पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर पूज्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी के अनमोल वचन
पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर पूज्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी के अनमोल वचन
सुरेन्द्र जैन /धरसीवां रायपुर
जाप-ओं ह्रीं उत्तममार्दव धर्मांगाय नम:
चन्द्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी
**निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्रमण संस्कृति के सुर्य108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा*
*शराब होश में पियो,शराब पीने के बाद होश नहीं रहेगा*
1.भुल कहां-रास्ते का पता चल चुका है चलना मत पहले यह पता करना कि जैसे बने पता करना कि जो मैं बोल रहा हूँ इसके पहले जिसने बोला उसका क्या हश्र हूआ एक भूल के कारण अणु बम वनाने वाले को रोना पड़ा उसने सोचा कि दुनिया में सबसे पहले मैने अणु कि खोज की अणु तो पहले से मौजूद था आज व्यक्ति समयसार पड़ने के बाद इतना अहंकारी हो जाता है कि भगवान भूल जाता है गुरु को भूल जाता हैं ऐसे अहंकारीयो की दुर्गति से पुराण भरे पड़े हैं थोड़ा प्रथमानुयोग पड़ लेना अच्छे अच्छे राजा धराशाई हो गये महलो के राजा गलियों में आ गये इसलिए जब जब आपको अंहकर आये तो ये विचार कर लेना मेरे पहले किसने किया है उसका क्या हश्र हुआ जो तुम कर रहे हैं उसका ज्ञान होगा चाहिए उसका हश्र क्या हुआ आज जो जो कर रहे हो उसका परिणाम क्या होगा ज्ञानी का अर्थ णमोकार मंत्र पड़ने वाला इतना ही नहीं उसे सब कुछ पता है आज क्या हो रहा है बहुत पहले आचार्यश्री के साथ मड़िया जी तब देखा शराब होश में पीयो शराब पीने के बाद होश नहीं रहेगा पीने के पहले उसको समझो जैसे ही आप समझ लोगे तो आप शराब को छू ही नहीं सकते।
2.गुरु कोन-संसार में हर कार्य करने के लिए गुरु बनाना पड़ता हैं जितने बड़े आदमी हैं उनसे कुछ नहीं मिलेगा बस इतना जरूर मिल जायेगा कि तुम्हारे लिए बड़े बनने की कला मिल जायेगा आचार्य श्री ने लिखा कि संत संगति से कुछ मिले या ना मिले संगति करने वाला संत वने या ना बने सन्तोषी अवश्य बन जाता है गुरु कौन है जिसने तुमसे पहले जो कर चुका है वह कर चुका है वही गुरु है।
3.मान गलित कब-तीन तीतरो को समझना है आज तक आगे कोई निकल नहीं पाया और हम किसी के पीछे है नहीं एक बार मुझसे किसी ने पूछा महाराजजी आपका चातुर्मास कहा होगा मैने कहा कि आकाश के मध्य में होगा अपन को मध्य में बैठना क्यों कि मध्य है ही नहीं कइ लोग कहते हैं कि मैं जहाँ खड़ा होता हूँ लाइन वही से शुरू होतीं हैं मान जो प्रतिपक्षी है सबसे पहले हमें उसे जीतना है तव हम मार्दव को जीत पायेगा जो कुछ भी मैं कर रहा हूँ उसे अंनत लोग कर चुके हैं मान को गलित करना है नष्ट करना है बस यह विचार कर लेना अनंत चल चुके हैं मान गलित हो जायेगा
4.मेरे पहले हो चुका-जो मैंने आज तक किया वह आज तक अनंत बार हो चुका है जब भरत चक्रवर्ती अपने सेनापति को भी विजयार्ध पर्वत की गुफाओं पर प्रथम भरत चक्रवर्ती लिखने के लिए भेजता है जैसे सेनापति वहां पहुंचता है वहां से कोई जगह ही नहीं बची है चक्रवर्ती का मान गलित हो जाता है।
5.धर्म मंत्र कब-धर्म जब मंत्र बन जाए समझ लेना वह महाशक्ति है ब्रह्मांड की सारी शक्ति समा जाती हैं दया धर्म है लेकिन मंत्र नहीं भक्तामर पर मंत्र बन गए और अमोघ शक्ति बन जाती है जब कोई धर्मात्मा मंत्र में स्थित हो जाए तब इससे बडी शक्ति नहीं होती है
6.मार्दव धर्म क्यो नहीं-व्यक्ति जो कुछ करता है यह दूसरा कोई भी नहीं कर पाएगा जो मैंने चिन्तन किया वह कोई नहीं कर पाएगा तो मैंने समझा जैसा चिंतन किया किसी से नहीं हो पाएगा हम इतनी सी सोच व भूल के कारण आज की जो मार्दव धर्म नहीं कर पा रहे हैं।
*प्रवचन से शिक्षा*-जो मैंने देखा आज तक किसी ने नहीं देखा नहीं मार्दव धर्म नहीं है
