आरंग के समीप ग्राम-छटेरा के श्री शिव-सरोवर मन्दिर में प्रारंभ श्रीमद भागवत यज्ञ-ज्ञान सप्ताह में कथा वाचक प.त्रिभुवन महाराज मिश्रा के द्वारा संगीतमय कथा
,आरंग के समीप ग्राम-छटेरा के श्री शिव-सरोवर मन्दिर में प्रारंभ श्रीमद भागवत यज्ञ-ज्ञान सप्ताह में कथा वाचक प.त्रिभुवन महाराज मिश्रा के द्वारा संगीतमय कथा
आरंग।
ग्राम-छटेरा के श्री शिव-सरोवर मन्दिर में प्रारंभ श्रीमद भागवत यज्ञ-ज्ञान सप्ताह में कथा वाचक प.त्रिभुवन महाराज मिश्रा के संगीतमय कथा का सुनकर ग्रामवासी आनन्दित हो रहे है।
भागवत कथा प्रसंग में भगवान श्री कृष्ण के भूमिका का वर्णन करते हुऐ छत्तीसगढ़ी भाषा मे बताया कि राजा यधिष्ठिर के राजसुयज्ञ में श्रीकृष्णजी ने ऋषि-मुनि का चरण-पखार व जूठन-पत्तल उठाने का दायित्व स्वीकार कर कलयुग में सबके लिये सन्देश दिया है कि अतिथि को एक गिलास पानी जरूर देवे व भोजन के बाद थाली को उठाकर अवश्य रखना चाहिए। राजा दुर्योधन के हाथ में श्रीलक्ष्मीजी का वास था लेकिन श्री लक्ष्मीजी का अपमान करने से कुछ भी नही बचा। उन्होंने उन्होंने बताया कि देव स्थल की परिक्रमा से लाभ ही होता है। प्रवचन स्थल में जो व्यक्ति जयकारे नही लगाते है उनका तो घर-परिवार में भी सम्मान नही होता है।
उन्होंने स्वस्थ शरीर के लिये भी कुछ समझाईस दिया।यह जरूरी है कि थोड़ा बहुत परिश्रमवाला कार्य भी करना चाहिये जिससे पसीना निकल जावे।सुबह की ताजी हवा भी लाख रुपये की दवा है।भोजन के बाद 100 कदम पैदल अवश्य चलना चाहिए।उन्होंने कहा पर्यावरण व प्रकृति सेवा के संदर्भ में कहा कि घर में फूल व सजावट के पौधे जरूर लगावे और सेवा करे। इससे वातावरण अनुकूल रहता है और प्रकृति की सेवा भी होता है।उन्होंने लोंगो को हँसाते हुए कहा कि लोग भगवान में नारियल को तोड़कर भोग के रूप में छोटा सा टुकड़ा रख देते है इसी कारण देवी-देवता भी पतले-दुबले हो गए है।उन्होंने यह भी कहा कि विदेश से आने वाले लोग सनातनी धर्म स्वीकार कर रहे है और भारत देश के लोग विदेशी धर्म अपना रहे है।