आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..31-07-2021*..🎋


✍🏻अपनी पीड़ा के लिए आप संसार को दोष न दें अपने मन को समझाएं आपके मन का परिवर्तन ही आपके दुःखों का अंत हैं।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻कहते हैं कि मृत्यु के ठीक पहले मनुष्य को वो सब कर्म दिखते हैं जो उसने जीवन भर किये। तो कर्म कुछ ऐसे करो कि जिसे देखते समय चेहरे पर सुकून हो न कि डर।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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*🎄🌹꧁!! जीवन का सत्य !!꧂🌹🎄​*

*कल्प का संगमयुग ही सुकर्म करने का युग है, जो सारे कल्प के भाग्य का आधार है। अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित होकर परमात्मा पिता की याद में किये गये कर्म ही सुकर्म हैं और आत्मा की चढ़ती कला का एकमात्र आधार है।*

*इस विश्व-नाटक में कर्म के अनादि-अविनाशी, अटल सिद्धान्त के अनुसार हर आत्मा को अपने अच्छे-बुरे कर्म का फल अवश्य मिलता है, इसलिए कभी यह नहीं सोचना है कि जो आज पाप-कर्म कर रहे है, वे सुखी हैं और जो अच्छे कर्म कर रहे हैं, वे दुखी है। ये अभिधारणा अल्पज्ञ मनुष्यों की है, परमात्मा ने हमको कर्म और विश्व-नाटक के सारे विधि-विधानों का ज्ञान दिया है, इसलिए हमारी ऐसी अभिधारणा नहीं हो सकती और न होनी चाहिए।*

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🕉️अगर आप दुनिया की भीड़ से बचना चाहतें हो  , तो 'बस एक काम करना, सच्चाई के रास्ते पर चलना शुरू कर देना।   यहाँ बहुत कम भीड़ है ; और इस रास्ते पर चलने के लिए हर कोई तैयार नहीं होता है।       यद्यपि व्यर्थ के            लोगों से बचने के लिए  और      भी     कई तरीके हैं, मगर सत्य पर चलने से व्यर्थ अपने आप छूट जाता है ,"और श्रेष्ठ प्राप्त हो जाता है।
 
🕉️  गलत दिशा की ओर हजारों कदम चलने की अपेक्षा लक्ष्य की     ओर     चार कदम चलना कई गुना महत्वपूर्ण है।   तुम सत्य को जितना जल्दी हो  सके , चुन लो ताकि परम सत्य परमात्मा भी तुम्हें चुन सके।*
 
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*31 जुलाई:-*_ शान्ति के सागर ईश्वर या अल्लाह यदि सर्वव्यापी है तो विश्व में शान्ति क्यों नही❓।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l* ♥

🌸मीठे बाबा की, याद की शक्ति l63 जन्मों से, चले आ रहे बुराइयों को मिटा देती l🌸 

💥परमात्मा पिता के सत्य ज्ञान और याद से ही, हर पतित आत्मा पावन बन सकती l🇲🇰

👺 बाकी लाखों बार लगाओ गंगा में डुबकी, फिर भी आत्मा पावन नहीं बन सकती l🤝🏻

🇲🇰ज्ञान सागर परमात्मा पिता द्वारा ज्ञान लेकर, जो माता बहने ज्ञानगंगा है बनती lजो परमात्मा पिता से मिलातीl🤴🏻 

👨‍👨‍👧‍👧उनसे करते हैं जो नित्य, ज्ञान की प्राप्ति l वही आत्मा ज्ञान के बल से, याद के बल से, तथा श्रेष्ठ कर्मों के बल से पावन जीवन बनाती l🌸

😌 पुराने स्वभाव संस्कार संबंध, तथा जमाने की कैसी भी आए परस्थिति, फिर भी वह आत्मा कभी नहीं डरती l🚶🏻‍♂️

💥क्योंकि स्वयं भगवान बन जाता है उसका साथी l इस जीवन में, निश्चय की ही परीक्षा होती l😌

❣️मैं आत्मा कल्प कल्प की विजई हूं, परमात्मा पिता सदा है मेरा साथी, ड्रामा की हर सीन निश्चित है, इस निश्चय में रहने वाली आत्मा ही, निश्चिंत रहती l ❣️

🙏🏼फिर वही आत्मा, संपूर्ण पवित्र फरिश्ता बनती l उसको ही होती है, 21 जन्मों के लिए, पावन देवी देवता जीवन की प्राप्ति l💥

🙇🏻‍♂️यह सर्वोच्च अद्भुत प्राप्ति, अभी ही होती lफिर किसी भी समय, किसी भी जन्म में, नहीं हो सकती l🙇🏻‍♂️

🙏 *ॐ शांति* 🙏

अपने *दुर्भाग्य* को जीतना ही *भगवान* के दिल तख्त पर बैठने का एकमात्र तरीका है, और यह संभव है... अपने नकारात्मक व व्यर्थ विचारों को *सकारात्मक*  व *समर्थ* विचारों में परिवर्तन करके ही...। आपके विचार ही आपकी *ऊर्जा* तय करते हैं।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*कोरोना -गुणात्मक वृद्धि 🏵️

FX

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एक बार मुगल बादशाह अकबर और उनका अति प्रिय बुद्धिमान मंत्री बीरबल दोनों शतरंज खेलने बैठे । दोनों के बीच यह शर्त लगी कि उनमें से जो भी व्यक्ति शतरंज की यह बाजी हारेगा, उसे जीतने वाले की इच्छा के अनुसार जुर्माना चुकाना होगा । इसी क्रम में पहले बीरबल बोला जहांपनाह यदि आप जीत गए और मैं हार गया तो हुकुम फरमाएं कि मैं आपको क्या जुर्माना चुकाऊंगा ? बादशाह ने जवाब दिया बीरबल यदि यह बाजी मैं जीता और तुम हारे तो तुम्हें, जुर्माना स्वरूप मुझे सौ स्वर्ण मुद्राएं सौंपनी होगी । इस पर बीरबल ने हां में गर्दन हिलाई ‌। अब बारी बीरबल की थी, वह बोला जहांपनाह यदि इस बाजी में आप हारे और मैं जीता तो आप मुझे जुर्माने के रूप में शतरंज के 64 खानों में गेहूं के दाने रखकर चुकाएंगे‌ लेकिन इसमें मेरी एक छोटी सी शर्त यह रहेगी कि आपको शतरंज के पहले खाने में गेहूं का एक दाना रखना होगा, दूसरे खाने में पहले के दुगने दो दाने, तीसरे खाने में दो के दुगने चार दाने, चौथे खाने में चार के दुगने आठ दाने, पांचवें खाने में आठ के दुगने सोलह दाने । ऐसे करते हुए शतरंज के सभी चौसठ खानों में गेहूं के दाने रख कर वे सारे गेहूं के दाने जुर्माना स्वरूप मुझे सौंप दें । बस यही मेरी शर्त है । बीरबल की इस छोटी सी मांग को सुनकर बादशाह अकबर ने जोरदार ठहाका लगाया और बोला बीरबल मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है । इसके बाद शतरंज का खेल शुरू हुआ । अब संयोग देखिए कि शतरंज की उस बाजी में बीरबल जीत गया और बादशाह अकबर को हार का मुंह देखना पड़ा । अब बारी आई हारने वाले को जीतने वाले का जुर्माना चुकाने की । हारने वाले अकबर बादशाह ने बड़े ही अहंकार के साथ अपने खजांची को हुकुम दिया कि वह बीरबल को शर्त के अनुसार शतरंज के चौसठ खानों में गेहूं के दाने रख कर कुल दाने चुका दें । बीरबल की इस शर्त को पूरी करने के दौरान अकबर बादशाह का खजांची थोड़ी ही देर में पसीने-पसीने हो गया । फिर वह अकबर बादशाह के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला जहांपनाह हम हुकूमत का सारा खजाना खाली कर लें तो भी बीरबल की इस शर्त को पूरी नहीं कर पाएंगे । अकबर याने सुल्तान-ए-हिन्द को खजांची की बात पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब खुद उसने 64 खानों की जोड़ लगाई तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया ।

     आप भी शायद मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं । चलिए मैं आपको समझाता हूं । बीरबल की शर्त के अनुसार जहां शतरंज के पहले खाने में गेहूं का केवल एक दाना, दूसरे खाने में दो दाने, तीसरे खाने में चार दाने ऐसे रखे गये थे वहीं शतरंज के सबसे आखिरी अकेले चौसठवें खाने में गेहूं के 9223372036854775808 दाने रखने पड़ रहे थे और एक से लगा कर चौसठ तक के सभी खानों में रखे जाने वाले गेहूं के कुल दानों की संख्या हो रही थी 18446744073709551615. जिनका कुल वजन होता है 1,19,90,00,00,000 मैट्रिक टन जो कि वर्ष 2019 के सम्पूर्ण विश्व के गेहूं के उत्पादन से 1645 गुणा अधिक है ।

     साथियों, वृद्धि दो तरह की होती है । पहली संख्यात्मक वृद्धि और दूसरी होती है गुणात्मक वृद्धि !! यदि शतरंज के चौसठ खानों में क्रमशः 1, 2, 3…..62, 63, 64 कर के प्रत्येक खाने में उसकी संख्या के अनुसार गेहूं के दाने रखे जाते तो सभी 64 खानों में रखे गेहूं के कुल दानों का योग होता मात्र 2080 दाने और यह कहलाती है संख्यात्मक वृद्धि जबकि बीरबल के द्वारा बताई गई गणना कहलाती है गुणात्मक वृद्धि । जहां संख्यात्मक वृद्धि में 64 खानों का योग मात्र 2080 दाने होते हैं वहीं गुणात्मक वृद्धि में तो मात्र 11 खानों का योग ही 2047 दाने हो जाता है ।

     साथियों, ना मैं गणित की टीचर हूं ना ही विज्ञान की लेकिन कोरोनावायरस की तेज वृद्धि और उसके विश्वव्यापी दुष्प्रभाव का आंकलन करने पर  यह पोस्ट बनाने का विचार आया । कोरोना वायरस की वृद्धि को आप संख्यात्मक वृद्धि समझने की भूल कभी मत करना । हकीकत में कोरोना वायरस की वृद्धि एक गुणात्मक वृद्धि है इसलिए *आप सभी से हाथ जोड़कर विनंती है कि कोरोनावायरस को हल्के में ना लें । इस सम्बन्ध में हम जरा गम्भीर हो जाएं और कम से कम 15 दिन तक अपने परिवार के साथ अपने घरों में ही बने रहें । इससे ना केवल आप खुद सुरक्षित रहेंगे अपितु इस महामारी को फैलने से रोकने की आप एक अहम कड़ी भी बनेंगे क्योंकि इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए एक कड़ी को तोड़ना ज्यादा फायदेमंद है, ज्यादा जरूरी है । यही इसे रोकने का एकमात्र उपाय है*


*सदैव प्रसन्न रहिये*

*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*



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