सिलतरा में अवैध कब्जों और अवैध कार्यो की शिकायत पर सीएसआईडीसी और एकेवीएन मौन रहना संदिग्ध
सिलतरा में अवैध कब्जों और अवैध कार्यो की शिकायत पर सीएसआईडीसी और एकेवीएन मौन रहना संदिग्ध
सुरेन्द्र जैन/ धरसीवां
सीएसआईडीसी द्वारा सिलतरा उद्योगिक क्षेत्र के फेस 1 फेस 2 में आबंटित जमीन उद्योगिक विकास के लिए उद्योगों और कुछ जमीन ग्रीन जोन के लिए सुरक्षित रखा गया था जो कुल 1185 हेक्टयर में फैला है फेस 1 में ग्रीन एरिया के लिए 766.80 हेक्टेयर उद्योग के लिए 643.14 हेक्टेयर फेस 2 में ग्रीनजोन के लिए 417.60 और प्लांट के लिए 266.67 हेक्टेयर के लिये आबंटित है लेकिन नाम का ही ग्रीन जोन है अधिकतर जमीन में अवैध कब्जा है जिसमे अवैध कार्य सन्चालित होते है चाहे कबाड़ी कार्य हो या कोयला मिसिंग का तो कोई यार्ड बना लिया हो वैसे ही उद्योगो के लिए दिए गए जमीन पर लीज में लेने वाले दूसरे व्यक्ति को किराए में दे दिया गया है उनसे सीएसआईडीसी लीज की रकम लेता है भी या नही कोई वसूली करता भी है या नही समझ से परे है।
वैसे ही एकेवीएन पानी और लाइट सड़क व्यवस्था के लिए उद्योगों से करोड़ो वसूलते है पर सिलतरा में एक भी कार्य देखने योग्य नही है प्रदूषण चरम पर है बोर्ड के अधिकारी सड़क सफाई,पानी छिड़काव, बिजली व्यवस्था के नाम पर खानी पूर्ति कर रहे है,
मजेदार बात यह है कि जिस काले डस्ट ,बैकफ्लो आदि वेस्ट मटेरियल को बिना टैक्स बिल के उद्योगपति बेचते है वही सब को कबाड़ी कोयला में मिक्स करके उन्ही उद्योग पतियों को बेचदेते है और यह धँधा उन्ही के पैसो से सन्चालित उपरोक्त बोर्ड के द्वारा दी गयी जमीनों में हो रहा है सीएसआईडीसी द्वारा करता है कि उनके द्वारा 16.98 किमी. बीटी सड़क और 34.41 डब्ल्यूबीएम सड़क का निर्माण किया गया जो वर्तमान में जर्जर स्तिथि में है।
पूरे क्षेत्र में चाहे वो टांडा आकोली से लगा हुआ ग्रीन जोन में कबाड़ियों का कब्ज़ा हो जो जनता के लिए बहने वाली नहर के एकदम किनारे ही केमिकल युक्त रसायनिक प्रदार्थो का अवैध कार्य हो या उद्योगों और स्थानीय सरकारी तंत्र सहित जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जीके टाउनशिप के पास मुख्यराजमार्ग के पास बहने वाला छोटे नाले का अस्तित्व हो जो आज खत्म हो गया है सरकारी जमीने कब्ज़े में हो गया है।
क्षेत्र में ट्रके काटे जा रहे है,आयरन छड़ लोहे के कारोबार बढ़ते जा रहे है चोरी उद्योपतियों की ही हो रही है चोरी का समान उद्योगपति ही ले रहे है और ये सब सरकारी जमीन में हो रहा है किसी का कुछ बिगड़ रहा है तो वो स्थानीय ग्रामीणों का जिनका जमीन और स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन शैली का सर्वनाश हो रहा है।
सिलतरा के आसपास के 10 किलोमीटर तक फैले अवैध कारोबार में कबाडीया बप्पी लहरी बन के गोल्ड मैन बन के घूमते है,वेस्ट मटेरियल के नाम पर लोहा और अन्य चीजें उद्योगों से ही निकलते है,नेटवर्किंग बहुत तगड़ा है रात दिन बिना डर भय के काम होता है मजदूरों की मौत, मजदूरों का शोषण,प्रदूषण और आपराधिक गतिविधियों समाजिक पतन लगातार हो रहे है।
मैं शिकायत करता रहूंगा कभी तो किसी का ज़मीर जिंदा हो और कोई ठोस कार्यवाही करें स्थानीय जनता के बारे में कुछ अच्छा करे।
