनेक साधनों को देखते हुए साधना को भूल नहीं जाना क्योंकि आखिर में साधना ही काम में आनी हैं। आज मन की खुशी के लिए मनोरंजन के कितने नये-नये साधन बनाते हैं। वह हैं अल्पकाल के साधन और आपकी है सदाकाल की सच्ची साधना। तो साधना द्वारा सर्व आत्माओं का परिवर्तन करो। हाय-हाय लेकर आये और वाह-वाह लेकर जाये।

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

भगवान को पाना *कठिन* है, सभी नहीं पा सकते उसे, *सन्यासियों* का काम है, नहीं...। *भगवान* को पाना आसान है... इसके लिये संसार को नहीं बल्कि केवल सांसारिक *सोच* को छोड़िये और वैसा सोचना शुरू करें जैसे वो कर रहा है, तो *नित्य* प्रतिपल उसका *अनुभव* करने लगेंगे।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

हम सभी अपने "मूड" की चाबी अक्सर 👬🏼👭🏻👫🏻दूसरों के हाथों में दे दिया करते हैं..
परिस्थितियाँ अगर अनुकूल हैं तो "मूड" ठीक रहता है.. ख़ुश😊 रहते हैं..
और अगर परिस्थिति🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️ ठीक नहीं,प्रतिकूल हैं.. मन मुताबिक़ नहीं❌ हैं तो फ़िर जीवन की सारी शान्ति भंग कर लेते हैं..
नेगेटिव🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️ विचारों से जीवन को भर लेते हैं.. उदासीनता को अपना
लेते हैं.. किसी ने ज़रा सी बात कह दी कि अपना😒 मूड ऑफ़ कर लेते हैं , ,
इसका मतलब तो ये हुआ कि आपने अपने मूड की चाबी तो दूसरे
लोगों के हाथों में दे रखी है☆
लेकिन👩🏻💫👦🏻अपने "मूड" की चाबी दूसरों के हाथों में सौपना
समझदारी नहीं बल्कि मूर्खता है..
जैसे कोई अपनी तिजोरी की चाबी किसी दूसरों के हाथों में
सौंप दें तो उसको क्या कहेंगे ? ?
समझदार या मूर्ख ? ?
क्या ऐसा व्यक्ति चैन की साँसें ले पायेगा ? ?
क्या वह शान्ति से जी पायेगा ? ?
नहीं । ।
उस तिजोरी से भी कीमती है आपके🧘🏻‍♀️👆🏻🧘🏻‍♂️जीवन की "शान्ति.."
इसलिये आप👬🏻👭🏻👫🏻 हमेशा ख़ुश😊 रहिये, शांत बने रहिये..साक्षी बने
रहिये..क्यूं कि परिस्थिति🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️ आपके कंट्रोल में❌ नहीं लेकिन आपका
मन🧘🏻‍♂️🧘🏻‍♀️🙇🏻‍♀️🙇🏻‍♂️तो आपके कंट्रोल में है । ।
तो अपने मन को सकरात्मक सोच👆🏻💫📜🙇🏻‍♀️🙇🏻‍♂️ से बदलने का अभ्यास निरंतर करते रहिये !
और अपनी चाबी ख़ुद ही के पास रखिए !
वो चाबी है - सकरात्मक👆🏻💫🇲🇰🙇🏻‍♀️🙇🏻‍♂️ सोच ! !
और सदा, हर🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️ स्थिति में ख़ुश😊 बने रहिये..मुस्कुराते😊 रहिये...। ।
निश्चिंत रहिए ! स्वस्थ रहिए !                  Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️morning😊

*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l* ♥

👆🏻जिनको सर्व धर्म की मानव आत्माएं कहती है, भगवान, अल्लाह, गॉड , खुदा, ईश्वर l वह आते हैं, प्रिय भारत की धरती पर l🌏

🫂इस मिटने वाले, देह रूपी कब्र में दफन होकर, खुद को और खुदा को भूलकर, देह अभिमानी शैतान बन गया तू, विकारों के वश होकर l👺

🇲🇰अब खुद खुदा, तुझे जिस्म की कब्र से जगाकर, वह रूहो का बाप, रुह की पहचान देकर, कुर्बान होने आए हैं   तुझपरl अब उनकी हर बात मानकर, कुर्बान होना पड़ेगा पहले तुझे, उनपरl 🙏🏼

☄️अभी कयामत का समय आया है, जमाने पर l फिर भी तू चिंता मत कर, अपनी बुरी शैतानी आदतों को, खत्म कर lमेरी याद में रहकर l मैं खुदा तुझे पावन, पाक बनाकर l🙇🏻‍♂️

🧎🏻तुझ में अपनी सारी ताकत भरकर, इस दुनिया को जन्नत बनाकर,  तुम्हें शहजादा, शहजादी बनाऊंगा, विश्व का राज्य भाग्य देकर l मैं रहता हूं सूरज चांद सितारों से भी ऊपर l💥

🇲🇰अब मैं ऊपर वाला, आया हूं धरती पर lमुझे पहचान लो, ब्रह्माकुमारी विद्यालय में जाकरl कल ले जाने वाला हूं मैं सभी को, अपने घर ऊपर l🏡 

🚶🏻‍♂️अभी चलते हैं जो, मेरी बात मान कर l कयामत के बाद, वही आएंगे पहले lजन्नते ए जहान की जमी पर l🌏

🇲🇰आज सारी दुनिया को दे रहा हूं मैं यह खबर lइस खबर से कोई भी नहीं रहना बेखबर l🇲🇰


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


🌷 कर्म भोगे बिनां छुटकारा       नहीं  🏵️

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वह दोनों सगे भाई थे। गुरु और माता पिता के द्वारा शिक्षा पाई थी, पूजनीय आचार्यों से प्रोत्साहन पाया था, मित्रों द्वारा सलाह पाई थी। 


उन्होंने वर्षों के अध्ययन, चिन्तन और अन्वेषण के पश्चात जाना था कि दुनिया में सबसे बड़ा काम जो मनुष्य के करने का है वह यह है कि अपनी आत्मा का उद्धार करे। मूर्ख इसे नहीं जानते। वे पत्ते-पत्ते को सींचते फिरते हैं फिर भी पेड़ मुरझाता ही चला जाता है। 


संसार की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक शारीरिक सभी प्रकार की समस्यायें इसी एक बात पर निर्भर हैं कि आदमी ईमानदार बने, सदाचारी हो, आत्म कल्याण करे।


वे दोनों भाई शंख और लिखित इस तत्व को भली प्रकार जान लेने के बाद तपस्या करने लगे। पास पास ही दोनों के कुटीर थे। मधुर फलों के वृक्षों से वह स्थान और भी सुन्दर एवं सुविधाजनक बन गए। ये दोनों भाई अपनी-अपनी तपोभूमि में तप करते और यथा अवसर आपस में मिलते-जुलते थी।


एक दिन लिखित भूखे थे। वे भाई के आश्रम में गये और वहाँ से कुछ फल तोड़ लाये। उन्हें खा रहे थे कि शंख भी वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने पूछा यह फल तुम कहाँ से लाये ? 


लिखित ने उन्हें हंसकर उत्तर दिया-तुम्हारे आश्रम से।


शंख यह सुनकर बड़े दुखी हुए। फल स्वयं कोई बहुत मूल्यवान वस्तु न थे। दोनों भाई आपस में फल लेते देते भी रहते थे किन्तु चोरी से बिना पूछे नहीं उन्होंने कहा-भाई ! यह तुमने बुरा किया। 


किसी की वस्तु बिना पूछे लेने से तुम्हें चोरी का पाप लग गया। लिखित को अब पता चला कि वास्तव में उन्होंने पाप किया है और पाप के फल का बिना भोगे छुटकारा नहीं हो सकता।


दोनों भाई इस समस्या में उलझ गये कि अब क्या करना चाहिए। पाप का फल तुरंत ही मिल जाय तो ठीक अन्यथा प्रारब्ध में जाकर वह बढ़ता ही रहता है। और आगे चलकर ब्याज समेत चुकाना पड़ता है। 


निश्चय हुआ कि इस पाप का फल शीघ्र ही भोग लिया जाय। चूँकि दंड देने का अधिकार राजा को होता है इसलिए लिखित अपने कार्य का दंड पाने के लिए राजा सुद्युम्न के पास पहुँचे।


इस तेज मूर्ति तपस्वी को देखकर राजा सिंहासन से उठ खड़े हुए और बड़े आदर के साथ उन्हें उच्च सिंहासन पर बिठाया। तदुपरान्त राजा ने हाथ जोड़कर तपस्वी से पूछा-महाराज कहिये मेरे योग्य क्या आज्ञा है ? 


लिखित ने कहा-राजन्! मैंने अपने भाई के पेड़ से चोरी करके फल खाये हैं सो मुझे दंड दीजिए इसीलिए आपके पास आया हूँ।


राजा बड़े असमंजस में पड़ा। इस छोटे से अपराध पर इतने बड़े तपस्वी को वह क्या दंड दे। और वह भी ऐसे समय जबकि वह स्वयं अपना अपराध स्वीकार करते हुए दंड पाने के लिए आया है। राजा कुछ भी उत्तर न दे सका।


तपस्वी ने उसके मन की बात जान ली। और उन्होंने न्यायाधिपति से स्वयं ही पूछा कि बताइये शास्त्र के अनुसार चोरों को क्या दंड दिया जाता है? 


न्यायाधीश अपनी ओर से बिना कुछ कहे शास्त्र का चोर प्रकरण निकाल लाये। उसमें विधान था कि चोर के हाथ काट लिये जायें।


‘यही दंड मुझे मिलना चाहिए।’ तपस्वी ने कहा - न्याय दंड किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। व्यक्तियों का ख्याल किये बिना निष्पक्ष भाव से जो व्यवहार किया जाता है वही सच्चा न्याय है। 


राजन् तुमने मुझसे आते समय यह पूछा था मेरे योग्य क्या आज्ञा है? मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ कि शीघ्र ही मेरे दोनों हाथ कटवा डालो।’ राजा विवश था, उसे तपस्वी की आज्ञा पालन करनी पड़ी।


अपने अपराध का दंड पाकर तपस्वी लिखित प्रसन्नतापूर्वक आश्रम को लौट आये। 


अपने भाई की कर्त्तव्य परायणता और कष्ट सहनशीलता को देखकर शंख का गला भर आया और वे उनके गले से लिपट गये। शंख ने कहा-अपराधी हाथों को लेकर जीने की अपेक्षा बिना हाथों के जीना अधिक श्रेष्ठ है। लिखित ! पाप का फल पाकर अब तुम विशुद्ध हो गये।


शंख की आज्ञानुसार लिखित ने पास की नदी में जाकर स्नान किया। स्नान करते ही उनके दोनों हाथ फिर वैसे ही उग आये। वे दौड़े हुए भाई के पास गए और उन नये हाथों को आश्चर्य पूर्वक दिखाया।


शंख ने कहा-भैया, इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। हम लोगों की तपस्या के कारण ही यह क्षतिपूर्ति हुई है। तब लिखित ने और अधिक अचंभित होकर पूछा-यदि हम लोगों की इतनी तपस्या है तो क्या उसके बल से उस छोटे से पाप को दूर नहीं किया जा सकता था?


शंख ने कहा- ‘न’ पाप का परिणाम भोगना ही पड़ता है। उसे बिना भोगे छुटकारा नहीं मिल सकता।

(महाभारत)

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