राजिम के सात वर्ष के बालक सिद्धार्थ शर्मा की पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ प्रकाशित - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

राजिम के सात वर्ष के बालक सिद्धार्थ शर्मा की पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ प्रकाशित

 राजिम के सात वर्ष के बालक सिद्धार्थ शर्मा की पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ प्रकाशित




राजिम

 सात वर्षीय बालक सिद्धार्थ शर्मा की पहली पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ हाल ही में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक में लंबी कविता संगृहीत है। पाठकीय सुविधा के लिए इसे सौ अलग-अलग शीर्षकों में बाँटा गया है। लगभग एक सौ एक्कीस पृष्ठों में फैली यह लंबी कविता, जहाँ एक ओर, काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, वहीं दूसरी ओर, एक घोषणा है। घोषणा, जीवन को पूर्णरूपेण स्वीकार करने की। घोषणा, जीवन को आँखें खोलकर देख लेने की। घोषणा, जीवन के हरेक क्षण को जी लेने की। 





अपनी संकल्प-शक्ति से सात वर्ष की उम्र में कविता के इन गुच्छों को एकसूत्र में पिरोकर सिद्धार्थ ने पहली बार नहीं चौंकाया है ! इसके पूर्व सिद्धार्थ द्वारा छह वर्ष की उम्र में अनवरत सत्ताईस मिनट तक दिग्गज कवियों की सोलह कविताओं का मंच पर पाठ किया गया, जिसमें लगभग दो हज़ार चार सौ शब्द हैं। विलक्षण प्रतिभासंपन्न बालक सिद्धार्थ द्वारा कविता के क्षेत्र में अभूतपूर्व विलक्षण योग्यता अर्जित करने के कारण वर्ष 2022 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड तथा एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज किया गया। कविता, शतरंज और गणित के त्रिवेणी संगम सिद्धार्थ को उनकी विलक्षण प्रतिभा के कारण द चाइल्ड प्रोडिज़ी अवार्ड-2022 से भी अलंकृत किया गया। 


राजिम की वरिष्ठ कवयित्री सुधा शर्मा एवं डायरीकार शरद शर्मा के पोते सिद्धार्थ कक्षा तीन में अध्ययनरत हैं। उन्हें सौ तक का पहाड़ा, बीस तक का वर्ग एवं वर्गमूल पाँच वर्ष की उम्र में याद हो गया था। इसके अतिरिक्त, उन्हें दशमलव और प्रतिशत इत्यादि की समझ तब से ही है। वे पच्चीसों अंक की संख्या का जोड़-घटाना पाँच वर्ष की उम्र से ही कर लेते हैं। सिद्धार्थ को शतरंज के सौ प्रकार की ओपनिंग, शतरंज के लगभग पाँच सौ तकनीकी शब्द एवं शतरंज के विश्व चैंपियनों के नाम, भारत के राज्यों की राजधानियों के नाम, छत्तीसगढ़ के जिलों के नाम तथा भारत में स्थित रेलवे भर्ती बोर्डों के नाम एवं अन्य सामान्य ज्ञान, पाँच वर्ष की उम्र में याद हो गए थे। 


चौंकने को बाध्य करती प्रतिभा का कविता के क्षितिज पर यह हस्ताक्षर ही है, जो सिद्धार्थ की पहली पुस्तक पाठकों के हाथ में है। यह पुस्तक एक सात वर्ष के बालक के द्वारा जी गई ज़िंदगी का यथार्थ है। बच्चे स्वयं में अखंड होते हैं। यह अखंडता ही उन्हें अद्भुत बनाती है। अद्वितीय, विलक्षण और मौलिक बनाती है। सिद्धार्थ की उक्त अद्भुत उपलब्धि पर नगरवासियों द्वारा उन्हें सहर्ष बधाइयाँ दी गईं।

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads