*सकारात्मक कार्य को नशे के रूप में किया जाए तो मोबाइल रूपी लत से बचा जा सकता है - बीके राजीव* - fastnewsharpal.com
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*सकारात्मक कार्य को नशे के रूप में किया जाए तो मोबाइल रूपी लत से बचा जा सकता है - बीके राजीव*

*सकारात्मक कार्य को नशे के रूप में किया जाए तो मोबाइल रूपी लत से बचा जा सकता है - बीके राजीव*



, बिलासपुर

 जब कोई मोबाइल का इस्तेमाल करता है तो तत्कालीन सुख की अनुभूति होती है अर्थात हमारे ब्रेन में एक डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज होता और यही हार्मोन उस कार्य को पुनः करने का सिग्नल हमारे ब्रेन द्वारा देता है। जब-जब हम खाली होते हैं तो शुरुआत में उसी आनंद की अनुभूति हमें याद दिलाती है तो हमारा मन उसे करने के बारे में सोचता है जिसे तलब कहते हैं। तब मोबाइल में उसी फिल्म या गेम को खेलने के लिए हम मजबूर हो जाते हैं। तत्पश्चात बार-बार उसी क्रिया को करने से उसकी आदत बन जाती और वही आदत चाहे हमारे कार्य अथवा संबंधों में कुछ तकलीफ देने के बावजूद भी हम उसे छोड़ने में खुद को असमर्थ अनुभव करते हैं। उसके लिए हम कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं। यहां तक की उसके लिए हम किसी को मार भी सकते हैं अथवा खुद को भी क्षति पहुंचा सकते हैं। तभी यह एक नशा बन जाता है और हमारे लिए घातक सिद्ध होता है।





उक्त वक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन के द्वारा चलाए जा रहे *"नशा मुक्त भारत अभियान"* के अंतर्गत नशा मुक्ति विशेषज्ञ बीके राजीव भाई ने बिलासापुर नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को मोबाइल की लत से छुटकारा पाने के लिए कुछ आवश्यक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए  कहा। राजीव भाई ने आगे बताया कि एक ओर जहां मोबाइल संबंधों को बनाने का सशक्त साधन है, वहीं दूसरी ओर सुव्यवस्थित जीवन शैली के लिए बाधक भी है। मोबाइल का लगातार उपयोग करना एवं जब मोबाइल का उपयोग करने के लिए स्वयं का नियंत्रण नहीं रहता है इससे मानव के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार  नकारात्मक प्रभाव को मोबाइल एडिक्शन कहा जाता है। वर्तमान मोबाइल फोन एडिक्शन एक ऐसी एडिक्शन जिससे सबसे ज्यादा लोग एडिक्ट होते हैं। मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन से बच्चे कई बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं। इन सारी प्रक्रियाओं अथवा लत से निजात पाने के लिए एक अच्छा नशा जैसे संगीत, नृत्य, या किसी कला अथवा खेल में रुचि रखते हुए समय लगा कर अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है। यदि एक सकारात्मक कार्य को नशे के रूप में किया जाए तो मोबाइल रूपी लत से बचा जा सकता है।

संस्था की बीके संतोषी दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा 8 दशकों से भी ज्यादा समय से सिखाया जा रहा नि:शुल्क सहज राजयोग का अभ्यास किसी भी प्रकार के मोबाइल अथवा सोशल मीडिया से मुक्ति पाने का कारगर उपाय सिद्ध हुआ है। ब्रह्माकुमारीज के सेवा केंद्र में आने वाले भाई बहनों का यह निजी अनुभव है की राजयोग द्वारा आंतरिक शक्तियों का विकास हो जाता है। दृढ़ संकल्प करते ही किसी भी प्रकार के नशों से पार होने की शक्ति आत्मा में जागृत हो जाती है। यह तभी संभव है जब स्वयं को इस शरीर से अलग एक चेतन सत्ता समझ परमात्मा पिता से संबंध जोड़कर अतींद्रिय सुख की अनुभूति की जाए। अंत में सभी उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों को राजयोग का सुंदर अभ्यास कराते स्वयं से प्रेम करना का प्रशिक्षण देते हुए सुंदर अनुभूतियां कराई गई। जिसे अपने जीवन में निरंतर अभ्यास करने से सहज मोबाइल की लत से मुक्ति पाने का रास्ता प्रशस्त किया गया तथा इसे सीखने के लिए सभी को सेवा केंद्र पधारने का निमंत्रण दिया गया।


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