छत्तीसगढ़ शासन का सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण गरीबो के साथ मजाक-:अशोक यादव - fastnewsharpal.com
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छत्तीसगढ़ शासन का सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण गरीबो के साथ मजाक-:अशोक यादव

 छत्तीसगढ़ शासन का सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण गरीबो के साथ मजाक-:अशोक यादव



भूमिहीनों को मालिक व ईट दीवाल,पक्का मकान किया जा दर्ज


आरंग

भारतीय जनता पार्टी आरंग मण्डलमंत्री अशोक यादव ने राज्य सरकार द्वारा सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के सत्यापन कार्य में गरीबों हितग्राहियों को केंद्र एवम राज्य सरकार की समस्त जन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने के उद्देश्य से सर्वेक्षण कार्य कराया जा रहा है जिसकी भनक गांव की गरीब एवं पंचायत प्रतिनिधियो को नही है,सर्वेक्षण साफ्टवेयर में भुस्वामी कालम में भूमिहीन परिवारों के लिए उपयुक्त बिंदु अनुचित प्रतीत हो रहा है।परिवार में भूमि की जानकारी में मात्र 2 ऑप्सन है एक 7.5 एकड़ से ज्यादा और 7.5 एकड़ से कम या बराबर ।भूमिहीन का ऑप्सन ही नही है इससे जो परिवार वास्तविक में भूमिहीन है ऐप के अनुसार वह भी 7.5 एकड़ के निचे जमीन दर्ज हो रहा है जबकि ऐप में भूमिहीन परिवारों की वास्तविक जानकारी आती लेकिन राज्य सरकार के षड़यंत्र पूर्वक किए जा रहा है सर्वेक्षण में अनभिज्ञ गरीब ग्रामीणजनों को भविष्य में विभिन्न योजनाओं से वंचित होकर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।एप में कच्चा मकान एवं पक्का मकान मात्र दो ऑप्सन है जिसमे अगर ईट का दीवाल ऊपर  छत सीमेंट कंक्रीट है तो पक्का मकान दर्ज होगा लेकिन ईंट का दीवाल एवं ऊपर खपरैल वाला मकान है दीवाल ईंट का होने के कारण पक्का मकान की श्रेणी में आ रहा है जो गलत है मात्र मिट्टी से बना कच्चा दीवाल ऊपर छत खपरैल वाला मकान ही कच्चा मकान की श्रेणी में आ रहा है जबकि गांव के गरीब बंदर के आतंक के चलते बारिश में मकान गिरने की डर से रोजी मजदूरी कर ईंट दीवाल बनाकर खड़ा करते हैं भले ही ऊपर छत खपरैल का रहता हैं।ऐसे मकान पक्का मकान की श्रेणी में आ जा रहा है क्योंकि सर्वेक्षण कर्ता को मकान की स्थिति जिओ टेक कर हितग्राही के साथ फोटो अपलोड करना है जिसमे ईंट का दीवाल स्वतः ही पक्का मकान की श्रेणी में आ जा रहा है क्योंकि ऐसे मकानों के लिए तीसरा कोई ऑप्सन नही दिया है ऐसे स्थिति में गांव के 95 प्रतिशत गरीब आवास से वंचित हो जाएंगे और जब भी आवास के लिए आवेदन पंचायत द्वारा मंगाया जाएगा और जब एप में ऑनलाइन कच्चा भी पक्का मकान बताएगा ऐसे में गरीब का आवेदन अपात्र की श्रेणी में आ जायेगा जिससे पंचायत एवं ग्रामवासियों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित होगी।

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