*जितने अधिकार पूर्वक हम मन को आदेश करेंगे उतना ही वह हमारा कहना मानेगा – ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी* - fastnewsharpal.com
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*जितने अधिकार पूर्वक हम मन को आदेश करेंगे उतना ही वह हमारा कहना मानेगा – ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी*

*जितने अधिकार पूर्वक हम मन को आदेश करेंगे,उतना ही वह हमारा कहना मानेगा – ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी


  

 बिलासपुर 

 आज जितनी दवाइयां और साधन तेजी से बढ़ रहे हैं उतनी ही तरह की बीमारियां बढ़ रही है। तन की अधिकतर बीमारियों का कारण मन है। मन यदि ठीक नहीं है तो मानव शरीर में बहुत कुछ बदल जाता है। इसलिए तन के साथ मन को ठीक रखने के लिए मेडिसिन के साथ मेडिटेशन को भी जीवन का अंग बनाना चाहिए।

उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में चल रहे 21 दिवसीय योगाभ्यास एवं प्रशिक्षण के आठवें दिन सेवाकेन्द्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कही। दीदी ने आगे बताया कि लोग पुनः प्राचीन संस्कृति की ओर लौट रहे हैं। यदि बीमारियों का स्थाई इलाज चाहिए इसके लिए दिनचर्या, खानपान और आहार-विहार शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए राजयोग ध्यान एक अच्छी प्रक्रिया है जो मन को स्वस्थ रखती है। जिस प्रकार किसी भी व्यवस्था को चलाने के लिए कर्मचारी, अधिकारी और मुखिया होते हैं। उसी प्रकार इस शरीर को चलाने के लिए कर्मेंद्रियों के साथ मन, बुद्धि भी होती है। मन अधिकारी है और आत्मा इन कर्मेंद्रियों का राजा। इसलिए मन हमारे कंट्रोल में होना चाहिए ना की हम मन के कंट्रोल में हो। मन में ऐसी शक्ति है कि वह दुनिया की हर चीज आपके चरणों में ला सकती है। उसके अंदर इतनी शक्ति है कि दुनिया की हर चीज पर विजय प्राप्त करा सकता है। परंतु हमारा मन पर अधिकार हो। जितने अधिकार पूर्वक हम उसे आदेश करेंगे उतना ही वह हमारा कहना मानेगा। क्योंकि मन का भी राजा आत्मा है ना कि मन हमारा राजा है। राजयोग के अभ्यास से मन, बुद्धि और संस्कारों पर संपूर्ण राज्य करना है स्वराज्य अधिकारी बनना है।






21 दिवसीय योगाभ्यास एवं प्रशिक्षण के आठवें दिन में योगाचार्य रितु सिंह जी ने कहा की हमारा शरीर पांच तत्वों (जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि और वायु) से मिलकर बना है। वात पित्त और कफ, शरीर का स्वास्थ्य इन तीन चीजों पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है । वात, पित्त, कफ के कारण सैकड़ों बीमारियों का जन्म होता है। ये तीनों अगर शरीर में संतुलित अवस्था में हैं, तो आप स्वस्थ हैं। अगर इनमें से किसी का भी संतुलन बिगड़ा तो रोग उत्पन्न होने लगते हैं। आपकी खराब जीवनशैली और खानपान से इनका प्रभाव बदलता रहता है और यही बीमारियों के मुख्य कारण हैं। इसे ऐसे समझें कि अगर आप कफ दोष को बढ़ाने वाली चीजें ज्यादा खा रहे हैं तो आपको कफ दोष से जुड़े रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। वात, पित्त, कफ के संतुलन बनाये रखने के लिए हमारा खान-पान की हमें क्या खाना चाहिए, क्या पीना चाहिए, क्या करना चाहिए, और क्या ना खाएं, क्या ना पिए, क्या ना करें। यह डाइट चार्ट बताया। योगाचार्य रितु सिंह जी ने ग्रीवा चालन, स्कन्ध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन व त्रिकोणासन आदि योगासनो व प्राणायाम के अभ्यास कराते हुए इनके बारे में विस्तार से जानकारी दी।


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