अपनी वृत्ति में हर एक के प्रति शुभ भावना ही रखें क्योंकि अपनी वृत्ति को शुभ, श्रेष्ठ बनाने से ही सारी दुनिया स्वतः शुध्द अर्थात्‌ श्रेष्ठ बन जायेगी-- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई इंदौर - fastnewsharpal.com
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अपनी वृत्ति में हर एक के प्रति शुभ भावना ही रखें क्योंकि अपनी वृत्ति को शुभ, श्रेष्ठ बनाने से ही सारी दुनिया स्वतः शुध्द अर्थात्‌ श्रेष्ठ बन जायेगी-- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई इंदौर

 अपनी वृत्ति में हर एक के प्रति शुभ भावना ही रखें क्योंकि अपनी वृत्ति को शुभ, श्रेष्ठ बनाने से ही सारी दुनिया स्वतः शुध्द अर्थात्‌ श्रेष्ठ  बन  जायेगी--

ब्रह्मा कुमार नारायण भाई इंदौर



 *गोबरा नवापारा नगर

हम अपनी वृत्ति को शुध्द बनाये तो दृष्टि, कृति वा सृष्टि स्वतः शुध्द बन जायेगी,क्यूंकि जैसा वायुमंडल होता है, वैसी वृत्ति बनती है। जैसे कोई मन्दिर में जाते है तो वहाँ  मनुष्य की वृत्ति क्या होती है ? कोई मनोरंजन में, कोई क्लब में जाते है ,तो मनुष्य की वृत्ति कैसी होती है ? फर्क पड जाता है ना ..?

       *तो वायुमंडल वृत्ति को सहज बदलता है। मानो आपको कोई भी दुःख नही है, लेकिन दुःख के वायुमंडल में जाते हो तो थोडा-सा अंश मात्र,भी दुःख की लहर आ ही जायेगी,और कहाँ खुशी का वायुमंडल हो तो अन्दर कोई उलझन भी होगी ,तो कुछ समय के लिए भूल जाते है क्योंकि वायुमंडल में वृत्ति बदल जाती है ।

*अत: हम अपनी वृत्ति में हर एक के प्रति शुभ भावना ही रखें क्योंकि अपनी वृत्ति को शुभ, श्रेष्ठ बनाने से ही सारी दुनिया स्वतः शुध्द अर्थात्‌ श्रेष्ठ  बन  जायेगी । 

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