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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..10-08-2021*..🎋


✍🏻वाणी और विचार ये दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कंपनी के हैं, जितनी क्वालिटी और गुणवत्ता अच्छी रखेंगे उतनी कीमत ज्यादा मिलेगी।

💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻ज़िद, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान खर्राटों की तरह होते हैं, जो दूसरा करे, तो चुभते हैं परन्तु स्वयं करें, तो एहसास तक नहीं होता।

🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*10 अगस्त:-*_ अगर हम चाहे तो एक दिन में अपनी दुनिया बदल सकते है, लेकिन अगर इच्छा शक्ति ही न हो तो साल के इन्तेज़ार के बाद भी कुछ भी नहीं बदलता।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

ज्ञानी होने का अर्थ ज्ञान के आधार पर *तर्क-वितर्क* करना नहीं होता... बल्कि ज्ञान की धारणा से अपने अंदर से किसी भी आत्मा के प्रति क्या, क्यों व कैसे को *मिटाना* होता है। *देहभान* को *जीतने* वाला ही सच्चा योगी बन सकता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l* ♥

🌸मीठे बाबा की, याद की शक्ति  63 जन्मों से, चले आ रहे बुराइयों को मिटा देती l🌸 

💥परमात्मा पिता के सत्य ज्ञान और याद से ही, हर पतित आत्मा पावन बन सकती l🇲🇰

👺 बाकी लाखों बार लगाओ गंगा में डुबकी, फिर भी आत्मा पावन नहीं बन सकती l🤝🏻

🇲🇰ज्ञान सागर परमात्मा पिता द्वारा ज्ञान लेकर, जो माता बहने ज्ञानगंगा है बनती lजो परमात्मा पिता से मिलातीl🤴🏻 

👨‍👨‍👧‍👧उनसे करते हैं जो नित्य, ज्ञान की प्राप्ति l वही आत्मा ज्ञान के बल से, याद के बल से, तथा श्रेष्ठ कर्मों के बल से पावन जीवन बनाती l🌸

😌 पुराने स्वभाव संस्कार संबंध, तथा जमाने की कैसी भी आए परस्थिति, फिर भी वह आत्मा कभी नहीं डरती l🚶🏻‍♂️

💥क्योंकि स्वयं भगवान बन जाता है उसका साथी l इस जीवन में, निश्चय की ही परीक्षा होती l😌

❣️मैं आत्मा कल्प कल्प की विजई हूं, परमात्मा पिता सदा है मेरा साथी, ड्रामा की हर सीन निश्चित है, इस निश्चय में रहने वाली आत्मा ही, निश्चिंत रहती l ❣️

🙏🏼फिर वही आत्मा, संपूर्ण पवित्र फरिश्ता बनती l उसको ही होती है, 21 जन्मों के लिए, पावन देवी देवता जीवन की प्राप्ति l💥

🙇🏻‍♂️यह सर्वोच्च अद्भुत प्राप्ति, अभी ही होती lफिर किसी भी समय, किसी भी जन्म में, नहीं हो सकती l🙇🏻‍♂️

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️    

                       

*👉🏿मृत्यु एक सत्य हैं* 🏵️

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एक राधेश्याम नामक युवक था | स्वभाव का बड़ा ही शांत एवम सुविचारों वाला व्यतयक्ति था | उसका छोटा सा परिवार था जिसमे उसके माता- पिता, पत्नी एवम दो बच्चे थे | सभी से वो बेहद प्यार करता था |


इसके अलावा वो कृष्ण भक्त था और सभी पर दया भाव रखता था | जरूरतमंद की सेवा करता था | किसी को दुःख नहीं देता था | उसके इन्ही गुणों के कारण श्री कृष्ण उससे बहुत प्रसन्न थे और सदैव उसके साथ रहते थे | और राधेश्याम अपने कृष्ण को देख भी सकता था और बाते भी करता था | इसके बावजूद उसने कभी ईश्वर से कुछ नहीं माँगा | वह बहुत खुश रहता था क्यूंकि ईश्वर हमेशा उसके साथ रहते थे | उसे मार्गदर्शन देते थे | राधेश्याम भी कृष्ण को अपने मित्र की तरह ही पुकारता था और उनसे अपने विचारों को बाँटता था |


एक दिन राधेश्याम के पिता की तबियत अचानक ख़राब हो गई | उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया | उसने सभी डॉक्टर्स के हाथ जोड़े | अपने पिता को बचाने की मिन्नते की | लेकिन सभी ने उससे कहा कि वो ज्यादा उम्मीद नहीं दे सकते | और सभी ने उसे भगवान् पर भरोसा रखने को कहा |


तभी राधेश्याम को कृष्ण का ख्याल आया और उसने अपने कृष्ण को पुकारा | कृष्ण दौड़े चले आये | राधेश्याम ने कहा – मित्र ! तुम तो भगवान हो मेरे पिता को बचा लो | कृष्ण ने कहा – मित्र ! ये मेरे हाथों में नहीं हैं | अगर मृत्यु का समय होगा तो होना तय हैं | इस पर राधेश्याम नाराज हो गया और कृष्ण से लड़ने लगा, गुस्से में उन्हें कौसने लगा | भगवान् ने भी उसे बहुत समझाया पर उसने एक ना सुनी |


तब भगवान् कृष्ण ने उससे कहा – मित्र ! मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ लेकिन इसके लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा | राधेश्याम ने तुरंत पूछा कैसा कार्य ? कृष्ण ने कहा – तुम्हे ! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो | राधेश्याम झट से हाँ बोलकर तलाश में निकल गया | उसने कई दरवाजे खटखटायें | हर घर में ज्वार तो होती लेकिन ऐसा कोई नहीं होता जिनके परिवार में किसी की मृत्यु ना हुई हो | किसी का पिता, किसी का दादा, किसी का भाई, माँ, काकी या बहन | दो दिन तक भटकने के बाद भी राधेश्याम को ऐसा एक भी घर नहीं मिला |


तब उसे इस बात का अहसास हुआ कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं | इसका सामना सभी को करना होता हैं | इससे कोई नहीं भाग सकता | और वो अपने व्यवहार के लिए कृष्ण से क्षमा मांगता हैं और निर्णय लेता हैं जब तक उसके पिता जीवित हैं उनकी सेवा करेगा |


थोड़े दिनों बाद राधेश्याम के पिता स्वर्ग सिधार जाते हैं | उसे दुःख तो होता हैं लेकिन ईश्वर की दी उस सीख के कारण उसका मन शांत रहता हैं |


दोस्तों इसी प्रकार हम सभी को इस सच को स्वीकार करना चाहिये कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं उसे नकारना मुर्खता हैं | दुःख होता हैं लेकिन उसमे फँस जाना गलत हैं क्यूंकि केवल आप ही उस दुःख से पिढीत नहीं हैं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति उस दुःख से रूबरू होती ही हैं | ऐसे सच को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही जीवन हैं |


कई बार हम अपने किसी खास के चले जाने से इतने बेबस हो जाते हैं कि सामने खड़ा जीवन और उससे जुड़े लोग हमें दिखाई ही नहीं पड़ते | ऐसे अंधकार से निकलना मुश्किल हो जाता हैं | जो मनुष्य मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता हैं उसका जीवन भार विहीन हो जाता हैं और उसे कभी कोई कष्ट  तोड़ नहीं सकता | वो जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता जाता हैं |



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