आज मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री - fastnewsharpal.com
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आज मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री

 आज मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन  का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री



नवापारा(राजिम)

नवापारा राजिम इस बार होली मनाए जाने को लेकर पूरे देश में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, होलिका दहन कब करें और रंग कब खेलें ? इस बात को लेकर पूरा देश दो भागों में बंटा हुआ है, सोशल मीडिया में भी विद्वत जनों के बीच मत मतांतर के कारण आम जनमानस में भी संशय और भ्रम की स्थिति बनी हुई है, इस परिस्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि व्रत निर्णय के संबंध में विभिन्न शास्त्रों में जो समाधान बताए गए हैं उसका विश्लेषण करते हुए  यह निश्चय पूर्वक कहा जा सकता है कि आज सोमवार को मध्य रात्रि उपरान्त होलिका दहन करना श्रेयस्कर है, उन्होंने कहा कि होली हमारे देश का एक बड़ा ही महत्वपूर्ण त्योहार है, भारतीय हिंदू कैलेंडर के आखरी महीने का यह आखरी महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसे होली के रूप में देश और दुनिया के लोग मनाते हैं, त्योहारों के संबंध में भद्रा का ध्यान रखा जाता है, विशेष रूप से रक्षा बंधन और होलिका दहन पर्व पर भद्रा का विचार किया जाता है, भद्रा में राखी बांधने पर राजा का और होलिका जलाने पर प्रजा का अरिष्ट होने की बात शास्त्रों में कही गई है, आज सोमवार को चतुर्दशी तिथि 24 घटी 43पल तक अर्थात शाम 4बजकर 17 मिनट तक है उसके बाद पूर्णिमा तिथि लग रही है, चंद्रोदय पूर्णिमा तिथि में ही हो रहा हैऔर भद्रा भी आज शाम इसी समय याने 4:17 पर ही लग रही है और ढलती रात्रि प्रातः 5 बजकर 14 मिनट तक है, यह मृत्यु लोक की भद्रा है, जिसका त्याग करना चाहिए शास्त्रों में प्रदोष व्यापनी भद्रा रहित पूर्णिमा में होलिका दहन की बात कही गई है, जो कि दोनों दिन ही नहीं  मिल रही है,इसलिए शास्त्रों के अनुसार "भद्रा मुखम वर्जएत," भद्रा का मुख छोड़कर पुच्छ में "तिस्त्रः पुच्छ तु नाडीका" भद्रा के पूछ में होलिका दहन किया जा सकता है, इस आधार पर आज रात्रि12:48 से 2:48 के मध्य होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बनता है, हमारे राजीव लोचन मंदिर, श्री सत्यनारायण मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में भी आज मध्य रात्रि उपरान्त होलिका दहन किया जाएगा और यही मुहूर्त श्रेयस्कर होगा, होलिका दहन के दूसरे दिन लगते चैत्र की एकम को धुलेंडी रंग गुलाल से उत्सव मनाने की बात कही गई है, किंतु मत मतांतर से  देश के लोग 7 और 8 मार्च को भी रंग गुलाल खेलकर होली मनाएंगे


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