गोबरा नवापारा नगर के श्री राधाकृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने की चल रही तैयारी
गोबरा नवापारा नगर के श्री राधाकृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने की चल रही तैयारी
गोबरा नवापारा नगर
अखिल कोटि ब्रह्मान्ड नायक, राजाधिराज योगीराज पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी सारे संसार में धूमधाम से मनाने की चल रही तैयारी, पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि आज से 5252 वर्ष पूर्व मथुरा नगरी में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहणी नक्षत्र में हुआ, इस अष्टमी सोमवार को ऐसा ही सर्वार्थ सिद्ध योग था, नगर के श्री राधाकृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने की चल रही तैयारी।
पूरे मंदिर परिसर को आम के पत्तों की बन्दनवार, ध्वजा पताका और झालर से सजाया गया हैं, मंदिर के सर्वराकार मोहनलाल अग्रवाल ने बताया कि लगभग100 साल पहले हमारे पुरखों ने मंदिर निर्माण का मनोरथ सजाया, मंदिर का निर्माण माघ सुदी त्रयोदशी विक्रम संवत् 1980 को पुष्यमित्र नक्षत्र में प्रारम्भ हुआ, और मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी विक्रम संवत् 1982 को मंदिर को सकल समाज हेतु समर्पित कर दिया गया, यह मंदिर सेठ रेखराज चतुर्भुज श्रीराधाकृष्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है, पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री व मेजर गोवर्धन शर्मा ने बताया कि हमारे पितामह गोलोकधाम वासी पं. सूरजमलजी,मलारना डूँगर (राजस्थान) मंदिर के प्रथम पुजारी थे,तत्पश्चात् बनवारीलाल जी, जुगलकिशोर जी ने यहाँ ठाकुर जी की सेवा की, इन दिनों पं. रविशंकर जी मंदिर के पुजारी हैं, मंदिर ट्रष्ट के गोपाल गिरधारीलाल अग्रवाल ने बताया कि मंदिर में सालभर मनाए जाने वाले उत्सवों मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व नन्दोत्सव प्रमुख है, इसके अतिरिक्त शारदीय व चैत्र नवरात्र, दशहरा, शरदपूर्णिमा, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, गोपाष्टमी, होली रंगपंचमी, श्रीहनुमान जन्मोत्सव, जगन्नाथ जी की रथयात्रा, श्रावण में हिन्डोला उत्सव व शिवलिंग पर सहस्त्र जलधारा अभिषेक का भव्य और दिव्य उत्सव मनाया जाता है, सभी पर्वों पर अंचल के सकल समाज के लोग बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं, आगामी वर्षों में मंदिर का जन्म शताब्दी महोत्सव भी धूमधाम से मनाने के विषय में तैयारियाँ की जा रही है।
नगर के ज्योतिष भूषण पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि हमारे पितामह ने इस मंदिर का ना केवल भूमि पूजन कराया वरन भगवान के श्रीविग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा उपरान्त उनके पुजारी के रूप में जीवनपर्यन्त अपनी सेवाएँ दी, जब उनका निर्वाण हुआ तो सेठ जी के परिवार के द्वारा उनका अन्तिम संस्कार कुलेश्वर महादेव मंदिर के समीप त्रिवेणी संगम क्षेत्र में कराया था, अग्रवाल परिवार की सदाशयता व धर्मपरायणता सर्वविदित प्रशंसनीय व अनुकरणीय हैं

