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मोहरेंगा स्कूल नामकरण की सियासत के बीच पिसता भविष्य,जिम्मेदार कौन

 मोहरेंगा स्कूल नामकरण की सियासत के बीच पिसता भविष्य,जिम्मेदार कौन



    सुरेन्द्र जैन /धरसीवा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे धरसीवा विधानसभा के मोहरेंगा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नामकरण पर गरमाई सियासत के बीच देश का भविष्य कहे जाने वाले विद्यार्थियों का भविष्य पिस रहा है लेकिन जिम्मेदार मौन है तो आख़िर इसका जिम्मेदार कौन है.....नामकरण के विरोध को लेकर बीते 3 दिनों से मुख्य मार्ग पर धरना प्रदर्शन चक्काजाम जारी है छात्र छात्राओं की भी मौजूदगी बताई जा रही है तो वहीं पड़ोसी गांवो के छात्र छात्राओं को विद्यालय जाने से रोकने की भी बाते सामने आ रही है.....पड़ोसी गांवों के छात्र छात्राओं ने उन्हें स्कुल जाने से रोकने और अभद्र बर्ताव करने स्कूल में ताला लगा देने को लेकर बुधवार को खरोरा टीआई को ज्ञापन भी सौपा है.....इन छात्र छात्राओं ने ज्ञापन में कहा है कि उन्हें पढ़ना है लेकिन जब वह स्कूल गए तो उन्हें रोककर अभद्र बर्ताव किया गया ऐंसे में क्या शासन प्रशासन को यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए था कि जो स्कूली बच्चे पढ़ना चाहते हैं स्कूल जाना चाहते हैं उन्हें सुरक्षित माहौल में स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए लेकिन ऐंसा लगता है जैंसे शासन प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों को भी बच्चों के भविष्य की कोई परवाह नहीं ओर वह नामकरण की चल रही सियासत के सामने मौन हैं......





ज्ञात रहे कि 2 अगस्त को क्षेत्रीय विधायक की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कॉलेज उदघाटन के समय मोहरेंगा स्कूल का नाम स्वर्गीय मण्डलदास गिलहरे के नाम पर करने की घोषणा की है.....मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से ही दिवंगत कांग्रेस नेता के नाम पर नामकरण को लेकर सियासत गरमाने लगी ओर सोमवार से नामकरण के विरोध में धरना प्रदर्शन चक्काजाम शुरू हो गया जिसमे भाजपा नेता खुलकर विरोध में सामने आए तो सतनामी समाज भी नामकरण के समर्थन में आगे आई लेकिन इस सब सियासत के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई की किसी को चिंता नहीं....नामकरण की राजनीति के बीच पिसते भविष्य को लेकर जिम्मेदार अद्धिकारियो जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ओर सरकार का अब तक ढुलमुल रवैया समझ से परे है ओर यह कई सवालों को जन्म दे रहा है की  क्या बच्चे स्कूल का नाम देखने जाते हैं या पढ़ने उन्हें शासकीय स्कूल के नाम से मतलब रहता है या पढ़ाई से....स्कूलों में पढ़ाई हो रही या नही क्या समस्याएं हैं शिक्षक पर्याप्त है या नहीं इन सभी समस्याओं की तरफ कोई कभी ध्यान नहीं देता लेकिन नामकरण को लेकर जारी सियासत में बच्चों को शामिल कर क्या उनके भविष्य से खिलबाड़ करना उचित है।

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