संघर्ष की कहानी, लेकिन हार नहीं मानी-आरंग क्षेत्र के आशीष मांडले ने CGPSC मे मेहनत रंग लाया, बने नायब तहसीलदार - fastnewsharpal.com
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संघर्ष की कहानी, लेकिन हार नहीं मानी-आरंग क्षेत्र के आशीष मांडले ने CGPSC मे मेहनत रंग लाया, बने नायब तहसीलदार

संघर्ष की कहानी, लेकिन हार नहीं मानी-आरंग क्षेत्र के आशीष मांडले  ने CGPSC मे मेहनत रंग लाया, बने नायब तहसीलदार 



आरंग

 8 से 10 घंटे के प्राइवेट जॉब करते हुए मिली CGPSC 2021  में राज आशीष को सफलता


संघर्ष की कहानी, लेकिन हार नहीं मानी  :-

रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी युवा ने भी इस बार सीजीपीएससी मे परचम लहराया है। आरंग ब्लाक के भानसोज निवासी राज आशीष मांडले कार्यकारी दंडाधिकारी  (नायब तहसीलदार) का पद हासिल किया है । 

राज के पिता स्व. श्री राजेंद्र मांडले थे । राज ने 

10वीं तक की शिक्षा अध्ययन अपने गांव भानसोज में ही किया उच्च शिक्षा के लिए रायपुर के रविग्राम के स्कुल में 12 वी तक शिक्षा अध्ययन के बाद वे 2012 मे जेईई की परीक्षा पास कर NIT जैसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान से माइनिंग इंजीनियर मे ग्रेजुएशन किए है, पढ़ाई पुरा  होने पर प्राइवेट जाब करते हुए सीजीपीएससी की तैयारी में जुट गए।

अब तक इन्होंने 5 बार सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा और 3 बार इंटरव्यू दिया हैं। आखिर कर राज आशीष को उनकी मेहनत और लगन का फल मिला और उनका चयन कार्यकारी दंडाधिकारी  (नायब तहसीलदार) के पद पर चयन हुआ। राज आशीष ने कहा है कि लक्ष्य तय कर उन्होंने मेहनत की और सफलता मिली। 

अब इस सफलता के बाद वे गरीब किसानों के विकास के लिए काम करेंगे। क्योंकि उन्होंने लोगो की समस्याओं क़ो गांव में बेहद करीब से देखा है।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता श्रीमती अगर बाई मांडले, बड़े भाई अमर माण्डले (अध्यक्ष सतनामी समाज भानसोज), भाभी उर्वशी माण्डले छोटे भाई त्रिविहार आशीष,अपनी नानी खोरबहरीन, चाचा श्री धीरेन्द्र मांडले, श्री जितेंद्र मांडले (पूर्व सरपंच भानसोज) अपने मित्र चांदनी पुरेना,  लक्ष्मीकांत, और यशपाल को दिया है। 

उनकी मां ने कहा मुझे अपने बेटे की इस सफलता पर गर्व है। वह इसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है और मुझे खुशी है कि उसके प्रयासों ने फल अदा किया। अपने बच्चे की जीत पर गर्व का अनुभव कर रही हूं।

पूरे आत्मविश्वास और लगन के साथ मेहनत करने का परिणाम सामने आया है और छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उन्हें सफलता मिल सकी। उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश दिया है कि यदि  असफल हुए तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। सफलता के लिए पूरे कठिन मेहनत, साहस  और धैर्य की आवश्यकता हैं।

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