आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..03-09-2021*..🎋

*“अपशब्द”एक ऐसी चिंगारी है,जो कानों में नहीं, सीधा “मन” में आग लगाती है…!!!……*

💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻 पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता*इसलिये पुण्य की पूंजी बढ़ाते चलो।

     

🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹

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        ओम शांति
*कुछ नेकियाँ और कुछ अच्छाइयां अपने जीवन में ऐसी भी करनी चाहिए, जिनका ईश्वर के सिवाय कोई और गवाह् ना हो...!!*
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*03 सितम्बर:-*_ जैसे सूर्य को छिपा नही सकते, ऐसे सत्यता के सूर्य को कोई छिपा नही सकता।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता*
      ओम शांति
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      ॐ शांति
*“अपशब्द”एक ऐसी चिंगारी है,जो कानों में नहीं, सीधा “मन” में आग लगाती है…!!!……*
    ओम शांति
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अनमोल वचनः

जीवन एक रेल गाड़ी है,जो हमेशा चलती रहती है,लोग आते हैं,जाते हैं। जिस भी स्टेशन पर रुकती है,कुछ नए लोग चढ़ते हैं और कुछ पुराने उतर जाते हैं,कुछ आपको अच्छे लगते हैं कुछ बुरे। कुछ थोड़ा साथ देते हैं तो कुछ अधिक।जहाँ तक हो सके सबसे प्रेम का भाव बना कर रखें। परन्तु ध्यान रखें कि कोई भी इस यात्रा में अन्त तक साथ नहीं देता। इसलिए किसी से भी इतना मोह न करें कि जब उसका स्टेशन आये तो हम दुःखी हो जाएँ।

🙏ओम् शान्ति🙏

💥आपका दिन शुभ हो💥

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

सम्पूर्ण जीवन के लिये दो चीजें अनिवार्य है... सुख और समृद्धि। *समृद्धि* के लिये स्थूल धन चाहिये, परन्तु *सुख* के लिये अनिवार्य है सूक्ष्म *धन* ...। जिसको *कमाने* का एकमात्र तरीका है... तन, मन व धन से दूसरों को सुख देना।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l* 

🤴🏻मीठे बच्चे देह अभिमान से रहो, सदा आजाद l मुझ भगवान बाप से होता रहेगा फिर, निरंतर संवाद l🗣️

🇲🇰 मुझ भगवान बाप की ही रहेगी, तुम्हें सदा याद l याद से ही प्राप्त होता है आत्मा को, अतींद्रिय सुख का स्वाद l ☺️

🦅जब से पड़ी है आत्मा में विकारों की खाद l तब से जीवन हो गया है, दुखी बर्बाद l 🌚

☄️अभी महाविनाश मे खत्म हो जाएगा, सर्व धर्मों का विवाद l फिर 21 जन्मों तक, एक ही देवी-देवता धर्म रहेगा, सदा आबाद l🙏🏼 

🌎प्रिय भारत स्वर्ग बनेगा, महाभारी महाभारत के महाविनाश के बाद l अभी संपूर्ण पावन बनने के लिए, एक बाप की ही हो याद l 🧎🏻

❤️कभी भी ना हो, कोई भी फरियाद l फिर सारे विश्व की मिल जाएगी, हमें ही जायदाद l ♥



♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


  *👁️👉🏿अपनी अपनी 🏵️दृष्टि👁️*

  

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एक भिक्षुणी संन्यासीनी स्त्री एक रात एक गांव में भटकती हुई पहूंची । रास्ता भटक गयी थी और जिस गांव में पहूचंना चाहती थी वहां न पहूचंकर, दूसरे गाँव पहूच गयी।



उसने जाकर एक घर का दरवाजा खटखटाया, आधी रात थी दरवाजा खुला लेकिन उस गांव के लोग दुसरे धर्म को मानते थे और वह भिक्षुणी दूसरे धर्म की थी। उस दरवाजे के मालिक ने दरवाजा बंद कर लिया और कहा- देवी यह द्वार तुम्हारे लिये नहीं है। हम इस धर्म को नहीं मानते हैं तुम कहीं और खोज कर लो और उसने चलते वक्त यह भी कहा की इस गांव में शायद ही कोई दरवाजा तुम्हारें लिए खुले।


क्योंकि इस गांव के लोग दूसरे ही धर्म को मानते है। और हम तुम्हारे धर्म के दुश्मन है। आप तो जानते ही हैं कि धर्म-धर्म आपस में बडे क्षत्रु है।


 एक गांव का अलग धर्म हैं, दूसरे गांव का अलग धर्म है। एक धर्म वाले को दसूरे धर्म वाले के यहां कोई जगह नहीं, कोई आशा नहीं, कोई प्रेम नहीं, द्वार बंद हो जाते है।



द्वार बंद हो गये उस गांव में। उसने दो-चार दरवाजे खटखटाये लेकिन दरवाजे बंद हो गये, सर्दी की रात है। अधंरी रात है वह अकेली स्त्री है , वह कहां जायेगी ?



लेकिन धार्मिक लोग इस तरह की बाते कभी नहीं सोचते , धार्मिक लोग ने मनुष्यता जैसी कोई बात कभी सोची ही नहीं। वे हमेशा सोचते हैं हिन्दु हैं या मुसलमान, बौद्ध हैं या जैन। आदमी का सीधा मूल्य उनकी नजर में कभी नही रहा। उस स्त्री को वह गांव छोड देना पडा। आधी रात वह जाकर गांव के बाहर एक पेड़ के नीचे सो गई।



कोई दो घंटे बाद ठण्ड के कारण उसकी नींद खुली उसने आंख खोली उपर आसमान तारों से भरा है। उस पेड़ पर फुल खिल गये है। रात के खिलने वाले फुल उनकी सुगंध चारों तरफ फैल रही है। पेड़ के फुल चटख रहे है। आवाज आ रही है और फूल खिलते चले जा रहे है।



वह आधी घडी मौन उस पेड़ के फूलों को खिलते देखती रही आकाश के तारों को देखती रही। फिर दौडी गांव की तरफ फिर जाकर उसने उन दरवाजों को खटखटाया जिन दरवाजों को उनके मालिकों ने बंद कर लिया था।



आधी रात फिर कौन आ गया ? उन्होंने दरवाजे खोले, वह भिक्षुणी खडी है। उन्होंने कहा हमने मना कर दिया यह द्वार तुम्हारें लिये नहीं हैं फिर दोबारा क्यों आ गई हो।


 लेकिन उस स्त्री के आंखों से कृतज्ञता के आंसु बहे जाते है। उसने कहा नहीं अब द्वार खुलवाने नहीं आयी, अब ठहरने नहीं आई केवल धन्यवाद देने आई हूं।

अगर तुम आज मुझे अपने घर में ठहरा लेते तो रात आकाश के तारे ओर फूलो का चटख कर खिल जाना मैं देखने से वंचित ही रह जाती।


 मैं सिर्फ धन्यवाद देने आई हूं कि तुम्हारी बडी कृपा थी कि तुमने द्वार बंद कर लिये और मैं खुले आकाश के नीचे सो सकी। तुम्हारी बडी कृपा थी कि तुमने घर की दीवालों से बचा लिया और खुले आकाश में मुझे भेज दिया।

जब तुमने भेजा था तब तो मेरे मन को लगा था कैंसे बूरे लोग हैं, अब मैं यह कहने आई हूं कि कैंसे भले लोग हैं इस गांव के मैं धन्यवाद देने आई हूं। परमात्मा तुम पर पर कृपा करें।



जैसी तुमने मुझे एक अनुभव की रात दे दी, जो आनन्द मैंने आज जाना हैं जो फूल मैंने आज खिलते देखे हैं जैसे मेरे भीतर भी कोई चाटख गई हो और खिल गई हो। जैसी आज अकेली रात में आकाश के तारे देखे हैं जैसे मेरे भीतर ही कोई आकाश स्पष्ट हो गया हो, और तारे खिल गये हो मैं उसके लिए धन्यवाद देने आई हूं। भले लोग हैं तुम्हारे गांव के |



परिस्थिति कैसी हैं इस पर कुछ निभर नहीं करता। हम परिस्थिति को कैंसे लेते हैं इस पर सब कुछ निर्भर करता। तब तो राह पर पडे हुए पत्थर भी सीढिया बन जाते है। और जब हम परिस्थतियों को गलत ढंग से लेने के आदि हो जाते हैं तो सीढ़िया भी मंदिर की पत्थर मालूम पडने लगती है। जिनसे रास्ता रूकता हैं पत्थर सीढी बन सकते है। सीढियां पत्थर मालूम हो सकती है, अवसर दूर्भाग्य मालूम हो सकते है।


 हम कैंसे लेते हैं हमारीे देखने की दृष्टि क्या है। हमारी पकड क्या है, जीवन का कोण हमारा क्या है, हम कैंसे जीवन को लेते हैं और देखते है।


आशा भर कर जीवन को देखें। साधक अगर निराश से जीवन को देखेगा तो गति नही कर सकता है।


 आशा से भरकर जीवन को देखें। अधैर्य से भरकर अपने जीवन को देखेंगे तो मन को साधक एक कदम आगे नहीं बढ़ सकता है। धैर्य से अनन्त धैर्य जीवन को देखें। उतावले पन में जीवन को देखेंगे , शीघ्रता में भागते हुए तो साधक एक इंच आगे नही बढ़ सकता है।




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