मन की शक्ति को चार्ज करने के लिए मेडिटेशन की जरूरत - ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी
मन की शक्ति को चार्ज करने के लिए मेडिटेशन की जरूरत - ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी
रायपुर
सारा दिन काम करते -करते हमारे मन की शक्ति कमजोर होने लगती है। मन की शक्ति को चार्ज करने के लिए मेडिटेशन की जरूरत है। समय निकालकर सोचें कि कौन सी बात है जो मुझे डिस्टर्ब करती है। सही सोचने का तरीका यह है कि मेरा मन वही सोचे और उतना ही सोचे जो कि जरूरी हो। मेरे मन का रिमोट मेरे पास हो। हमेशा हाय-हाय करने के बजाय 'वाह-वाह' करने की आदत डालो तो किसी के प्रति मन में द्वेष, बैर, ईर्ष्या की भावना नहीं पनपेगी और भला करने की बात ही मन में आएगी। दूसरों का भला करेंगे तो हमारे जीवन में रौनक अपने आप छा जाएगी।
यह संदेश इनडोर स्टेडियम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'वाह जिंदगी वाह' कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने दिया। उन्हें सुनने के लिए स्टेडियम खचाखच भरा था। पैर रखने की जगह भी नहीं बची थी। स्टेडियम के बाहर प्रोजेक्टर के समक्ष बैठकर हजारों लोगों ने जिंदगी को बेहतर बनाने के टिप्स सुने।
सुकून पाना हो तो अपने लिए समय निकालें
शिवानी दीदी ने कहा कि हम सारी जिन्दगी सामान इकठ्ठा करते रह गए, मकान, गाड़ी सब कुछ पाया लेकिन सुकून नहीं पाया। सुकून पाने के लिए रोज सुबह आधा घण्टा हम अपने लिए समय निकालें। प्रभु चिन्तन और स्व चिन्तन करें तो जीवन में सुकून आ जाएगा और घर मन्दिर बन जाएगा। हम लोग काम में इतने ज्यादा व्यस्त हो गए हैं कि हमें अपने बारे में सोचने का समय ही नहीं है। यही कारण है कि समाज में डिप्रेशन और कैंसर बहुत तेजी से फैल रहा है।
तामसी बातों को जीवन से ही नहीं फोन से भी डिलीट करें
दूसरे के बारे में अनाप-शनाप लेख को न पढ़ें और न ही उसे फारवर्ड करें। गलत बातों को जीवन के साथ अपने फोन से भी डिलीट कर दें।
जीवन में शांति पाने को इन बातों का रखें ध्यान
0 हाय-हाय के बजाय वाह-वाह करें
0 अपने भाग्य को न कोसें, आभार मानें
0 अपनी कमजोरियों का चिंतन करें
0 स्वयं और बच्चों को बेहतर संस्कार दें
0 सोच बदलें, दूसरों में विशेषता ढूंढ़ें
0 हमेशा याद रखें-क्या लेकर जाएंगे
0 खुशियां बांटे, परोपकार करें
0 मन में गांठ न बांधे
0 उलझने की आदत छोड़ दें
0 खुद पूजनीय बनने की कोशिश करें
0 सहनशील बनें
0 दूसरे की कमजोरी का बखान न करें
0 नकारात्मक न सुनें और न बोलें
0 अपने भीतर छुपी रावण रूपी 10 बुराइयों का त्याग करें
मेडिटेशन ने बदल दी मेरी जिंदगी - सुरेश ओबेरॉय
कार्यक्रम में मशहूर फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने भी अपनी जिंदगी में आने वाली परेशानियों और फिर ब्रह्माकुमारी संस्थान की शरण में आकर मेडिटेशन के जरिए पुनः सकारात्मक जीवन जीने के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया- फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के बाद एक दौर ऐसा आया जब पारिवारिक और व्यावसायिक उलझनों के चलते मैं काफी डिप्रेशन में आ गया था। मन में हमेशा टेंशन रहता था। उस वक्त शिवानी दीदी को टीवी पर सुनता था। मन में शांति की चाह लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़ा। इसके बाद जिंदगी बदल गई। अब हाय-हाय करने की जगह वाह-वाह करने का ही दिल करता है। कुछ नकारात्मक बातों को मन से निकालकर सकारात्मक सोचने की जरूरत है। हर किसी के जीवन में आश्चर्यजनक बदलाव आ सकता है।
