आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..07-09-2021*..🎋


✍🏻इस अफ़सोस के साथ न उठिये कि कल आप क्या नहीं कर पाए बल्कि इस सोच के साथ उठिये कि आज आप क्या कर सकते हो।

💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻अगर आपमें हर चीज को पॉजिटिव तरीके से समझने की भावना है तो आप जीवन के प्रत्येक क्षण का आनंद ले सकेंगे। चाहे परिस्थिती कष्टदायक हो या सुखदायक।
🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹
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       ओम शांति
: *जीवन का एक सीधा सा नियम है, और वो ये कि अगर अनुशासन नहीं तो प्रगति भी नहीं।। अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है। अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती है।। और अनुशासन में रहकर ही वायु फूलों की खुशबु को अपने में समेटकर स्वयं भी सुगंधित हो जाती है व चारों दिशाओं को सुगंध से भर देती है।। पानी अनुशासन हीन होता है, तो बाढ़ का रूप धारण कर लेता है, हवा अनुशासन हीन होती है। तो आँधी बन जाती है, और अग्नि अगर अनुशासन हीन हो जाती है, तो महा विनाश का कारण बन जाती है।। ऐसे ही अनुशासनहीनता स्वयं के जीवन को तो विनाश की तरफ ले ही जाती है साथ ही साथ दूसरों के लिए भी विनाश का कारण बन जाती है।। गाड़ी अनुशासन में चले तो सफर का आनंद और बढ़ जाता है। इसी प्रकार जीवन भी अनुशासन में चले तो जीवन यात्रा का आनंद और बढ़ जाता है।। जीवन का घोड़ा निरंकुशता अथवा उच्छृंखलता का त्याग करके निरंतर प्रगति पथ पर अथवा तो अपने लक्ष्य की ओर दौड़ता रहे, उसके लिए अपने हाथों में अनुशासन रुपी लगाम का होना भी परमावश्यक हो जाता है।।*
ॐ शांति
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अनमोल वचनः

जैसे सूरज की रौशनी पड़ते ही सूखे पेड पौधे भी खिल जाते है,वैसे ही परमात्मा के ज्ञान प्रकाश से भी हमारा जीवन सदा खिल जाता है।

🙏ओम् शान्ति🙏

🌹आपका दिन शुभ हो🌹

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

*नकारात्मकता* एक *विष* की तरह होती है... जो कि धीरे-धीरे आपके व्यक्तित्व को खत्म कर देती है। इसलिये हर परिस्थिति में *सकारात्मक* रहने का प्रयास करें।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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      ॐ शांति
*जो लोग आपके पद प्रतिष्ठा*

*और पैसे से जुड़े हैं वो लोग*

*केवल सुख में आपके साथ*

*खड़े रहेंगे और जो लोग आपकी*

*वाणी विचार और व्यवहार से*

*जुड़े हैं वो लोग संकट में भी*

*आपके लिये खड़े रहेंगे*

*इसका मतलब ये नहीं के*

*पद प्रतिष्ठा वालों से मुँह मोड़ लो,*

*बल्कि जो आपके वाणी व्यवहार से*

*प्यार करते है, उन्हें मौका न देना की*

*वो कभी आपसे मुँह मोड़ें*

              🌹 *ॐ शांति* 🌹
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अनमोल वचनः

किसी बुरे मनुष्य को सुख भोगता हुआ देख हैरान न हों, क्योंकि उसका आज का सुख उसके पिछले जन्मों का फल है और आज जो वो बुरे काम कर रहा है वह भी उसको भोगना ही पड़ेगा क्योंकि सब कुछ वापस आता है,पुण्य और पाप भी...इसलिए यदि अपना आज और कल सुखमय बनाना है तो दूसरों को न देखें केवल खुद और खुदा पर ध्यान दें और हमेशा अच्छे कर्म करते रहें....  .

🙏ओम् शांति🙏

💐आपका दिन शुभ हो💐

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

*क्रोध* करने पर ईश्वर की *अनुभूति* होना बन्द हो जाती है... यह सिद्ध करता है कि हम विकारों के कारण ही *ईश्वर* से दूर होते हैं, अन्यथा वो तो सदा ही हमसे बात करने के लिये खाली बैठा है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*👉🏿सद्व्यवहार का जादू  🏵️

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किसी गाँव में एक चोर रहता था। 


एक बार उसे कई दिनों तक चोरी करने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे उसके घर में खाने के लाले पड़ गये। 


अब मरता क्या न करता, वह रात्रि के लगभग बारह बजे गाँव के बाहर बनी एक साधु की कुटिया में घुस गया। 


वह जानता था कि साधु बड़े त्यागी हैं, अपने पास कुछ नहीं रखते फिर भी सोचा, 'खाने पीने को ही कुछ मिल जायेगा। तो एक दो दिन का गुजारा चल जायेगा।'


जब चोर कुटिया में प्रवेश कर रहे थे, संयोगवश उसी समय साधु बाबा ध्यान से उठकर लघुशंका के निमित्त बाहर निकले। 


चोर से उनका सामना हो गया। साधु उसे देखकर पहचान गये क्योंकि पहले कई बार देखा था, पर साधु यह नहीं जानते थे कि वह चोर है। 


उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह आधी रात को यहाँ क्यों आया ! 


साधु ने बड़े प्रेम से पूछाः "कहो बालक ! आधी रात को कैसे कष्ट किया ? कुछ काम है क्या ?"


चोर बोलाः "महाराज ! मैं दिन भर का भूखा हूँ।"


साधुः "ठीक है, आओ बैठो। मैंने शाम को धूनी में कुछ शकरकंद डाले थे, वे भुन गये होंगे, निकाल देता हूँ। तुम्हारा पेट भर जायेगा। 


शाम को आ गये होते तो जो था हम दोनों मिलकर खा लेते। पेट का क्या है बेटा ! अगर मन में संतोष हो तो जितना मिले उसमें ही मनुष्य खुश रह सकता है। 'यथा लाभ संतोष' यही तो है।"


साधु ने दीपक जलाया। चोर को बैठने के लिए आसन दिया, पानी दिया और एक पत्ते पर भुने हुए शकरकंद रख दिये। 


फिर पास में बैठकर उसे इस तरह खिलाया, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को खिलाती है। 


साधु बाबा के सद्व्यवहार से चोर निहाल हो गया, सोचने लगा, 'एक मैं हूँ और एक ये बाबा हैं। 


मैं चोरी करने आया और ये इतने प्यार से खिला रहे हैं ! मनुष्य ये भी हैं और मैं भी हूँ। 


यह भी सच कहा हैः आदमी-आदमी में अंतर, कोई हीरा कोई कंकर। मैं तो इनके सामने कंकर से भी बदतर हूँ।'


मनुष्य में बुरी के साथ भली वृत्तियाँ भी रहती हैं, जो समय पाकर जाग उठती हैं। 


जैसे उचित खाद-पानी पाकर बीज पनप जाता है, वैसे ही संत का संग पाकर मनुष्य की सदवृत्तियाँ लहलहा उठती हैं। 


चोर के मन के सारे कुसंस्कार हवा हो गये। उसे संत के दर्शन, सान्निध्य और अमृतवर्षा दृष्टि का लाभ मिला।


एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।

तुलसी संगत साध की, हरे कोटि अपराध।।


उन ब्रह्मनिष्ठ साधुपुरुष के आधे घंटे के समागम से चोर के कितने ही मलिन संस्कार नष्ट हो गये। 


साधु के सामने अपना अपराध कबूल करने को उसका मन उतावला हो उठा। 


फिर उसे लगा कि 'साधु बाबा को पता चलेगा कि मैं चोरी की नियत से आया था तो उनकी नजर में मेरी क्या इज्जत रह जायेगी ! 


क्या सोचेंगे बाबा कि कैसा पतित प्राणी है, जो मुझ संत के यहाँ चोरी करने आया !' 


लेकिन फिर सोचा, 'साधु मन में चाहे जो समझें, मैं तो इनके सामने अपना अपराध स्वीकार करके प्रायश्चित करूँगा। 


इतने दयालू महापुरुष हैं, ये मेरा अपराध अवश्य क्षमा कर देंगे।' संत के सामने प्रायश्चित करने से सारे पाप जलकर राख हो जाते हैं।


उसका भोजन पूरा होने के बाद साधु ने कहाः "बेटा ! अब इतनी रात में तुम कहाँ जाओगे, मेरे पास एक चटाई है, इसे ले लो और आराम से यहाँ सो जाओ। सुबह चले जाना।"


नेकी की मार से चोर दबा जा रहा था। वह साधु के पैरों पर गिर पड़ा और फूट-फूट कर रोने लगा। 


साधु समझ न सके कि यह क्या हुआ ! साधु ने उसे प्रेमपूर्वक उठाया, प्रेम से सिर पर हाथ फेरते हुए पूछाः "बेटा ! क्या हुआ ?"


रोते-रोते चोर का गला रूँध गया। उसने बड़ी कठिनाई से अपने को सँभालकर कहाः 


"महाराज ! मैं बड़ा अपराधी हूँ।"


साधु बोलेः "बेटा ! भगवान तो सबके अपराध क्षमा करने वाले हैं। उनकी शरण में जाने से वे बड़े-से-बड़े अपराध क्षमा कर देते हैं। तू उन्हीं की शरण में जा।"


चोरः "महाराज ! मेरे जैसे पापी का उद्धार नहीं हो सकता।"


साधुः "अरे पगले ! भगवान ने कहा हैः यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है।"


"नहीं महाराज ! मैंने बड़ी चोरियाँ की हैं। आज भी मैं भूख से व्याकुल होकर आपके यहाँ चोरी करने आया था लेकिन आपके सदव्यवहार ने तो मेरा जीवन ही पलट दिया। 


आज मैं आपके सामने कसम खाता हूँ कि आगे कभी चोरी नहीं करूँगा, किसी जीव को नहीं सताऊँगा। 


आप मुझे अपनी शरण में लेकर अपना शिष्य बना लीजिये।"


साधु के प्यार के जादू ने चोर को साधु बना दिया। 


उसने अपना पूरा जीवन उन साधु के चरणों में सदा के समर्पित करके अमूल्य मानव जीवन को अमूल्य-से-अमूल्य परमात्मा को पाने के रास्ते लगा दिया।


महापुरुषों की सीख है कि "आप सबसे आत्मवत् व्यवहार करें क्योंकि सुखी जीवन के लिए विशुद्ध निःस्वार्थ प्रेम ही असली खुराक है। 


संसार इसी की भूख से मर रहा है, अतः प्रेम का वितरण करो। अपने हृदय के आत्मिक प्रेम को हृदय में ही मत छिपा रखो। 


*उदारता के साथ उसे बाँटो, जगत का बहुत-सा दुःख दूर हो जायेगा।"*



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